ITR Filing last date 2024: 31 जुलाई यानी आज आईटीआर (ITR) फाइल करने की आखिरी तारीख है. अब तक 6 करोड़ से ज्यादा लोगों ने इनकम टैक्स भर दिया है. आज हम जानेंगे कि अगर कोई भी टैक्सपेयर किसी वजह से आईटीआर फाइल नहीं कर पाता हैं, तो क्या होगा और उसे कितनी पेनल्टी या एक्स्ट्रा पैसा देना होगा. इसके अलावा 31 जुलाई के बाद भी किन लोगों को आईटीआर फाइल में छूट दी जाती है.

31 जुलाई तक इनकम टैक्स ना देेने पर क्या होगा?
अगर कोई भी टैक्सपेयर्स 31 जुलाई यानी आज आईटीआर फाइल करने में असमर्थ रहता है, तो उसे 31 दिसंबर तक का समय मिलता है. लेकिन इसमें कई शर्ते है. 31 दिसंबर तक आईटीआर फाइल करने को बिलेटेड इनकम टैक्स रिटर्न (Belated Return) कहा जाता है.
इनकम टैक्स एक्ट, 1961 सेक्शन 234F के तहत बिलेटेड इनकम टैक्स रिटर्न का प्रावधान आया है.
बिलेटेड टैक्स में कितनी होती है पेनल्टी
31 जुलाई केे बाद इनकम टैक्स देने पर सलाना सैलरी के अनुसार ही पेनल्टी लगाई जाती है. इनकम टैक्स विभाग ने देर से आईटीआर फाइल करने की पेनल्टी चार्ज को दो भागो में बांटा है. पहला जिनकी सलाना सैलरी 5 लाख रुपये से कम है और जिनकी सैलरी 5 लाख रुपये से आधिक है.
5 लाख रुपये से कम- अगर आपकी सैलरी 5 लाख रुपये से कम है, तो आपको 1000 रुपये की पेनल्टी देनी पड़ेगी.
5 लाख रुपये से ज्यादा- अगर किसी टैक्सपेयर की सैलरी 5 लाख रुपये से आधिक है, तो उसे 5000 रुपये पेनल्टी के रुप में देने होंगे.
इस फाइल करने का प्रोसेस लगभग सामान्य टैक्स रिटर्न जैसा ही है. बिलेटेड में आप इनकम टैक्स एक्ट सेक्शन 139(4) के तहत फाइल करते हैं.
बिलेटेड रिटर्न फाइल ना करने पर क्या होगा?
अगर कोई टैक्सपेयर बिलेटेड रिटर्न फाइल करने में असमर्थ रहता है, तो इनकम टैक्स उसे एक और मौका देती है. ऐसी स्थिति में आप अपडेटेड रिटर्न के तहत टैक्स फाइल कर सकते हैं. अपडेटेड रिटर्न एसेसमेंट ईयर खत्म होने के 24 महीनें के अंतर्गत टैक्स फाइल किया जा सकता है.
फाइनेंस एक्ट, 2002 सेक्शन 13ु9 (8a) के तहत इनकम टैक्स टैक्सपेयर्स को अपडेटेड रिटर्न की सुविधा देता है.
अपडेटेड रिटर्न फाइल करने पर कोई पेनल्टी नहीं लगती, हालांकि टैक्सपेयर्स को सेक्शन 140b के तहत टैकस् पर लगा चार्ज देना होता है.
किन लोगों को मिलता है ज्यादा समय?
इनकम टैक्स कुछ टैक्सपेयर्स को 31 अक्टूबर तक का समय देता है. यह समय उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिनके खाते को ऑडिट करना अनिवार्य होता है. ऐसे लोगों के लिए आईटीआर फाइल करने की समय सीमा अलग होती है. इस बारे में मिली जानकारी के अनुसार ऐसे लोगों को इनकम टैक्स विभाग की तरफ से तीन महीने का अधिक समय दिया जाता है.
यह आधिक समय सीमा इसलिए मिलती है ताकि व्यक्ति को अपने खाते में ऑडिट करने का समय मिल सकें.
वहीं अगर किसी व्यवसाय में अंतरराष्ट्रीय लेन-देन में ट्रांसफर प्राइसिंग रिपोर्ट देने की जरूरत हो, तो ऐसे व्यवसाय को आईटीआर की तरफ से अतिरिक्त समय मिल जाता है.
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