RBI New Rules: आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंको राहत देने के लिए और सिस्टम में कैश की कंडीशन में सुधार लाने के लिए एक्स्ट्रा रकम मुहैया कराने की बात कही है। गौरतलब है कि बैंक पहले भी कैश की कंडीशन को सुधारने के लिए ऐसे काम कर चुका है। पिछले साल भी मार्च के महीने में रिजर्व बैंक के द्वारा यह कदम उठाया गया था।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी को और भी ज्यादा बेहतर बनाने के लिए ये काम किया है। लिक्विड फैसेलिटी के अंतर्गत रिजर्व बैंक ने स्टैंडअलोन प्राइमरी डीलर्स के लिए 5000 करोड़ रुपए की एक्स्ट्रा रकम मुहैया कराने का फैसला कर लिया है।

गौरतलब है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के द्वारा यह भी बताया गया है कि इन सभी बैंक को यह रकम उनके मौजूदा रेपो रेट के अनुसार दी जाएगी। इन बैंक का जो रेपो रेट 31 जनवरी को होगा उसी के हिसाब से उन्हें कैश मुहैया कराया जाएगा।
रिजर्व बैंक के द्वारा एक प्रेस रिलीज में बताया गया है कि उसके द्वारा यह फैसला बैंको के पास मौजूज कैश की टाइट स्थिती का देखने के बाद रखा गया है। गौरतलब है कि पिछले कुछ समय से बैंकों में कैश की कमी की वजह से काफी दिक्कत देखने को मिल रही है। वैसे तो बैंक इस दिक्कत से निपटने की पूरी कोशिश कर रहे हैं, इसी सिलसिले में केंद्रीय बैंक ने इनकी मदद करने का फैसाला किया है। बैंक ने अपने प्रेस रिलीज में भी यह बात कही है।
अक्सर लोगों को ये समझने में दिक्कत हो जाती है कि बैंकिंग सिस्टम में लिक्विडिटी की स्थिती कैसे खराब होती है और डेफिसिट की पोजीशन कैसे आती है।
गौरतलब है कि अगर कोई बैंक लिक्विडिटी एडजस्टमेंट फैसिलिटी के तहत बैंकिंग सिस्टम रिजर्व बैंक का शुद्ध कर्जदार रहता है, तो इसका मतलब है कि फेलिसिटी के जरिए उठाया गया पैसा, फेसिलिटी में जमा किए गए पैसे से ज्यादा होता है, तो इसे डिफिसिट की स्थिती कहते हैं। गौरतलब है कि बैंको ये स्थिती लगातार कई दिनों से जारी है और यही कारण है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने एक्स्ट्रा कैश मुहैया कराने की बात कही है।
कैश एडजेस्टमेंट फैसिलिटी रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया की मॉनिटरी पॉलिसी का हिस्सा होती है। इसकी मदद से सिस्टम में लिक्विडीटी को मैनेज करने का काम किया जाता है। आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि इसके भी दो हिस्से होते हैं, इनमें रेपो रेट और रिवर्स रेट भी शामिल होते हैं।
अगर बात की जाए रेपो रेट की और रिवर्स रेट के इस्तेमाल की तो किसी भी बैंक को जो कैश मिलता है, उसे रेपो रेट को ध्यान में रखकर दिया जाता है। वहीं बैंक को रिवर्स रेपो रेट के आधार पर अपना एक्स्ट्रा अमाउंट जमा करना पड़ता है।
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि जब भी वित्त वर्ष खत्म होने वाला होता है, तो इस समय बैंक में कैश की उपलब्धता का दबाव बढ़ता है, यही कारण है कि रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने इन एनबीएफसी और बैंकों की सब्सीडयरी को एक्स्ट्रा कैश मुहैया कराने का फैसला किया है। पिछले साल भी रिजर्व बैंक ने इसी तरह की एक्स्ट्रा कैश डिमांड को पूरा करने के लिए 5000 करोड़ रुपए जारी किए थे।
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