नयी दिल्ली। म्यूचुअल फंड पर लिक्विडिटी के दबाव को कम करने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज म्यूचुअल फंड के लिए 50,000 करोड़ की विशेष लिक्विडिटी सुविधा का ऐलान किया है। आरबीआई की म्यूचुअल फंड को मदद की इस घोषणा से शेयर बाजार में भी फौरन तेजी देखने को मिली और सेंसेक्स 750 अंकों तक ऊपर चढ़ा। ये म्यूचुअल फंड निवेशकों के लिए भी काफी राहत की खबर है। दरअसल म्यूचुअल फंड निवेशकों को पिछले सप्ताह तब झटका लगा था जब कोरोनावायरस महामारी के बीच लिक्विडिटी की कमी का हवाला देते हुए फ्रैंकलिन टेम्पलटन फंड हाउस ने बड़े एक्सपोजर के साथ छह डेट म्यूचुअल फंड म्यूचुअल फंड में से पैसे निकालने पर रोक लगा दी थी। इसी समस्या को देखते हुए आरबीआई ने निवेशकों के हितों के मद्देनजर म्यूचुअल फंड्स की मदद करने का फैसला लिया है।
बैंकों के जरिए मिलेगा पैसा
म्यूचुअल फंड्स के लिए आरबीआई लिक्विडिटी फैसिलिटी 11 मई या 50000 करोड़ रुपये के आवंटन, जो भी पहले हो, तक रहेगी। आरबीआई ने यह भी आश्वासन दिया है कि बाजार की परिस्थितियों के आधार पर समय और राशि की समीक्षा की जाएगी। आरबीआई की तरफ से दी गई इस सुविधा के तहत ये कम दरों पर बैंकों को पैसा मुहैया कराएगा और बैंक विशेष रूप से म्यूचुअल फंडों की लिक्विडिटी (पैसों) आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए इस पैसे का लाभ उठा सकते हैं। यह लिक्विडिटी सुविधा पर्याप्त और ओपन-एंडेड है। बैंक सोमवार से शुक्रवार तक (छुट्टियों को छोड़कर) किसी भी दिन पूंजी प्राप्त करने के लिए आवेदन कर सकते हैं।
जरूरी कदम उठाने को तैयार आरबीआई
आरबीआई ने दोहराया कि यह सतर्क है और कोरोनावायरस के आर्थिक प्रभाव को कम करने और वित्तीय स्थिरता को बनाए रखने के लिए जो भी आवश्यक कदम होंगे, उठाएगा। जहां तक म्यूचुअल फंड्स के सामने आर्थिक समस्या का सवाल है तो आरबीआई ने कहा है कि अभी तनाव सिर्फ उच्च जोखिम वाले डेब्ट म्यूचुअल फंड सेगमेंट तक ही सीमित है। आरबीआई का कहना है कि म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के बड़े हिस्से में पैसों को लेकर दिक्कत नहीं है। आरबीआई के मुताबिक कोरोना के लेकर कैपिटल मार्केट में भारी अस्थिरता के रेस्पोंस से म्यूचुअल फंड पर लिक्विडिटी का दबाव बढ़ा है।
क्या है फ्रैंकलिन टेम्पलटन फंड संकट
पिछले हफ्ते, फ्रैंकलिन टेम्पलटन इंडिया ने एक बयान में कहा कि यह COVID-19 संकट से सामने आए लिक्विडिटी संकट के कारण अपने 6 फंड्स को बंद कर रहा है। इनमें फ्रैंकलिन इंडिया लो ड्यूरेशन फंड, अल्ट्रा शॉर्ट बॉन्ड फंड, शॉर्ट टर्म इनकम प्लान, क्रेडिट रिस्क फंड, डायनेमिक एक्यूरल फंड और इनकम अपॉर्चुनिटीज फंड शामिल हैं। फंड हाउस की इस घोषणा से ऐसी चिंता बनी थी कि निवेशक बाकी म्यूचुअल फंड कंपनियों की अन्य योजनाओं में से पैसे निकालने में हड़बड़ी करेंगे।
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