Stock Market Crash: भारतीय शेयर बाजार में आज फिर भारी उतार-चढ़ाव देखने को मिला। कारोबार की शुरुआत से ही बिकवाली का दबाव साफ नजर आया। कुछ ही मिनटों में सेंसेक्स 1700 अंकों तक टूट गया और निफ्टी भी 500 अंकों से ज्यादा फिसल गया। इस तेज गिरावट ने निवेशकों की चिंता बढ़ा दी है, खासकर तब जब त्योहारों का मौसम नजदीक है।

सुबह के कारोबार में BSE का सेंसेक्स 78 हजार के आसपास पहुंच गया, जबकि NSE का निफ्टी 24,400 के नीचे आ गया। बाजार खुलते ही कुछ ही समय में लाखों निवेशकों की कुल संपत्ति में करीब 10 लाख करोड़ रुपए की कमी आंकी गई। बीएसई में लिस्टेड कंपनियों का कुल मार्केट कैप भी तेजी से घटा।
मिडिल ईस्ट का तनाव बना बड़ी वजह
गिरावट की मुख्य वजह अंतरराष्ट्रीय हालात माने जा रहे हैं। Iran और Israel के बीच बढ़ते तनाव ने वैश्विक बाजारों को प्रभावित किया है। इस पूरे मामले में United States की भूमिका ने स्थिति को और संवेदनशील बना दिया है।
जब दुनिया के किसी अहम इलाके में संघर्ष बढ़ता है, तो निवेशक जोखिम लेने से बचते हैं। यही कारण है कि शेयर बाजार में तेजी से बिकवाली देखी गई।
तेल की कीमतों में तेजी से चिंता
कच्चे तेल की कीमतें लगातार ऊपर जा रही हैं। ब्रेंट क्रूड 80 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच चुका है। भारत अपनी ज्यादातर तेल जरूरत आयात से पूरी करता है। ऐसे में तेल महंगा होने का सीधा असर देश की अर्थव्यवस्था पर पड़ता है।
तेल की ऊंची कीमतें महंगाई बढ़ा सकती हैं और कंपनियों की लागत में इजाफा कर सकती हैं। इससे उनके मुनाफे पर असर पड़ सकता है, जो बाजार के लिए नकारात्मक संकेत है।
विदेशी निवेशकों की बिकवाली जारी
विदेशी संस्थागत निवेशक (FII) पिछले कई महीनों से भारतीय बाजार में बिकवाली कर रहे हैं। हालिया सत्र में भी उन्होंने हजारों करोड़ रुपये के शेयर बेचे। विदेशी निवेशकों के लगातार बाहर निकलने से बाजार में कमजोरी बनी हुई है। हालांकि घरेलू निवेशक खरीदारी कर रहे हैं, लेकिन वे इस दबाव को पूरी तरह संतुलित नहीं कर पा रहे।
इंडिया VIX में उछाल
बाजार में डर और अनिश्चितता का संकेत देने वाला इंडिया VIX तेजी से ऊपर गया है। इसका मतलब है कि निवेशक आने वाले दिनों में और उतार-चढ़ाव की आशंका देख रहे हैं। ऐसे माहौल में ट्रेडर्स आमतौर पर सतर्क रुख अपनाते हैं।
निवेशकों को क्या करना चाहिए?
विशेषज्ञों का मानना है कि बाजार में गिरावट के समय घबराहट में फैसले लेना सही नहीं होता। लंबी अवधि के निवेशकों को अपने पोर्टफोलियो की समीक्षा करनी चाहिए और जरूरत पड़ने पर सलाह लेकर कदम उठाना चाहिए।
वैश्विक हालात और तेल की कीमतों पर नजर बनाए रखना जरूरी है। अगर स्थिति में सुधार होता है तो बाजार में भी स्थिरता लौट सकती है। फिलहाल संयम और समझदारी ही निवेशकों के लिए सबसे बड़ा सहारा है।
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