
Sahara India Refund : सहारा इंडिया की कई ग्रुप कंपनियों में बहुत सारे निवेशकों का ढेर सारा पैसा फंसा है। पर इस मामले में सरकार एक दम बेखबर है। इस बात की जानकारी खुद केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने दी है। उन्होंने कहा है कि सहारा की विभिन्न इकाइयों द्वारा भुगतान न करने के कारण व्यक्तिगत निवेशकों पर प्रभाव से संबंधित कोई भी डेटा उपलब्ध नहीं है। वित्त मंत्री ने 12 दिसंबर, 2022 को लोकसभा में एक प्रश्न के लिखित उत्तर में कहा कि इस मामले में सहारा इकाइयों की तरफ से भुगतान न करने के कारण व्यक्तिगत निवेशकों पर प्रभाव से संबंधित कोई डेटा उपलब्ध नहीं है।
क्या था सवाल
वित्त मंत्री इस सवाल का जवाब दे रही थीं कि क्या सहारा इंडिया समूह अपने करोड़ों निवेशकों को पैसे के भुगतान में देरी कर रहा है, जिसमें देश के कई गरीब किसान और मजदूर शामिल हैं। उनसे यह भी पूछा गया कि क्या सरकार इस संबंध में कोई योजना बना रही है ताकि गरीब किसानों और मजदूरों को उनका पैसा वापस मिल सके।
करोड़ों लोगों के पैसे फंसे
वित्त मंत्री द्वारा साझा की गई जानकारी के मुताबिक, सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसआईआरईसीएल) में 2.33 करोड़ निवेशकों का 19,400.87 करोड़ रुपये जमा हैं। साथ ही सहारा हाउसिंग इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड (एसएचआईसीएल) में 75 लाख निवेशकों का 6380.50 करोड़ रुपये जमा हैं। सहारा इंडिया के निवेशकों के पैसे का रिफंड कई सालों से अटका हुआ है।
और क्या कहा वित्त मंत्री ने
सीतारमण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के 31 अगस्त 2012 के आदेश के अनुसार, एसआईआरईसीएल, एसएचआईसीएल के प्रमोटरों और निदेशकों को आदेश की तारीख के तीन महीने के भीतर सेबी के पास 25,781.37 करोड़ रुपये की कुल राशि जमा करने के लिए कहा गया था। सुप्रीम कोर्ट के निर्देशों के बाद सहारा समूह ने सेबी के पास 15,552.59 करोड़ रुपये जमा किए।
कितना पैसा हुआ है रिफंड
बाद में सुप्रीम कोर्ट ने सेबी को एसआईआरईसीएल और एसएचआईसीएल के बॉन्डधारकों को ब्याज सहित राशि वापस करने का निर्देश दिया। सेबी ने 17,526 पात्र बांडधारकों को 138.07 करोड़ रुपये लौटाए हैं। वित्त मंत्री के अनुसार रेगुलेटर ने 21 दिसंबर 2021 को सुप्रीम कोर्ट के सामने एक नया आवेदन पेश किया, जिसमें मामले में आगे की दिशा की मांग की गई।
ये है बाकी जरूरी डिटेल
इस बीच, अगस्त 2022 में, सरकार ने संसद को जानकारी दी थी कि सहारा समूह की विभिन्न कंपनियों में 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेशकों की जमा राशि फंसी हुई है, जिसमें से 47,245 करोड़ रुपये सहारा क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड में और 19,400.87 करोड़ रुपये एसआईआरईसीएल में फंसे हुए थे। इस महीने की शुरुआत में, सेबी ने सहारा समूह की फर्म, उसके प्रमुख सुब्रत रॉय और अन्य को एक नोटिस जारी कर नियामक मानदंडों के उल्लंघन से संबंधित एक मामले में 15 दिनों के भीतर 6.42 करोड़ रुपये का भुगतान करने के लिए कहा था। जानकारी के लिए बता दें कि सेबी-सहारा मामला अभी भी लंबित है और इसके समाधान की कोई स्पष्ट तिथि सामने नहीं है। मामला पूरी तरह से सुलझने के बाद ही निवेशकों को उनका रिफंड मिल सकता है।
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