नई दिल्ली, जुलाई 19। जिन लोगों का पैसा सहारा इंडिया में फंसा हुआ है उनके लिए एक बुरी खबर है। जो लोग सहारा से अपना वसूलने के लिए लगातार कोशिश कर रहे हैं उन्हें इस खबर से झटका लग सकता है। हालांकि यह बुरी सभी सहारा निवेशकों के लिए नहीं है। बता दें कि सहारा ने 10 करोड़ रुपये का एक चेक जारी किया था। ये चेक छत्तीसगढ़ के राजनांदगांव में बाउंस हो गया है। इससे निवेशकों की मुसीबत बढ़ना तय है। अभी तक सहारा में निवेश करने वाले अधिकतर लोगों का उनका पैसा नहीं दिया गया है। अब छत्तीसगढ़ में सहारा और इसके निवेशकों से जुड़ी एक और नकारात्मक खबर सामने आई है।
की जाएगी कार्रवाई
एक मीडिया रिपोर्ट के अनुसार इस मामले से संबंधित अधिकारियों के मुताबिक सहारा के चेक बाउंस के मामले में नियमों के मुताबिक कार्रवाई की जाएगी। बता दें कि इससे पहले कोतवाली 31 मई को सहारा के चार डायरेक्टर्स को न्यायालय अदालत में पेश किया गया था। इन डायरेक्टर्स ने प्रशासन के खाते में 15 करोड़ रुपये ट्रांसफर करने की बात कही थी। पर 5 करोड़ ही खाते में आए।
कहां अटका पेंच
कुछ रिपोर्ट्स में कहा गया है कि सहारा का दावा है कि इसने निवेशकों का पैसा सेबी को दे दिया है। पर सेबी के मुताबिक 81.70 करोड़ रुपये के लिए 53,642 ओरिजिनल बॉन्ड सर्टिफिकेट / पासबुक से जुड़े 19,644 आवेदन इसे दिए गए हैं।
लाखों निवेशक परेशान
सहारा इंडिया रियल एस्टेट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 232.85 लाख निवेशकों से 19400 करोड़ रु और सहारा हाउसिंग इनवेस्टमेंट कॉरपोरेशन लिमिटेड ने 75 लाख निवेशकों से 6380 करोड़ रु जमा किए थे।
जानिए क्या है मामला
सहारा-सेबी मामला सहारा इंडिया परिवार की दो कंपनियों द्वारा जारी वैकल्पिक रूप से पूर्ण परिवर्तनीय डिबेंचर (ओएफसीडी) जारी करने का मामला है, जिस पर सेबी ने अपने अधिकार क्षेत्र का दावा किया था और इस पर आपत्ति जताई थी कि सहारा ने इसकी अनुमति क्यों नहीं ली। इस मामले में बड़ी संख्या में लोग शामिल हैं। जैसे कि तीन करोड़ व्यक्तियों से 24,000 करोड़ रुपये से अधिक का कलेक्शन किया गया है।
लंबे समय से चल रहा मामला
आपकी जानकारी के लिए बता दें कि अगस्त 2012 में सुप्रीम कोर्ट ने ऊपर जिन दो कंपनियों का जिक्र किया गया है उन दोनों कंपनियों को सेबी के साथ निवेशकों का पैसा तीन महीने के अंदर लौटाने का आदेश दिया था। ये पैसा 15 फीसदी ब्याज के साथ लौटाने को कहा गया था। इतना ही नहीं सेबी को सभी ओएफसीडी धारकों की डिटेल देने को कहा गया था। फिर सहारा ने 127 ट्रकों को सेबी के ऑफिस भेजा, जिनमें निवेशकों की जानकारी थी। पर ये निवेशकों की पूरी जानकारी नहीं थी। इसलिए मनी लॉन्ड्रिंग का संदेह रहा। सहारा ने सेबी को समय पर पैसा नहीं लौटाया। फिर सहारा इंडिया के बैंक अकाउंट और संपत्ति को फ्रीज करने का दौर शुरू हुआ। 26 जनवरी 2014 को सहारा ग्रुप के चेयरमैन को गिरफ्तार किया गया। नवंबर 2017 में ईडी ने सहारा ग्रुप पर मनी लॉन्ड्रिंग का मामला चलाना शुरू किया। फिर पूरा सहारा ग्रुप कानूनी शिकंजे में आ गया।
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