भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने इक्विटी डेरिवेटिव्स बाजार में ट्रांसपेरेंसी बढ़ाने और जोखिम को कम करने के लिए कई नए कदम उठाए हैं। इन नियमों का उद्देश्य बाजार में हेरफेर को रोकना ट्रेडिंग एक्टिविटी पर बेहतर नजर रखना और निवेशकों के हितों की रक्षा करना है।
ये नियम जुलाई 2025 से दिसंबर 2025 के बीच सही तरीके से लागू होंगे। आइए जानते हैं कि सेबी के ये नए नियम क्या हैं और इनसे बाजार पर क्या असर पड़ेगा।

ओपन इंटरेस्ट की कैलकुलेशन का नया तरीका
अब तक ओपन इंटरेस्ट यानी खुले सौदों की संख्या की कैलकुलेशन 'नोशनल वैल्यू' पर आधारित होती थी, जो कि वायदे के कुल कीमत पर आधारित होती थी। लेकिन सेबी ने अब इसे बदलकर 'फ्यूचर इक्विवेलेंट' और 'डेल्टा-बेस्ड' ओपन इंटरेस्ट के आधार पर करने का फैसला लिया है।
इस बदलाव से डेरिवेटिव्स की वास्तविक जोखिम प्रोफाइल को बेहतर तरीके से समझा जा सकेगा और प्राइस मूवमेंट के प्रति उसकी सेंसिटीवीटि को ध्यान में रखा जा सकेगा।
इंडेक्स ऑप्शन में ज्यादा पोजिशन की इजाजत
सेबी ने इंडेक्स ऑप्शन में पोजिशन लिमिट को बढ़ा दिया है। पहले जहां यह सीमा 5,000 करोड़ रुपए थी, अब इसे बढ़ाकर 10,000 करोड़ रुपए कर दिया गया है। साथ ही नेट एंड ऑफ डे लिमिट को भी 500 करोड़ से बढ़ाकर 1,500 करोड़ रुपए किया गया है। ट्रेडर्स को इंट्राडे में ज्यादा स्वतंत्रता देने के लिए इंट्राडे लिमिट को पूरी तरह से हटा दिया गया है।
इंट्राडे निगरानी अब होगी जरूरी
सेबी ने सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स के लिए मार्केट-वाइड पोजिशन लिमिट (MWPL) की इंट्राडे मॉनिटरिंग को जरूरी बना दिया है। क्लियरिंग कॉरपोरेशन को अब एक दिन में कम से कम चार बार इन सौदों की निगरानी करनी होगी। इस कदम का उद्देश्य सट्टेबाजी को रोकना और डेरिवेटिव्स में अचानक होने वाली अस्थिरता को कम करना है।
सिंगल स्टॉक में निवेश की सीमा
अब व्यक्तिगत निवेशकों के लिए सिंगल स्टॉक डेरिवेटिव्स में MWPL का अधिकतम 10% तक ही निवेश करने की इजाजत होगी। वहीं, प्रोप्राइटरी ट्रेडिंग करने वाली संस्थाओं के लिए यह सीमा 20% रखी गई है। म्युचुअल फंड और विदेशी पोर्टफोलियो निवेशकों (FPI) के लिए भी अलग-अलग सीमाएं तय की गई हैं, जिससे बाजार में किसी एक पक्ष का प्रभाव न बढ़े।
नॉन-बेंचमार्क इंडेक्स के लिए सख्त ऐलिजिबिलिटी
सेबी ने यह भी स्पष्ट किया है कि अब डेरिवेटिव्स केवल उन्हीं इंडेक्स पर उपलब्ध होंगे जिनमें कम से कम 14 स्टॉक्स शामिल हों। किसी एक स्टॉक का भार 20% से ज्यादा नहीं होना चाहिए और तीन सबसे बड़े स्टॉक्स का कुल भार 45% से अधिक नहीं हो सकता। इससे इंडेक्स में विविधता बनी रहेगी और जोखिम का केंद्रिकरण नहीं होगा।
फ्यूचर मार्केट में प्री-ओपन सेशन की तैयारी
कैश मार्केट की तरह अब फ्यूचर मार्केट में भी प्री-ओपन सेशन शुरू करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसका मकसद शुरुआती कारोबार में बेहतर मूल्य खोज (प्राइस डिस्कवरी) करना और शुरुआती अस्थिरता को कम करना है। इससे ट्रेडर्स को ज्यादा स्थिर माहौल मिलेगा।
एक्सपायरी की तारीखों में बदलाव
सेबी ने यह तय किया है कि अब सभी डेरिवेटिव्स कांट्रैक्ट की एक्सपायरी केवल मंगलवार या गुरुवार को ही होगी। इससे एक्सपायरी के दिन बाजार में होने वाली अधिक ट्रेडिंग और उतार-चढ़ाव को कंट्रोल किया जा सकेगा।
More From GoodReturns

IndiGo Share: इंडिगो का शेयर करीब 10% तक भागा, निवेश से पहले कंपनी और CEO के बारे में जान लीजिए

Stock Market Crash: शेयर बाजार में हाहाकार, Sensex 1,700 अंक टूटा तो Nifty 24,300 के नीचे फिसला

Gold Price: Gold से जुड़े नियमों में बड़ा बदलाव, निवेशकों के लिए बड़ा झटका अब देना होगा टैक्स!

Gold Rate Today: 30 मार्च को सोने की कीमतों में आई बड़ी गिरावट! जानिए 24k, 22k, 18k गोल्ड रेट क्या है?

Gold Rate Today: 1 अप्रैल को सोने की कीमतों में आई जबरदस्त तेजी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 2 अप्रैल को चांदी की कीमतों में भारी गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 31 मार्च को चांदी की कीमतों में आई गिरावट! जानिए प्रति किलो चांदी का रेट क्या है?

Gold Rate Today: 2 अप्रैल को भी सोने की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए 24k, 22k,18k गोल्ड रेट क्या है?

Silver Price Today: 30 मार्च को चांदी का भाव सस्ता हुआ या महंगा? जानें प्रति किलो चांदी का रेट

Silver Price Today: 1 अप्रैल को चांदी की कीमतों में उतार-चढ़ाव जारी! जानिए प्रति किलो चांदी का भाव

Gold Rate Today: महीने के आखिरी दिन 31 मार्च को सोने की कीमतों में बड़ा बदलाव! जानिए 24k, 22k गोल्ड रेट



Click it and Unblock the Notifications