US Interest Rate : अमेरिका के फेडरल रिजर्व बैंक ने ब्याज दरों में एक बार फिर बढ़ोतरी कर दी है। इसमें इस बार 25 बेसिस पॉइंट की बढ़ोतरी हुई है। इसके साथ ही बेंचमार्क ओवरनाइट इंटरेस्ट रेट 5.25 फीसदी से 5.50 फीसदी की रेंज में चला गया है।
जब अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज बढ़ाया जाता है, जिसे फेडरल फंड्स रेट भी कहा जाता है, तो यह उन ब्याज दरों के रूप में काम करता है। जो बड़े कमर्शियल बैंक एक दूसरे से ओवर नाइट लोन के लिए वसूलते हैं।

इसका मतलब यह है कि यदि यूएस फेड ब्याज दरों में इजाफा कर है, तो कमर्शियल बैंकों के लिए एक-दूसरे से पैसे उधार लेना ज्यादा महंगा हो जाएगा। देश में जब आरबीआई की तरफ से ब्याज दर बढ़ाई जाती हैं, तो कॉमर्शियल बैंकों को आरबीआई से उच्च ब्याज दरों पर पैसा उधार लेना पड़ता है।
अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में इजाफे का भारतीय अर्थव्यवस्था पर असर
जब भी अमेरिकी फेडरल रिजर्व की तरफ से ब्याज दरों में इजाफा किया जाता है, तो चिंता होती है कि इससे अमेरिका में आर्थिक विकास धीमा हो सकता है क्योंकि उधार महंगा हो जाता है। अमेरिका की अर्थव्यवस्था जब धीमी होती है तो इसका असर भारत की आईटी कंपनियों में काफी अधिक पड़ता है।
ग्लोबल इकोनॉमी पर असर
इतना ही नहीं इसके अलावा इसका असर ग्लोबल इकोनॉमी पर भी पड़ सकता है, क्योंकि अमेरिका दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है। मौजूदा वक्त में चिंता है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की ब्याज दरों में बढ़ोतरी से विश्व भर में आर्थिक विकास धीमा हो सकता है। जब भी ब्याज को दरों में इजाफा होता है तो फिर क्या होता है कि उधार लेने की लागत में इजाफा हो जाता है।
इसके साथ ही ब्याज की दरों में इजाफे का असर सोने जैसी वस्तुओं पर भी पड़ता है, जहां व्यक्ति और इंवेस्टर सोने की बिक्री करके सुरक्षित बांडों में आश्रय लेते हैं।
निष्कर्ष
निष्कर्ष के तौर पर ब्याज की दरों में इजाफा से ग्लोबल अर्थव्यवस्था धीमी हो सकती है, मुद्राएं प्रभावित हो सकती है। इससे सोने की प्राइस भी कम हो सकती हैं, जबकि डिपॉजिट और फिक्स्ड डिपॉजिट प्रमाणपत्र ज्यादा आकर्षक हो सकते हैं।


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