Reliance Industries Loan News: देश के सबसे अमीर बिजनेसमैन मुकेश अंबानी की कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज को एक बड़ा लोन मिला है। कंपनी ने 2.9 बिलियन डॉलर (लगभग ₹24,000 करोड़) का विदेशी लोन (ऑफशोर लोन) हासिल है। यह डील 9 मई 2025 को फाइनल हुई थी और इसे पिछले एक साल में किसी भी भारतीय कंपनी द्वारा लिया गया सबसे बड़ा विदेशी लोन माना जा रहा है। यह कर्ज रिलायंस ने दो अलग-अलग करेंसी अमेरिकी डॉलर और जापानी येन में लिया है।

अलग-अलग करेंसी में मिला लोन
इस कर्ज को दो हिस्सों में बांटा गया है। पहला हिस्सा है $2.4 अरब अमेरिकी डॉलर, जबकि दूसरा हिस्सा है 67.7 अरब जापानी येन, जो लगभग $462 मिलियन अमेरिकी डॉलर के बराबर है। इस फाइनेंशियल डील में 55 इंटरनेशनल बैंकों ने हिस्सा लिया। यह डील इस साल एशिया की सबसे बड़ी सिंडिकेटेड लोन डील बन गई है। रिलायंस इंडस्ट्रीज पर ग्लोबल इनवेस्टर्स का भरोसा मजबूत रहा है और कंपनी की फंड जुटाने की क्षमता बेहद प्रभावशाली है।
रिलायंस को ये लोन उसकी मजबूती क्रेडिट रेटिंग की वजह से मिला है। कंपनी को मूडीज ने Baa2 और Fitch ने BBB की रेटिंग दी है। इसका मतलब है कि इंटरनेशनल इन्वेस्टर्स को रिलायंस में अधिक भरोसा है और इसमें निवेश करने को सुरक्षित मानते हैं।
फॉरेन करेंसी में लोन बढ़ा
साल 2023 में भी कंपनी ने $8 अरब डॉलर का लोन जुटाया था, जिसमें रिलायंस इंडस्ट्रीज और उसकी सब्सिडियरी जियो दोनों शामिल थीं। उस समय भी करीब 55 बैंकों ने हिस्सा लिया था। ब्लूमबर्ग डेटा के अनुसार, इस डील के बाद भारतीय कंपनियों द्वारा 2025 में अब तक जुटाई गई विदेशी करेंसी में लोन (Foreign Currency Loan) की कुल राशि $10.4 बिलियन तक पहुंच गई है।
यह डेटा इस बात की तरफ भी इशारा कर रहा है कि भारत में विदेशी लोन जुटाने की रफ्तार कम से कम एक दशक में सबसे तेज है। इसके अलावा पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र (जापान को छोड़कर) में सिंडिकेटेड लोन कुछ करेंसी (यानी अमेरिकी डॉलर, यूरो और येन) में गिरकर सिर्फ $29 बिलियन रह गई है, जो कि पिछले 20 सालों का सबसे निचला स्तर है। इससे साफ है कि जहां बाकी एशियाई देश विदेशी कर्ज जुटाने में धीमे पड़ गए हैं, वहीं भारतीय कंपनियों की विश्वसनीयता और मांग लगातार बढ़ रही है।
इस वजह से कंपनी ने लिया लोन
यह लोन की खबर ऐसे समय में आई है जब रिलायंस अपने अलग-अलग बिजनेस जैसे कि एनर्जी, रिटेल, टेलीकॉम और डिजिटल-में निवेश बढ़ा रही है।
अगस्त 2024 में हुई कंपनी की AGM(एनुअल जनरल मीटिंग) बैठक में, चेयरमैन मुकेश अंबानी ने एक रोडमैप भी पेश किया था। उन्होंने कहा था कि रिलायंस ग्रुप का लक्ष्य है कि वह दुनिया की 30 सबसे मूल्यवान कंपनियों में शामिल हो जाए। वर्तमान में यह समूह शीर्ष 50 कंपनियों में शुमार है। यह लोन उसी लक्ष्य की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है।
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