नयी दिल्ली। कहा जाता है कि यदि आप पढ़े-लिखे नहीं है तो आप ठीक से बिजनेस नहीं कर सकते। मगर इस बात को एक 62 वर्षीय महिला ने बिल्कुल गलत साबित कर दिया है। इस महिला ने दूध का कारोबार शुरू किया और अब उनकी कमाई किसी कंपनी के मैनेजर से भी ज्यादा है। कोरोना काल में जहां एक तरफ लोगों के सामने नौकरी और कारोबार बचाए रखने की चुनौती है, वहीं गुजरात की एक महिला दूसरों के लिए प्रेरणा बन रही है। आइए जानते हैं इनकी कहानी विस्तार से।
कितनी हुई पिछले साल कमाई
62 वर्षीय नवलबेन चौधरी इस समय दूध बेचकर तगड़ी कमाई कर रही हैं। वे गुजरात के बनासकांठा जिले के नगाणा गांव में रहती हैं और इसी गांव से अपना कारोबार चलाती हैं। उनके पास ढेर सारी गाय और भैंसें हैं। बता दें कि बीता साल लोगों के लिए आर्थिक मुसीबत तक लेकर आया, जबकि नवलबेन ने कोरोना संकट के बावजूद 1.10 करोड़ रु कमाए।
कितनी हैं गाय-भैंसें
नवलबेन की काफी बड़ी डेयरी है, जिसमें 80 भैंस और 45 गाय है। इन पशुओं से रोजाना 1,000 लीटर दूध मिल जाता है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि 2019 नवलबेन ने 87.95 लाख रुपए का दूध बेचा। उसी साल वे बनासकांठा में सबसे ज्यादा दूध बेचने वाली विक्रेता बन गई थीं। फिर पिछले साल उन्होंने 1.10 करोड़ रु का दूध बेचा। लगातार दूसरे साल वे दूध बेचने के मामले में पहले नंबर पर रहीं।
लिया तकनीक का सहारा
इस समय नवलबेन की डेयरी में बढ़िया और आधुनिक सिस्टम के साथ व्यापार हो रहा है। पिछले 2 सालों में नवलबेन 2 लक्ष्मी अवॉर्ड और 3 बेस्ट पशुपालक अवॉर्ड हासिल कर चुकी हैं। लोग किसी की कामयाबी देख कर उसकी कॉपी करने की कोशिश जरूर ही करते हैं। कुछ ऐसा ही नवलबेन के साथ भी हुआ। उनकी कामयाबी को देखते हुए ही इलाके के कई लोगों ने इसी तरह कारोबार करना शुरू कर दिया।
सालाना कितना दूध बिकता है
नवलबेन अपनी डेयरी गुजरात को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (जीसीएमएमएफ) के अंडर चलाती हैं। औसतन नवलबेन रोज 750 लीटर दूध की बिक्री करती हैं। उनकी कमाई कंपनियों के आला अफसरों से भी अधिक है। लोकल न्यूज पोर्टल के अनुसार उनकी डेयरी में हर साल 2.21 लाख किलो दूध का उत्पादन होता है। ये एक बहुत बड़ी मात्रा है।
आत्मनिर्भर भारत
नवलबेन बनासकांठा जिले में दूध की कमाई के मामले में पहला स्थान हासिल कर चुकी हैं। पशुपालन और दूध बेचने से उनकी एक दिन की कमाई ही करीब 30 हजार रु है, जो साल में 1.10 करोड़ रु तक पहुंच जाती है। नवलबेन 'आत्मनिर्भर भारत' अभियान को आगे बढ़ा रही हैं।
कैसे बढ़ाया बिजनेस
नवलबेन की शादी के समय उनके ससुराल में केवल 15-20 पशु थे। उनके परिवार का कारोबार इतना अधिक बढ़ने की पीछे नवलबेन की मेहनत और सूझ-बूझ ही है। इस समय पशुपालन का बिजनेस ही उनके परिवार की कमाई का जरिया बन गया। बता दें कि जिले में पांच सालों के दौरान 1 लाख से ज्यादा महिलाएं पशुपालन और दूध के कारोबार में शामिल हुई हैं। ये एक चैन की तरह है, जिसमें कई महिलाओं ने दूसरी 5-10 महिलाओं को शामिल किया है।
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