SCO Summit 2025; PM Modi Visit China : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (Prime Minister Narendra Modi) दो दिवसीय जापान यात्रा के बाद शंघाई सहयोग संगठन (Shanghai Cooperation Organisation) शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने शनिवार (30 अगस्त) को चीन पहुंचे। गलवान में दोनों देशों के बीच हुए सैन्य संघर्ष के बाद पीएम मोदी पहली बार यानी 7 साल बाद चीन पहुंचे हैं।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर 50 फीसदी टैरिफ लगाने समेत चीन, रूस समेत अन्य देशों पर अलग-अलग तरह के प्रतिबंध और टैरिफ लगाए जाने के बीच एससीओ समिट में पीएम मोदी चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और रूसी राष्ट्रपति पुतिन के साथ द्विपक्षीय वार्ता भी करेंगे। इस दौरान राष्ट्रपति पुतिन के दिसंबर में भारत यात्रा को लेकर भी चर्चा होगी।

ट्रम्प ने चीन पर 30% टैरिफ लगाया है। SCO Summit चीन के तियानजिन शहर में 31 अगस्त से 1 सितंबर 2025 के बीच होने वाली है। इसमें 20 से ज्यादा देशों के नेता शामिल होंगे। ट्रम्प की टैरिफ नीति के बीच एससीओ समिट में भारत, चीन और रूस के शीर्ष नेताओं की इस महामुलाकात पर अमेरिका समेत दुनिया के अन्य देशों की पैनी नज़र है।
ऐसे में यह समझना बहुत जरूरी हो जाता है कि यह संगठन यानी SCO क्यों इतनी अहम है? इसे समझने से पहले आइए जानते हैं कि आखिर शंघाई सहयोग संगठन (SCO) क्या है और वर्तमान हालात में भारत के लिए क्यों इसकी अहमियत इतनी खास है?
क्या है शंघाई सहयोग संगठन?(What Is Shanghai Cooperation Organisation)
शंघाई सहयोग संगठन (SCO) एक अंतर सरकारी संगठन (Intergovernmental Organisation) है। इसकी शुरुआत 1996 में चीन, रूस, कजाकिस्तान, ताजिकिस्तान और किर्गिस्तान के नेताओं द्वारा 'शंघाई फाइव' के रूप में हुई थी। हालांकि बाद में इस संगठन में छठे सदस्य के रूप में उजबेकिस्तान को जोड़ा गया और फिर 'शंघाई फाइव' का नाम बदकर शंघाई सहयोग संगठन कर दिया गया।
इस प्रकार से देखें तो शंघाई सहयोग संगठन की स्थापना 15 जून 2001 को हुई थी। इसके चार साल बाद जुलाई 2005 के अस्ताना शिखर सम्मेलन में भारत को पर्यवेक्षक का दर्जा दिया गया था।
2017 में भारत को बनाया गया बना SCO सदस्य?
भारत को 2017 में इस संगठन का सदस्य बनाया गया था। वर्तमान समय में SCO यानी शंघाई को-ऑपरेशन ऑर्गेनाइजेशन में 10 सदस्य देश हैं। इसके अलावा दो पर्यवेक्षक देश और 14 संवाद साझेदार देश हैं। भारत 2022-23 के दौरान इस संगठन के अध्यक्ष पद का कार्यभार संभाल चुका है।
कौन-कौन से देश हैं SCO के सदस्य?
वर्तमान में शंघाई शिखर संगठन के सदस्य देशों में रूस, चीन, भारत, कजाखस्तान, किर्गिस्तान, ताजिकिस्तान, उजबेकिस्तान, पाकिस्तान, ईरान और बेलारूस शामिल हैं।
एससीओ के दो पर्यवेक्षक अफगानिस्तान और मंगोलिया हैं, जबकि इसके 14 संवाद साझेदार देशों में तुर्की, कुवैत, अजरबैजान, आर्मेनिया, कंबोडिया और नेपाल शामिल हैं. श्रीलंका, सऊदी अरब, मिस्र, कतर, बहरीन, मालदीव, म्यांमार और संयुक्त अरब अमीरात का नाम शामिल है।
क्या है SCO का मुख्य उद्देश्य?
इस संगठन की स्थापना कई उद्देश्यों के लिए किया गया है। संगठन के तमाम उद्देश्यों में क्षेत्रीय सुरक्षा सुनिश्चित करना, सीमा मुद्दों को हल करना, आतंकवाद और धार्मिक अतिवाद का समाधान करना, क्षेत्रीय विकास को बढ़ावा देना आदि शामिल है।
SCO Summit 2025 भारत के लिए क्यों है खास?
वर्तमान हालात, पाकिस्तान समेत अन्य पड़ोसियों के साथ खराब संबंध और विकसित राष्ट्र की कल्पना के मद्देनज़र भारत के लिए यह संगठन भारत के लिए बहुत खास मायने रखता है। शंघाई सहयोग संगठन भारत को आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान को घेरने का मौका देता है जबकि रूस जैसे पारंपरिक साझेदार के साथ रिश्तों को मजबूत करने का एक अवसर मिलता है। इसके अलावा चीन के साथ रिश्तों को सुधारने के लिए मंच उपलब्ध कराता है। अमेरिका के साथ टैरिफ को लेकर खराब होते संबंध को लेकर शंघाई सहयोग संगठन भारत को एक रणनीतिक संतुलन बनाने का मौका देता है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित 20 देशों के प्रमुख SCO Summit में शामिल होंगे। उम्मीद है कि इस समिट में ट्रम्प टैरिफ के जवाब में कुछ फैसले लिए जा सकते हैं। चीन इस शिखर सम्मेलन के माध्यम से अपने दोस्तों के साथ अमेरिका को शक्ति प्रदर्शन दिखाने की कोशिश करेगा। SCO Summit के दौरान सदस्य देश एक संयुक्त घोषणा पत्र पर हस्ताक्षर कर सकते हैं और सदस्य देश एससीओ विकास रणनीति को मंजूरी दे सकते हैं।
PM Modi एससीओ शिखर सम्मेलन में कब-कब हुए शामिल?
भारत के आधिकारिक तौर पर 2017 में सदस्य बनने के बाद 2018 (चिंगदाओ) में हुए सम्मेल में पीएम मोदी शामिल हुए थे। इसके बाद 2019 (बिश्केक) में, 2020 (मास्को, वर्चुअल प्रारूप) के ज़रिए और 2021 (दुशांबे, वर्चुअल प्रारूप) के ज़रिए, 2022 (ताशकंद) में, और 2023 (नई दिल्ली, वर्चुअल प्रारूप) में पीएम मोदी समिट में शामिल हुए थे। 2024 में अस्ताना में हुए समिट में विदेश मंत्री एस जयशंकर ने प्रधानमंत्री का प्रतिनिधित्व किया था।
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