नयी दिल्ली। मकान या कोई और प्रॉपर्टी खरीदने या किराए पर लेने से पहले आपको कुछ चीजों की जानकारी हासिल करना बेहद जरूरी है। यहां हम आपको बताएंगे उन शब्दों के बारे में जिनकी जानकारी आपके पास होनी जरूरी है। उदाहरण के लिए जब आप कोई प्रॉपर्टी खरीदने या किराए लेने के लिए जाते हैं तो आपको दो या इससे ज्यादा तरह के एरिया बताए जाते हैं। यह आपके कंफ्यूज कर सकता है। जैसे कि रियल एस्टेट पोर्टल पर कारपेट एरिया और सुपर बिल्ट-अप एरिया को भी लिस्ट किया जाता। ये दुविधा में डालने वाले शब्द हैं। इस तरह के शब्द न सिर्फ आपको चौंका सकते हैं बल्कि चकमा देने का भी काम कर सकते हैं। आइए जानते हैं इस बारे में विस्तार से।
आपके हिस्से में कितनी जगह आएगी
आपके सामने 3 ऑप्शन रखे जा सकते हैं इनमें कारपेट एरिया, बिल्ट-अप एरिया और सुपर बिल्ट-एप एरिया शामिल है। इनमें कारपेट एरिया वो होता है जिसे कारपेट से कवर किया जाए। यानी अंदरूनी दीवारों की मोटाई को छोड़कर अपार्टमेंट का बाकी क्षेत्रफल। इसमें बालकॉनी शामिल होती है। अब डेवलपर्स के लिए ब्रोशर और वेबसाइट में सभी यूनिट्स के इस एरिया का खुलासा करना जरूरी है। बिल्ट-अप एरिया में फ्लैट के कुल क्षेत्र को शामिल किया जाता है। इसमें कारपेट एरिया, दीवारों की मोटाई और नलिकाओं द्वारा कवर की जगह शामिल होती है। यह कारपेट एरिया से 10-15% अधिक होता है। इसके बाद आता है सुपर बिल्ट-अप एरिया। ये होता कुल बेचा जाने वाला क्षेत्र। बिल्ट-अप एरिया के साथ इसमें लिफ्ट, सीढ़ी, प्रवेश लॉबी, कॉरिडोर सब शामिल होता है।
लोडिंग फैक्टर के बारे में जानना जरूरी
सुपर बिल्ट-अप एरिया और कारपेट एरिया के बीच को अतंर को लोडिंग कहते हैं। लोडिंग फैक्टर नॉन-लिवेबल कॉमन एरिया (सीढ़ी, लिफ्ट, लॉबी और छत के आसपास का स्थान) की सीमा है, जिसे कारपेट एरिया में जोड़ा जाता है और आपसे इसके लिए चार्ज लिया जाता है। डेवलपर द्वारा प्रदान की जाने वाली अतिरिक्त सुविधाओं की लागत आम तौर पर ग्राहकों के जिम्मे लोडिंग शुल्क के रूप में ही डाली जाती है।
लोडिंग की करें कैल्कुलेशन
असल में बड़ी परियोजनाओं के लिए लोडिंग अधिक होती है, जहां सुविधाओं और कॉमन एरिया के लिए ज्यादा जगह दी जाती है। यह जरूरी है कि कोई खरीदार लोडिंग की सही गणना करे। वरना बेवजह अधिक भुगतान करना पड़ेगा।
फ्लोर स्पेस इंडेक्स (एफएसआई)
यह किसी भवन में कुल प्लॉट एरिया में सभी मंजिलों को कवर करने वाले कुल क्षेत्र का अनुपात है। यह अनिवार्य रूप से किसी दिए गए प्लॉट पर अनुमत निर्माण की अधिकतम अमाउंट की तरफ इशारा करता है। एफएसआई अलग-अलग जगह भिन्न होता है। ये प्लॉट के आकार, भवन के प्रकार, साथ लगी सड़क की चौड़ाई और बिजली, पानी और सीवेज लाइनों की उपलब्धता पर निर्भर करता है।
सर्किल रेट
इसे Ready Reckoner Rate भी कहा जाता है। यह वो न्यूनतम मूल्य होता है जिस पर किसी प्रॉपर्टी को ट्रांसफर के मामले में रजिस्टर किया जाना है। किसी संपत्ति को घोषित लेनदेन मूल्य या सरकार द्वारा निर्धारित न्यूनतम दर, जो भी अधिक हो, पर रजिस्टर करना होगा। स्टैंप ड्यूटी की गणना इस मूल्य के प्रतिशत के रूप में की जाती है।
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