नयी दिल्ली। अगर आप कोई भी गाड़ी खरीदने की योजना बना रहे हैं तो आपके लिए यह जरूरी खबर है। आपको गाड़ी खरीदना महंगा पड़ सकता है। क्योंकि बहुत जल्द गाड़ियों की कीमतों में 12 फीसदी की बढ़ोतरी होने जा रही है। आपकी जानकारी के लिए बता दें कि इस समय बाजार में बीएस-4 स्टैंडर्ड वाली गाड़ियां मौजूद हैं। हालांकि ऑटो कंपनियां अब बीएस-6 स्टैंडर्ड वाली गाड़ियां बना और बेच रही हैं। दरअसल देश में 1 अप्रैल से सरकार के आदेश के मुताबिक बीएस-6 स्टैंडर्ड ही लागू होने जा रहा है। यानी सभी वाहन बीएस-6 स्टैंडर्ड के ही होंगे। वाहन डीलरों के प्रमुख संगठन फेडरेशन ऑफ ऑटोमोबाइल डीलर्स एसोसिएशन यानी एफएडीए ने कहा है कि बीएस-6 स्टैंडर्ड वाहनों की कीमत 12 फीसदी अधिक होगी। एफएडीए के अध्यक्ष आशिष हर्षराज काले के मुताबिक बीएस-4 गाड़ियों के मुकाबले बीएस-6 स्टैंडर्ड वाहनों की कीमतों में 7 से 12 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो रही है।
आपकी जेब पर बढ़ेगा बोझ
ऑटो कंपनियां इस लागत का वृद्धि का बोझ पूरी तरह से ग्राहकों पर ही डालेंगी। किसी भी वजह से लागत बढ़ने पर कंपनियां अपने वाहनों के दाम बढ़ा देती हैं। पिछले साल भी मारुति सहित कई बड़ी वाहन कंपनियों ने लागत में बढ़ोतरी का हवाला देकर अपनी गाड़ियों की कीमतों में इजाफा किया। जाहिर है नये स्टैंडर्ड के हिसाब से गाड़ी तैयार करने पर बढ़ने वाली लागत का बोझ भी ग्राहकों पर ही पड़ेगा। आपको बता दें कि जनवरी में पैसेंजर गाड़ियों की सेल में 6.2 फीसदी की गिरावट आयी है। ऑटो संगठन SIAM के अध्यक्ष राजन वढेरा का कहना है कि जीडीपी में सुस्ती और गाड़ियों की बढ़ती लागत का असर सेल पर पड़ रहा है।
बीएस-4 वाहनों का रजिस्ट्रेशन होगा बंद
बता दें कि 1 अप्रैल से बीएस-4 वाहनों का रजिस्ट्रेशन भी बंद हो जायेगा। हालांकि एफएडीए ने मांग की है कि 01 मार्च तक डीलरों के पास आए बीएस-4 स्टैंडर्ड वाहनों को 31 मार्च के बाद भी बेचने की अनुमति दी जाये। बीएस-4 वाहनों को अप्रैल में भी बेचने की अनुमति देने के लिए एफएडीए ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है, जिस पर सुनवाई होनी बाकी है। मामले पर सुर्पीम कोर्ट में फरवरी के दूसरे पखवाड़े में सुनवाई हो सकती है। एफएडीए ने कहा है कि डीलरों के पास आम तौर पर एक महीने की वाहनों की इंवेंट्री होती है। हालांकि ऑटो कंपनियों ने बीएस-4 वाहनों के उत्पादन में धीरे-धीरे कमी की है, जिसके चलते इस समय यात्री वाहनों की इंवेंट्री 25 से 30 दिनों और दोपहिया और हल्के कारोबारी वाहनों की इंवेंट्री 35 से 40 दिनों की है। इसी को आधार बना कर एफएडीए ने सुप्रीम कोर्ट में अप्रैल में इन वाहनों को बेचने देने की अपील की है।
क्या है बीएस-6 स्टैंडर्ड
बता दें कि बीएस का अर्थ है भारत स्टेज। इसका ताल्लुक उत्सर्जन मानकों से होता है। बीएस-6 इंजन से वाली गाड़ियों में खास फिल्टर होता है, जिससे 80-90 फीसदी पीएम 2.5 जैसे कण रोके जा सकते हैं। परिणामस्वरूप इससे नाइट्रोजन ऑक्साइड पर नियंत्रण लगता है, जिससे प्रदूषण पर काफी रोक लगेगी। ऑटो इंडस्ट्री एक्सपर्ट के मुताबिक बीएस-6 गाड़ियों में हवा में प्रदूषण के कण 0.05 से घटकर 0.01 रह जाएंगे, जो वातावरण के लिए काफी अच्छा। बीएस-6 इंजन वाली गाड़ियों से प्रदूषण में 75 फीसदी तक कमी आयेगी।
यह भी पढ़ें - ऑटो इंडस्ट्री में मंदी बरकरार, जनवरी में 6.2 फीसदी घटी यात्री गाड़ियों की बिक्री
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