नयी दिल्ली। टेलीकॉम सेक्टर पिछले काफी समय से अच्छी हालत में नहीं है। जियो को छोड़ दिया जाए तो और कोई कंपनी फाइनेंशियल स्तर पर अधिक मजबूत नहीं है। वोडाफोन आइडिया की हालत तो बहुत ज्यादा खस्ता है। खास कर एजीआर का मामला टेलीकॉम कंपनियों के खिलाफ जाने के बाद पूरे सेक्टर को काफी झटका लगा। जियो बहुत अधिक पुरानी कंपनी नहीं है, जबकि एयरटेल विदेशी निवेश के जरिये बची रह सकती है। मगर वोडाफोन के सामने चुनौतियां अधिक कड़ी हैं। स्थिति ये है कि वोडाफोन कि खस्ता हालत से एयरटेल और जियो को फायदा हो रहा है। क्योंकि वोडाफोन के ग्राहक छिटक रहे हैं, जिससे जियो और एयरटेल की ग्राहक और बाजार हिस्सेदारी बढ़ रही है। वोडाफोन लॉकडाउन के कारण 2जी और 3जी सिम को 4जी में भी नहीं बदल पा रही है। इन सबसे वोडाफोन की आमदनी को झटका लगेगा।
एजीआर एक बड़ी चुनौती
सुप्रीम कोर्ट के फैसले के अनुसार टेलीकॉम कंपनियों को एडजस्टेड ग्रॉस रेवेन्यू (एजीआर) के बकाए का पूरा भुगतान करना है, जिसमें पेनल्टी, ब्याज और पेनल्टी पर ब्याज भी शामिल है। जानकारों के अनुसार भारती एयरटेल भुगतान करने के लिए बेहतर स्थिति में है, क्योंकि इसने हाल ही में फंड जुटाया है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार दिसंबर 2019 में कंपनियों द्वारा बढ़ाए गए टैरिफ का असर सितंबर 2020 तक कम होने की संभावना है। वहीं टेलीकॉम कंपनियों की तरफ से की गई फ्लोर प्राइस की मांग में लॉकडाउन के कारण देरी हो सकती है।
कैसे मिलेगा जियो-एयरटेल को लाभ
वोडाफोन की खराब वित्तीय हालत के कारण इसकी कीमत पर जियो और एयरटेल को फायदा मिलता रहेगा। एजीआर भुगतान के बाद वोडाफोन की हालत और खराब हो सकती है। टेलीकॉम कंपनियों को नये सब्सक्राइबर नहीं मिलेंगे, क्योंकि कोरोनावायरस के कारण लॉकडाउन के चलते लोग ज्यादातर घर पर हैं और दुकानें बंद हैं। मार्च में ग्राहकों के मामले में कंपनियों को अधिक झटका लगने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 24 मार्च को कोरोनोवायरस को फैलने से रोकने के लिए एक अभूतपूर्व कदम उठाते हुए पूरे देश में 21 दिनों के फुल लॉकडाउन की घोषणा की थी।
लॉकडाउन से टेलीकॉम कंपनियों को राहत
इस समय टेलीकॉम सेवाओं को जारी और एक्टिवेट बनाये रखना सरकार की प्रमुख जिम्मेदारी बन गयी है। इसलिए दूरसंचार विभाग ने एजीआर बकाया संबंधित मामलों को अस्थायी रूप से साइड कर दिया है और टेलीकॉम सेक्टर इन्फ्रास्ट्रक्चर पर ध्यान केंद्रित करने का निर्णय लिया है। एक सरकारी अधिकारी के अनुसार बकाया एजीआर का भुगतान करने या चर्चा करने के लिए टेलीकॉम कंपनियों को फिलहाल कोई नोटिस नहीं भेजा गया है। इस समय दूरसंचार विभाग का सारा ध्यान कोरोना महामारी के दौरान टेलीकॉम सर्विस को सुचारू रूप से चलाने पर है।
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