नई दिल्ली, अक्टूबर 6। लार्ज कैप फंड की तुलना में मिड और स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड को ज्यादा जोखिम भरा माना जाता है। मगर ये भी माना जाता है कि मिड और स्मॉल कैप स्कीमें ही उच्च रिटर्न देने की क्षमता रखती हैं। मिड कैप म्यूचुअल फंड मिड-कैप कैटेगरी के शेयरों में निवेश करते हैं, जो मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से 100-250 के बीच की रैंक में आते हैं। स्मॉल-कैप म्यूचुअल फंड स्मॉल-कैप शेयरों में निवेश करते हैं, जो मार्केट कैपिटलाइजेशन के हिसाब से टॉप 250 शेयरों के नीचे होते हैं। यहां हम जानेंगे कि इन फंड्स ने बीते कुछ सालों में कितना मुनाफा कराया है और आगे इनमें कितना रिटर्न देने की क्षमता है।
इंडेक्स ने छुआ सबसे ऊंच स्तर
निफ्टी स्मॉलकैप और मिडकैप इंडेक्स 2 और 3 अगस्त 2021 को 10,617 और 28,266 के सर्वकालिक उच्च स्तर पर पहुंच गए। यह तेजी 2018 और 2019 के बीच एक शार्प अंडरपरफॉर्मेंस (खराब प्रदर्शन) के बाद आई। उस अवधि के दौरान स्मॉल और मिड-कैप सेगमेंट को एनबीएफसी संकट, धीमी वृद्धि, स्मॉल और मिड-कैप के लिए सेबी का पुनर्वर्गीकरण आदि जैसी कई दिक्कतों का सामना करना पड़ा।
आगे कराएंगे मुनाफा
जानकार कहते हैं कि आगे मिड और स्मॉल-कैप दोनों फंड्स में ग्रोथ की मजबूत संभावनाएं हैं और लार्ज-कैप या फ्लेक्सी-कैप फंड्स की तुलना में लंबे समय में इनका प्रदर्शन अच्छा भी रहा है। ऐतिहासिक रूप से इन फंड्स ने लार्ज-कैप फंड या फ्लेक्सी-कैप फंड की तुलना में लंबी अवधि में अच्छा प्रदर्शन किया है। 10 साल की समय अवधि को देखें तो मिड कैप फंड और स्मॉल कैप फंड ने 5-6% अधिक रिटर्न दिया है।
कितना कराया है मुनाफा
भले ही 2018-19 मिड-कैप फंड और स्मॉल-कैप फंडों के लिए अंडरपरफॉर्मेंस वाले रहे, लेकिन इन फंड्स ने लंबी अवधि में अपने औसत रिटर्न से बेहतर प्रदर्शन किया है। मिड-कैप फंडों का 5 साल का सीएजीआर 15.5 फीसदी है और स्मॉल-कैप फंडों का 16.9% रहा है। जबकि इन फंड्स का पिछले 1 साल का सीएजीआर क्रमशः 62.8% और 76% रहा है। इससे यह भी साबित होता है कि लंबे समय में प्रदर्शन औसत हो जाता है।
मिड और स्मॉल कैप फंड को सबसे अधिक लाभ
जानकारों के अनुसार इमर्जिंग अर्थव्यवस्थाओं के ऐतिहासिक रुझान को देखा जाए तो आर्थिक विकास से सबसे ज्यादा फायदा स्मॉल और मिड कैप को होता है। वे चीन, ताइवान और फिलीपींस को इसका उदाहरण मानते हैं। अभी भारत की प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर है। ऐतिहासिक रूप से किसी भी देश में सबसे अधिक वृद्धि तब हुई है जब उनकी प्रति व्यक्ति आय 2,000 डॉलर से बढ़कर 10,000 डॉलर हो गई, क्योंकि इससे लोगों को डिस्क्रेश्नरी एक्सपेंडीचर खर्च में तेजी से वृद्धि करने में मदद मिलती है।
निवेशकों को बेहतर रिटर्न
माना जाता है कि खपत में इस तरह की वृद्धि से मिड-कैप और स्मॉल-कैप कंपनियां लाभान्वित होती हैं। जैसे-जैसे भारतीय अर्थव्यवस्था अगले 5-10 वर्षों की अवधि में ग्रोथ हासिल करती है, स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों के निवेशकों को बेहतर रिटर्न मिलता रहेगा। एक्सपर्ट उदाहरण देते हैं कि कई कंपनियां जो 12 साल पहले स्मॉल-कैप थीं, अब लार्ज-कैप हैं। उदाहरण के लिए बजाज फाइनेंस की 2007 में मार्केट कैप 1,859 करोड़ रुपये था। अब इसकी वैल्यू 4 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। टाइटन के मामले में भी ऐसा ही है। इसकी वैल्यू 2007 में 7,398 करोड़ और अब इसकी वैल्यू 1.84 लाख करोड़ रु है। अन्य उदाहरणों में एचसीएल, एशियन पेंट्स, हीरो मोटो कॉर्प्स शामिल हैं।
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