नई दिल्ली, जून 22। 1 जुलाई से टैक्स डिडक्शन एट सॉर्स (टीडीएस) के नियमों में बदलाव होने जा रहा है। 1 जुलाई से सेल्स प्रमोशन के लिए बिजनेस से प्राप्त बेनेफिट पर टीडीएस लगेगा। ये सोशल मीडिया इंफ्लुएंर्स और डॉक्टरों पर लागू होगा। केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) ने नए प्रावधान को लागू करने से संबंधित दिशानिर्देश जारी किए हैं। केंद्रीय बजट में आयकर अधिनियम, 1961 में एक नई धारा, 194 आर, सम्मिलित करके कर टैक्स रेवेन्यू लीकेज को रोकने के लिए ऐसी आय पर टीडीएस का प्रावधान लाया गया है।
कितना लगेगा टीडीएस
किसी व्यक्ति को एक वर्ष में 20,000 रु से अधिक का लाभ प्रदान करने वाले किसी भी व्यक्ति को 10 प्रतिशत की दर से टीडीएस देना होगा। वित्त मंत्रालय में संयुक्त सचिव कमलेश सी वार्ष्णेय ने उन बेनेफिट्स के बारे में बताया था, जिन पर टीडीएस लगेगा। उन्होंने कहा था कि डॉक्टरों को मिलने वाली मुफ्त दवा के सैम्पल, विदेशी फ्लाइट टिकट या बिजनेस के दौरान इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) के मुफ्त टिकट आदि।
कब करना होगा इनका खुलासा
वार्ष्णेय ने इस बात पर जोर दिया कि आयकर रिटर्न दाखिल करते समय इनका खुलासा किया जाना होगा। उनके अनुसार इन वस्तुओं की बिक्री नहीं होने के आधार पर इसे टाला नहीं जाना चाहिए। धारा 194 आर छूट या रिबेट के अलावा उन इंसेंटिव पर भी लागू होगा, जो विक्रेता देते हैं। इनमें कार, टीवी, कंप्यूटर, सोने के सिक्के और मोबाइल फोन जैसे नकद या वस्तु शामिल हैं।
अस्पताल में काम करने वाले डॉक्टर
सीबीडीटी ने स्पष्ट किया है कि अस्पताल में काम करने डॉक्टरों को दवाओं के नि:शुल्क सैम्पल मिलने की स्थिति में अस्पताल पर नि:शुल्क सैम्पल के लिए धारा 194आर लागू होगी। एक एम्प्लोयर के रूप में अस्पताल ऐसे नमूनों को कर्मचारियों के लिए टैक्सेबल अनुलाभ के रूप में मान सकता है और धारा 192 के तहत टैक्स काट सकता है। ऐसे मामलों में, अस्पताल के संबंध में 20,000 रु की सीमा देखी जानी चाहिए।
क्या मिलेगी छूट
एक अस्पताल में कंसल्टेंट के रूप में काम करने वाले और मुफ्त सैम्पल प्राप्त करने वाले डॉक्टरों के लिए, टीडीएस आदर्श रूप से पहले अस्पताल पर लागू होगा, जिसके लिए कंसल्टेंट डॉक्टरों के संबंध में धारा 194 आर के तहत टैक्स कटौती करनी होगी। सीबीडीटी ने कहा है कि धारा 194आर तब लागू नहीं होगी यदि लाभ या अनुलाभ सरकारी संस्था, जैसे सरकारी अस्पताल, को प्रदान किया जाता है, जो बिजनेस नहीं करते हैं।
ये भी मिलेगी राहत
सीबीडीटी ने ग्राहक को धारा 194 आर के दायरे से बाहर करके बिक्री छूट, नकद छूट और रिबेट पर एक राहत की घोषणा की है, यह कहते हुए कि इन्हें टीडीएस के दायरे में लाने से विक्रेता को कई तरह की कठिनाइयां होंगी। इसके अलावा, यदि सेवा प्रदान करने के उद्देश्य से (सोशल मीडिया इंफ्लुएंसर्स के मामले में) मोबाइल फोन जैसे लाभ निर्माण कंपनी को वापस कर दिए जाते हैं, तो यह नए प्रावधान के दायरे में नहीं आएगा।
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