US Fed hike interest rate: FOMC की बैठक के बाद अमेरिकी केंद्रीय बैंक फेडरल रिजर्व ने अपनी ब्याज दर को 75 बीपीएस बढ़ा दिया है। एफओएमसी मिटिंग पर बयान देते हुए यूएस फेडरल रिजर्व ने कहा कि, "समिती लंबे समय में 2 प्रतिशत की दर से अधिकतम रोजगार और मुद्रास्फीति हासिल करना चाहती है। इन लक्ष्यों के समर्थन में समिति ने ब्याज दर बढ़ाने का फैसला किया है। समिती का लक्ष्य निधि दर को 3-3/4 से 4 प्रतिशत तक लाना है।

चलिए यह समझते हैं कि भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर यूएस फेड के ब्याज दरों में बढ़ोतरी का प्रभाव क्या होगा।
भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं पर यूएस फेड वृद्धि का प्रभाव सीमित हो सकता है। हालांकि कभी-कभी इसका प्रभाव बुरा पड़ता है। यूएस फेड के रेट बढ़ाने से एक बात जो होती है वह यह है कि विदेशी निवेशक शेयर मार्केट से पैसा निकालने लगते हैं।
- इसका असर करेंसी मार्केट पर भी देखने को मिल रहा है। इससे भारतीय रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरता है। क्योंकि यूएस फेड ब्याज दर बढ़ाकर डॉलर को मजबूत करना की कोशिश करता है। इसके अलावा निर्यात और खासकर आईटी निर्यात पर असर पड़ सकता है। चूंकि टीसीएस, इंफोसिस, एचसीएल टेक, टेक महिंद्रा जैसी भारतीय कंपनियां और कई अन्य कंपनियां आईटी सेवाएं अमेरिका में प्रदान करती हैं, इसलिए उन पर असर पड़ सकता है।
- यूएस फेड के ब्यजा दर बढ़ाने से रुपये का अवमूल्यन होता है। पूंजी का निकास होता है और मंदी के डर से निर्यात प्रभावित हो सकता है। वास्तव में रुपया हाल ही में 60 पैसे की गिरावट के साथ 83 के निचले स्तर को छुआ है।
शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर
जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व ब्याज दरों में वृद्धि करता है तो बॉन्ड प्रतिफल बढ़ता है। इसके कारण शेयर बाजारों में गिरावट होती है। गिरावट के कारण लोग शेयर बेचना शुरू करते हैं। विदेशी निवेशक खासकर अपना पैसा भारतीय बाजार से निकालने लगते हैं। जिसके कारण बाजार में अस्थिरता बन सकती है।
- कभी-कभी वैश्विक बाजार पहले से ही कीमतों में बढ़ोतरी करते हैं, दरों में बढ़ोतरी होती है, इसलिए शेयरों में कीमत की क्षति घोषणा के दिन सीमित होती है। बाजार हमेशा निकट भविष्य में चीजों को छूट देने की प्रवृत्ति रखते हैं।

एफडी की ब्याज दर बढ़ती है
ब्याज दर के बढ़ने से सावधि जमा समेत अन्य बचत योजनाओं पर मिलने वाला ब्याज दर प्रभावित होता है। निवेशकों को इनपर ब्याज दर में इजाफा देखने को मिलता है।
सोने की कीमतों में गिरावट
जैसे-जैसे अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों में वृद्धि की जाती है। बांड प्रतिफल में वृद्धि होती है। जब अमेरिका में बॉन्ड प्रतिफल बढ़ता है, तो सोने की कीमतो में गिरावट होती है।
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