नयी दिल्ली। प्याज आपको एक बार फिर से रुलाने की तैयारी में है। प्याज का थोक भाव करीब दोगुना हो गया है। प्याज को लेकर लगभग हर साल देश में हाहाकार मचता है। साल के आखिरी महीनों में प्याज के दाम चढ़ने लगते हैं। इसकी वजह होती है प्याज की कम सप्लाई। असल में देखा गया है कि जुलाई-सितंबर के समय देश के अलग-अलग हिस्सों में कहीं जरूरत से ज्यादा बारिश के कारण बाढ़ तो कहीं कम बारिश की वजह से प्याज की फसल प्रभावित होती है, जिससे सप्लाई कम हो जाती है। नतीजे में प्याज के दाम बढ़ने लगते हैं। इस स्थिति में सरकार को मजबूरन विदेशों से प्याज का आयात करना पड़ता है। मगर सरकार इसके लिए एक दूसरा रास्ता अपनाती है। जरूरत के समय प्याज की आपूर्ति बढ़ाई जा सके इसके लिए सरकार बफर स्टॉक बनाती है। इस साल भी एक बड़ा बफर स्टॉक बनाया गया है। मगर सरकारी तैयारी का फिलहाल असर नहीं हो रहा है।
सप्लाई कम होने से बढ़े दाम
प्याज की थोक कीमतें पिछले तीन महीनों में लगभग दोगुनी हो गई हैं क्योंकि दक्षिण भारत में अधिक वर्षा के कारण आपूर्ति कम हो गई है। इसके अलावा लॉकडाउन के कारण सप्लाई चेन में अड़चन, सड़ने के प्रतिशत में बढ़ोतरी आदि अन्य कारण हैं जिनसे प्याज की कीमतों में बढ़ोतरी हो रही है। सोमवार को लासलगांव थोक बाजार में प्याज की कीमतें 16 रु प्रति किलो पर पहुंच गईं। कुछ अन्य बाजारों में कीमतें और भी अधिक रहीं। अच्छी गुणवत्ता वाले प्याज की कीमत दक्षिण उबदिया में अधिक बारिश के कारण 20 प्रति किलोग्राम तक पहुंच गई है। दक्षिण उबदिया, खासकर कर्नाटक में, स्थानीय फसल को नुकसान पहुंचा है।
नाफेड ने की है खरीदारी
इस बीच हालात को स्थिर रखने के लिए नाफेड ने प्याज की भारी मात्रा में खरीदारी की है। राष्ट्रीय कृषि सहकारी विपणन संघ (नाफेड) ने मूल्य को स्थिर रखने के लिए 2020 में 100,000 टन प्याज की खरीद का लक्ष्य रखा था, जो लगभग पूरा हो चुका है। महाराष्ट्र में किसान उत्पादक कंपनियों के महासंघ के एमडी कहत हैं कि नाफेड की ओर से हमने 38,000 टन प्याज की खरीद की है। नेफेड ने सीधे नासिक जिले से 40,000 टन प्याज खरीदा है। असल में किसानों ने कोरोना संकट में प्याज बेच दिया, क्योंकि महामारी से होटल उद्योग की तरफ से होने वाली मांग खत्म हो गई। एक बात और इस साल अधिक नमी के कारण प्याज में सड़न का अनुपात सामान्य से अधिक है।
पिछले साल मचा था हाहाकार
पिछले साल भी सप्लाई के कारण प्याज की सप्लाई कम हो गई थी, जिससे प्याज का भाव आसमान छू गया था। पिछले साल प्याज की खुदरा कीमत 200 रु तक पहुंच गई थी। इसे काबू में करने के लिए सरकार को इजिप्ट, टर्की सहित कई अन्य देशों से प्याज मंगवाना पड़ा था। इस साल हालात पहले जैसे न हों इसके लिए सरकार ने बड़ा भंडार बनाने की तैयारी की थी।
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