नयी दिल्ली। नया वेतन कोड लागू होने के बाद कुछ कर्मचारियों की सैलेरी में बदलाव हो सकता है। नये नियमों के तहत कंपनियों को कुल वेतन का कम से कम 50 फीसदी पैसा बेसिक सैलेरी के रूप में देना होगा। ऐसे मामलों में जहां बेसिक सैलेरी 50 फीसदी से कम है तो कंपनी (एम्प्लॉयर) को चार नये लेबर कोड के तहत नए नियमों का पालन करने के लिए सैलेरी में बदलाव करना पड़ सकता है। इनमें इंडस्ट्रिलयल रिलेशंस कोड, कोड ऑन ऑक्युपेश्नल सेफ्टी, हेल्थ एंड वर्किंग कंडीशंस कोड, सोशल सिक्योरिटी कोड और कोड ऑन वेजेस शामिल हैं।
बढ़ेगी आपकी ग्रेच्युटी
बेसिक सैलेरी में वृद्धि से कर्मचारियों की ग्रेच्युटी भी बढ़ेगी क्योंकि ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन बेसिक सैलेरी पर आधारित होती है। सैलेरी में बदलाव के नतीजे में सैलेरी में वृद्धि से कर्मचारियों के ग्रेच्युटी भुगतान में भी वृद्धि होगी। हालाँकि ग्रेच्युटी की कैलकुलेशन करने का फॉर्मूला सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020 (सोशल सिक्योरिटी कोड) के तहत समान है।
जानिए कैसे करें कैलकुलेशन
मौजूदा समय में यदि आप किसी कंपनी में 5 साल लगातार काम करते हैं तो ग्रेच्युटी दी जाती है। लेकिन नए नियम के तहत आपको केवल 1 साल काम करने पर भी ग्रेच्युटी का भुगतान किया जाएगा। एक साल में ग्रेच्युटी के 15 दिन के हिसाब से गणना की जाती है। यदि आपने एक कंपनी में 20 साल तक जॉब की और आपकी आखिरी कुल सैलेरी 75000 रु हो तो आपकी ग्रेच्युटी होगी 8.65 लाख रु।
15 दिन की सैलेरी
ग्रेच्युटी का मतलब है 15 दिन की सैलेरी। इसे मासिक सैलेरी की गुणा 15 से करके 26 (महीने में 4 छुट्टी मान कर कुल कार्य दिवस 26 माने जाते हैं) से भाग किया जाता है। और फिर जितने साल सर्विस की उससे गुणा की जाती है। ऊपर बताए गए उदाहरण में 20 से गुणा की गयी। सामाजिक सुरक्षा कोड में प्रस्तावित एक और बदलाव है, जिससे फिक्स्ड कर्मचारियों को भी ग्रेच्युटी लाभ मिलेगा।
नयी परिभाषा होगी लागू
वेज (मजदूरी) की नयी परिभाषा भी लागू होने जा रही है। इसके तहत मिलने वाले भत्ते कुल सैलेरी के अधिकतम 50 फीसदी हो सकते हैं। यानी 1 अप्रैल से मूल वेतन (सरकारी नौकरियों में मूल वेतन और महंगाई भत्ता) कुल वेतन का 50 फीसदी या इससे अधिक होना जरूरी हो जाएगी। स्वतंत्र भारत में पहली बार श्रम कानूनों में ये बदलाव होने जा रहे हैं। सरकार के अनुसार इससे कंपनियों और कर्मचारियों को फायदा होगा।
पीएफ पर पड़ेगा असर
नए नियमों के अनुसार मूल वेतन कुल वेतन का 50% या अधिक होना चाहिए। इससे ज्यादातर कर्मचारियों का सैलेरी स्ट्रक्चर बदलेगा, क्योंकि सैलेरी का गैर-भत्ते वाला हिस्सा आमतौर पर कुल सैलेरी के 50 फीसदी से कम होता है। वहीं कुल सैलेरी में भत्तों का हिस्सा और भी अधिक हो जाता है। बता दें कि बेसिक सैलेरी बढ़ने से आपका पीएफ भी बढ़ेगा। पीएफ बेसिक सैलरी पर आधारित होता है। बेसिक सैलेरी बढ़ेगी तो पीएफ बढ़ेगा, जिसका मतलब है कि टेक-होम या इन-हैंड सैलेरी में कटौती होगी।
More From GoodReturns

Gold Rate Today: 30 मार्च को सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट

एमपी-यूपी सहयोग सम्मेलन: साझा विरासत के साथ आगे बढ़ रहे मध्यप्रदेश-उत्तर प्रदेश, निवेश और विकास पर बनी सहमति

LPG Cylinder Price Hike: युद्ध के बीच बड़ा झटका! आज से एलपीजी सिलेंडर के दाम ₹218 तक बढ़े

Bank holiday Today: महावीर जयंती पर आज बैंक खुला रहेगा या बंद? जाने से पहले चेक करें RBI हॉलिडे लिस्ट



Click it and Unblock the Notifications