Saudi Aramco जो दुनिया की सबसे बड़ी तेल निर्यातक कंपनी है। ये कंपनी दक्षिण एशियाई देश में क्रूड ऑयल की डिमांड में तेजी के बीच भारत में इंवेस्टमेंट के अवसरों की तलाश कर रही है, यह बात सऊदी अरामको के अध्यक्ष और सीईओ अमीन नासिर की तरफ से कही गई हैं।
बुधवार को वियना में ओपेक अंतर्राष्ट्रीय सेमिनार के दौरान अमीन नासिर ने कहा कि क्रूड इम्पोर्ट के मामले में दो बड़े तेल उपभोक्ता देश भारत और चीन पूर्व महामारी के स्तर को पार कर गए हैं।

अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी ने अपनी अप्रैल महीने की ऑयल मार्केट रिपोर्ट में कहा कि चीन का क्रूड ऑयल का आयत मार्च में रोजाना रिकॉर्ड 16 मिलियन बैरल तक पहुंच गया। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, क्योंकि इस वर्ष की शुरुआत में कोरोना के प्रतिबंध के हटने के बाद इसकी अर्थव्यवस्था में सुधार हुआ है।
नासिर की तरफ से कहा गया है कि भारत और चीन से क्रूड ऑयल की बढ़ती मांग से नई ऑयल और गैस परियोजनाओं में कम निवेश के बीच तेल मार्केट में असंतुलन पैदा होगा।
नासिर ने कहा कि उनकी प्राथमिकता लोगों के लिए जीवन मानकों को ऊपर उठाना है और स्थिरता इसके बाद आती है। उन्होंने कहा कि अकेले एशिया में लगभग 150 मिलियन लोगों के पास बिजली नहीं है।
नासिर ने कहा कि जबकि अमेरिका में महंगाई कटौती अधिनियम और यूरोपीय संघ में इसी तरह की पहल जैसी नीतियां उन देशों में ऊर्जा परिवर्तन का समर्थन करेंगी, ऐसे में प्रोत्साहन विकासशील अर्थव्यवस्थाओं के लिए कार्य नहीं करेंगे।
उन्होंने कहा कि हमको नवीनीकरण सहित सभी संसाधनों की जरूरत है। परेशानी यह है कि हम सभी के लिए एक ही आकार की कोशिश कर रहे हैं।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, नासिर की तरफ से कहा गया है कि उन्होंने कहा कि ग्लोबल अथव्यवस्था जैसे जैसे ठीक होगी। जेट ईंधन की खपत बढ़ेगी, क्रूड ऑयल की मांग और बढ़ेगी।
मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, पिछले वर्ष ब्रिटेन को पछाड़कर भारत दुनिया की पांचवीं सबसे बड़ी अर्थव्यस्था बन गया, घरेलू उत्पादन बढ़ाने के साथ-साथ अपनी कच्चे तेल की आपूर्ति में विविधता लाने पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
पिछले फरवरी में यूक्रेन युद्ध की शुरुआत के बीच से देह ने रियायती रूसी तेल के इंपोर्ट में इजाफा किया है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत में रूसी तेल कार्गो पिछले वर्ष बढ़कर 44 मिलियन टन हो गया, जो एक वर्ष पहले 6.5 मिलियन टन था।


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