India Fourth Largest Economy: भारत ने एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। अब देश दुनिया की चौथी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन चुका है। इस ऐतिहासिक बदलाव की जानकारी नीति आयोग के मुख्य कार्यपालक अधिकारी (CEO) बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने दी है। उन्होंने बताया कि भारत की कुल अर्थव्यवस्था अब 4 ट्रिलियन डॉलर (4000 अरब डॉलर) को पार कर चुकी है और इसने जापान को पीछे छोड़ दिया है।

अब केवल तीन देश हैं भारत से आगे
नीति आयोग के सीईओ ने बताया कि अब भारत से सिर्फ तीन देश ही बड़े हैं। अमेरिका, चीन और जर्मनी। उनका कहना है कि अगर भारत इसी तरह अपनी योजनाओं और विकास की रफ्तार को बनाए रखता है, तो अगले ढाई से तीन साल में भारत तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बन सकता है।
ग्लोबल माहौल भारत के पक्ष में
बीवीआर सुब्रह्मण्यम ने यह भी कहा कि मौजूदा वैश्विक स्थिति भारत के लिए फायदेमंद है। जहां कई देश महंगाई और मंदी की मार झेल रहे हैं, वहीं भारत की अर्थव्यवस्था लगातार विकास कर रही है। देश में निवेश, खपत और प्रोडक्शन के क्षेत्र में तेजी से सुधार हो रहा है।
मैन्युफैक्चरिंग में बन रहा है बड़ा खिलाड़ी
उन्होंने कहा कि भारत अब मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। दुनियाभर की बड़ी कंपनियां भारत में प्रोडक्शन बढ़ाने की सोच रही हैं। सस्ते श्रम, बेहतर इन्फ्रास्ट्रक्चर और सरकार की मदद से भारत ग्लोबल सप्लाई चेन का अहम हिस्सा बन सकता है।
सरकारी संपत्तियों की बिक्री का दूसरा फेज जल्द
नीति आयोग अब सरकारी संपत्तियों को बाजार में उतारने (Asset Monetization) के दूसरे चरण की तैयारी कर रहा है। इसकी घोषणा अगस्त 2025 तक हो सकती है। इसका मकसद है कि सरकार अपने संसाधनों का सही इस्तेमाल करके राजस्व बढ़ा सके और निवेश को प्रोत्साहन दे सके।
GDP ग्रोथ रेट में आई मजबूती
केयरएज रेटिंग्स नाम की एक संस्था की रिपोर्ट के अनुसार, वित्त वर्ष 2025 की चौथी तिमाही में भारत की GDP ग्रोथ रेट 6.8% तक रह सकती है। इसका मतलब है कि देश की आर्थिक रफ्तार पहले से बेहतर हो रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि खेती-किसानी, होटल, ट्रांसपोर्ट और कंस्ट्रक्शन जैसे क्षेत्रों में अच्छी बढ़त देखने को मिली है।
ग्रामीण इलाकों में तेजी से बढ़ रही है खपत
रिपोर्ट में यह भी बताया गया कि गांवों में लोगों की खरीदारी की क्षमता में इजाफा हुआ है, जिससे बाजार में मांग बढ़ी है। वहीं, शहरी इलाकों में यह रुझान थोड़ा धीमा रहा है, लेकिन वहां भी स्थिति स्थिर बनी हुई है।
भारत की इस सफलता का क्या मतलब है?
भारत की यह उपलब्धि सिर्फ एक नंबर नहीं है, बल्कि यह दर्शाता है कि देश अब विश्व अर्थव्यवस्था में अहम भूमिका निभाने लगा है। आने वाले समय में अगर सरकार की योजनाएं सही दिशा में आगे बढ़ती रहीं, तो भारत न सिर्फ तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा, बल्कि वैश्विक नीतियों में भी उसकी आवाज और असर बढ़ेगा।
आत्मनिर्भर भारत की ओर एक और कदम
भारत की यह नई रैंकिंग यह साबित करती है कि देश लगातार प्रगति की राह पर है। चाहे बात नवाचार की हो, निवेश की हो या रोजगार की भारत हर क्षेत्र में आगे बढ़ रहा है। अगर यह रफ्तार बरकरार रही तो वो दिन दूर नहीं जब भारत दुनिया का आर्थिक नेतृत्व भी करेगा।
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