नयी दिल्ली। देश की प्रमुख कंपनी रिलायंस इंडस्ट्रीज, जिसके चेयरमैन एशिया के सबसे अमीर व्यक्ति मुकेश अंबानी हैं, डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म पेटीएम और स्टॉक एक्सचेंज बीएसई तथा एनएसई में होड़ मच गई है। इसकी वजह आरबीआई की वो कोशिश है जिसके तहत देश की प्रमुख प्राइवेट कंपनियों को तेजी से बढ़ते रिटेल भुगतान सिस्टम को चलाने और संभालने में भाग लेने की पेशकश की गई है। आरबीआई की इस पेशकश पर प्रमुख कंपनियों ने काफी रुचि दिखाई है और यही इनके बीच मची हौड़ की वजह है। रिलायंस, पेटीएम, बीएसई और एनएसई उन फर्म्स में शामिल हैं जो नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (एनपीसीआई) के बराबर शक्तियों वाली कंपनी को चलाने और संभालने के लिए लाइसेंस हासिल करना चाहती हैं।
शुरू कर दी है तैयारी
इन कंपनियों ने प्रोजेक्ट को चलाने और आरबीआई के साथ शुरुआती बातचीत शुरू करने के लिए सलाहकार भी नियुक्त कर दिए हैं ताकि रेगुलेटर के ड्राफ्ट न्यू अम्ब्रेला एंटिटी (एनयूई) के तहत लाइसेंस के लिए आवेदन करने की संभावना का पता लगाया जा सके। दरअसल इन कंपनियों को लगता है कि इनके पास बड़े पैमाने पर भुगतान निपटान को संभालने के लिए विशेषज्ञता और इन्फ्रास्ट्रक्चर है। यही वजह है कि इन कंपनियों के बीच इस प्रोजेक्ट को लेकर दिलचस्पी बढ़ रही है। एनयूई के लिए लाइसेंस से उन्हें अधिक स्वायत्तता और लचीलेपन में मदद मिल सकती है। इससे देश के पेमेंट इकोसिस्टम के लिए संभावनाएं बढ़ेंगी।
और भी कंपनियां लगी हैं लाइन में
इकोनॉमिक टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार कई अन्य हाई-प्रोफाइल कंपनियां जैसे कि तकनीकी दिग्गज, वैश्विक फाइनेंशियल टेक्नोलॉजी कंपनियां और भारतीय फिनटेक के एक समूह ने भी लाइसेंस के लिए आवेदन करने की संभावनाओं के लिए कदम आगे बढ़ा दिए हैं। आरबीआई से लाइसेंस मिलने पर ये कंपनियां पैन-इंडिया भुगतान नेटवर्क स्थापित कर सकती हैं, जिसे आरबीआई की तरफ से योग्यता और ऐपलिकेशन पर गाइडलाइन जारी करने पर बिलकुल एनपीसीआई यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (यूपीआई) या नेशनल ऑटोमेटेड क्लियरिंग हाउस (एनएएसी) की ही तरह चलाया जाएगा।
जल्दी ही आ सकती है फाइनल गाइडलाइन
इस मामले में आरबीआई जल्द ही अंतिम दिशानिर्देश जारी कर सकता है, जिसमें योग्यता और गवर्नेंस स्ट्रक्चर जैसी चीजें शामिल होंगे। जानकारी के लिए बता दे कि आरबीआई ने कई मौकों पर एनपीसीआई के लिए कॉम्पिटीशन शुरू करने की बात कही है ताकि इकोसिस्टम के लिए जोखिम कम किया जा सके। एक दशक से भी ज्यादा समय से नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया ने भारत में रिटेल भुगतान सिस्टम के लिए अकेली अम्ब्रेला फर्म रही है। जहां तक आरबीआई के पास नई फर्म के लिए लाइसेंस हासिल करने के लिए आवेदन करने का सवाल है तो कंपनी की पैड-अप कैपिटल 500 करोड़ रु होनी जरूरी होगी।
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