नयी दिल्ली। प्राइवेट बैंकों के बाद अब एसबीआई सहित देश के कई सरकारी बैंक हजारों करोड़ रु जुटाने की तैयारी में हैं। दरअसल बैंकों की लोन ईएमआई के मामले में दी गई 6 महीनों की मोहलत के बाद एनपीए में बढ़ोतरी और कैपिटल घट सकती है। इसीलिए वे पहले से पूंजी जुटा कर रखना चाहते हैं। बता दें कि सरकारी बैंक बैंकिंग सिस्टम की डिपॉजिट और एडवांस संभालते हैं। इस समय सरकारी बैंकों को आर्थिक संकट में घिरी सरकार से समय-समय पर और पर्याप्त रूप से पूंजी मिलने की संभावना बहुत कम है। बैंकिंग रेगुलेटर भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने पहले ही कमर्शियल बैंकों को कोरोना संकट के मद्देनजर कैपिटल बफर बनाने के लिए कहा है।
एसबीआई जुटाएगा 25000 करोड़ रु
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई ने पहले संकेत दिया था कि उसकी पूंजी जुटाने की कोई तात्कालिक योजना नहीं है। मगर अब एसबीआई ने अब 25,000 करोड़ रुपये की पूंजी जुटाने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी है। आईडीबीआई बैंक, जिसकी नई प्रमोटर एलआईसी है, की योजना अपनी पूंजी आधार में सुधार के लिए 11,000 करोड़ रुपये की जुटाने की योजना है। बेंगलुरु स्थित केनरा बैंक और सेंट्रल बैंक ऑफ इंडिया दोनों ने इक्विटी कैपिटल के माध्यम से 5,000-5000 करोड़ रुपये जुटाने की योजना बनाई है। इसके अलावा पंजाब नेशनल बैंक, जिसका पूंजी पर्याप्तता अनुपात 14.14 प्रतिशत है, की योजना वर्ष के अंत तक पूंजी जुटाने की है।
सरकारी बैंकों के सामने होगी समस्या
हालांकि पूंजी जुटाने के मामले में प्राइवेट बैंकों के मुकाबले सरकारी बैंकों के सामने एक दिक्कत होगी। वे अच्छे मूल्य (इक्विटी) और रेट (डेब्ट कैपिटल) पर बाजार से पूंजी नहीं जुटा पाएंगे। शेयर बाजार में सरकारी बैंकों की वैल्यूएशन बहुत कम है। तो इसका मतलब साफ है कि अधिक पूंजी जुटाने के लिए सरकारी बैंकों को अधिक हिस्सेदारी बेचनी होगी। सरकारी स्वामित्व और बाजार में कम मूल्यांकन के कारण अधिकांश सरकारी बैंक सरकार की तरफ से मिलने वाली पूंजी पर निर्भर हैं। हाल के दिनों में सरकार ने इन बैंकों में पूंजी डालने के लिए पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड रूट (Recapitalisation Bond Route) का उपयोग किया है।
सरकार ने दिए 3.08 लाख करोड़ रु
पिछले 5 सालों में सरकार ने सरकारी बैकों को 3.08 लाख करोड़ रुपये की पूंजी दी है। वैसे इससे पहले सरकार ने आखिरी बार 2017 में 2.11 लाख करोड़ रुपये की पूंजी इन बैंकों में डालने के लिए पुनर्पूंजीकरण बॉन्ड रूट का इस्तेमाल किया था। आरबीआई के गवर्नर शक्तिकांत दास ने पिछले सप्ताह कहा था कि कोरोना के बाद हाई एनपीए और कैपिटल घटने की संभावना के कारण सरकारी और प्राइवेट बैंकों के लिए पुनर्पूंजीकरण योजना आवश्यक हो गई है। सरकारी बैंकों का वर्तमान पूंजी पर्याप्तता अनुपात 13 प्रतिशत है। ये अच्छा है लेकिन अगर छह महीने की मोहलत के बाद एनपीए बढ़ी तो ये पर्याप्त नहीं है। असल में बैंक पहले ही 8.3 प्रतिशत के हाई एनपीए पर बैठे हैं।
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