Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की अगस्त बैठक पूरी हो चुकी है और इसके नतीजे सामने आ गए हैं। इस बार गवर्नर संजय मल्होत्रा ने साफ किया है कि रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया गया है। फिलहाल यह दर 5.50% पर बनी रहेगी। पिछले तीन बार लगातार रेपो रेट में कटौती की गई थी, लेकिन अब इसे स्थिर रखा गया है।

EMI रहेगी जस की तस
रेपो रेट में बदलाव ना होने का सीधा असर लोन लेने वालों पर पड़ता है। चूंकि इस बार कोई बदलाव नहीं हुआ है, इसलिए होम लोन, ऑटो लोन या पर्सनल लोन लेने वाले ग्राहकों की EMI में कोई बढ़ोतरी या कमी नहीं होगी। यानी आपकी जेब पर फिलहाल कोई अतिरिक्त बोझ नहीं बढ़ेगा।
क्यों नहीं बदला गया रेपो रेट?
RBI गवर्नर ने बताया कि मौजूदा समय में भारतीय अर्थव्यवस्था बेहतर स्थिति में है। महंगाई नियंत्रण में है और मानसून सामान्य से बेहतर रहा है। इन कारणों से आर्थिक गतिविधियां तेजी से बढ़ रही हैं।
हालांकि, अमेरिका और भारत के बीच चल रही टैरिफ (शुल्क) संबंधी अनिश्चितता अभी बनी हुई है। अमेरिका की तरफ से भारत पर नए टैरिफ लगाने की धमकी ने आरबीआई को सतर्क कर दिया है। इसी वजह से बैंक ने फिलहाल कोई जल्दबाजी में कदम नहीं उठाया।
क्या होता है रेपो रेट?
रेपो रेट वो दर होती है जिस पर RBI देश के अन्य बैंकों को कर्ज देता है। जब यह दर घटती है, तो बैंकों को सस्ते में लोन मिलता है और वे भी अपने ग्राहकों को सस्ती दरों पर लोन देने लगते हैं। इससे ग्राहकों की EMI कम हो जाती है।
वहीं, जब रेपो रेट बढ़ता है तो बैंक महंगे दर पर लोन देते हैं, जिससे EMI भी बढ़ती है। इस बार दर स्थिर होने से न तो ईएमआई बढ़ेगी और न घटेगी।
आगे क्या हो सकता है?
फिलहाल रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन आने वाले महीनों में हालात के हिसाब से फैसले लिए जा सकते हैं। अगर अमेरिका-भारत के बीच टैरिफ से जुड़ी स्थिति साफ होती है और घरेलू महंगाई नियंत्रण में रहती है, तो RBI अगली बैठक में दरों में बदलाव पर विचार कर सकता है।
इस बार RBI ने फूंक-फूंक कर कदम रखा है। रेपो रेट को स्थिर रखकर उसने संकेत दिया है कि फिलहाल आर्थिक स्थिति अच्छी है, लेकिन ग्लोबल रिस्क को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। आम लोगों के लिए राहत की बात यह है कि उनकी EMI में कोई बदलाव नहीं होगा और बाजार में स्थिरता बनी रहेगी।
होम लोन और कार लोन पर एक्सपर्ट्स ने दी ये राय
एक्सपर्ट्स सिद्धार्थ मौर्य की रिपोर्ट के अनुसार, रेपो रेट में स्थिरता लोगों को एक तरह से राहत भी देती है और सतर्क भी बनाती है। होम और ऑटो लोन की EMI पहले जैसी ही बनी रहती है, जिससे बजट बनाना आसान हो जाता है। लेकिन जो लोग अपनी जमा पूंजी पर ज्यादा ब्याज की उम्मीद करते हैं, उन्हें एफडी जैसे पारंपरिक विकल्पों से हटकर बॉन्ड्स या म्यूचुअल फंड जैसी जगहों पर निवेश के बारे में सोचना होगा।
यह समय जोखिम लेने से ज्यादा अपनी वित्तीय स्थिति को दोबारा सही करने का है। यानी कर्ज कम करना, इमरजेंसी के लिए कुछ पैसे जमा करना और अपने निवेश को अलग-अलग जगहों पर लगाना जरूरी है। हो सकता है इस समय बहुत ज्यादा मुनाफा न मिले, लेकिन यह स्थिरता आपको एक मजबूत आर्थिक आधार तैयार करने का मौका देती है, जिसमें आप जरूरत से ज्यादा खर्च किए बिना और थोड़ा-थोड़ा बचाकर भविष्य को सुरक्षित बना सकते हैं।
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