Success Story : बॉयोकॉन की फाउंडर किरण मजूमदार शॉ की गिनती देश के टॉप बिजनेस टायकून में होती है। उन्होंने अपनी लगन और मेहनत से यह साबित कर दिया कि महिलाएं भी बेहतर तरीके से बिजनेस कर सकती हैं।
किरण मजूमदार शॉ को हर कोई जानता है, लेकिन बॉयोकोन को बुलंदियों पर पहुंचाने में किरण द्वारा किए गए संघर्ष से काफी कम लोग ही वाकिफ है। फोर्ब्स के अनुसार, उनकी नेट वर्थ 230 करोड़ डॉलर है।

किरण का जन्म 23 मार्च 1953 को बेंगलुरु में हुआ था। उन्होंने वर्ष 1973 में बेंगलुरु विश्वविद्यालय से बीएससी की डिग्री हासिल की। उन्होंने इसके बाद वैलेरेट कॉलेज, मेलबर्न यूनिवर्सिटी ऑस्ट्रेलिया से 'मॉल्टिंग और ब्रूइंग' में उच्च शिक्षा हासिल की। उन्होंने 4 साल तक कार्लटन एंड यूनाइटेड ब्रूवरीज में ट्रेनी ब्रूअर के तौर पर काम किया।
किरण ने इसके बाद जूपिटर ब्रुअरीज लिमिटेड में तकनीकी सलाहकार के तौर पर भी काम किया। उन्होंने दिल्ली या बेंगलुरु में काम करने का सोची। दोनों ही जगह कंपनियों में ये कहकर मना कर दिया कि ब्रूअर का कार्य आदमी करते हैं, औरत नहीं।
जब वे दिल्ली और दिल्ली और बेंगलुरु में ब्रूमास्टर की नौकरी खोज रही थीं। तभी उनकी मुलाकात आयरिश एंटरप्रन्योर लेस ऑचिंक्लॉस से हुई। किरण को उन्होंने कारोबार शुरू करने का सुझाव दिया। जो किरण को पसंद नही आया।
ऑचिंक्सलॉस ने उन्हें ऑफर दिया कि वे आयरलैंड में बायोकॉन बायो केमिकल्स में कार्य सीख लें। यदि उनको कारोबार पसंद नही आए तो फिर वे उन्हें उनकी पसंद की नौकरी दिलवा देंगे। उन्होंने आयरलैंड में बायोकॉन बॉयो केमिकल्स लिमिटेड में ट्रेनी मैनेजर के तौर पर कार्य शुरू किया।
वे कुछ महीने बॉयोकोन में कार्य करने के बाद देश लौट आईं। उनका अब इरादा कारोबार करने का था। वो देश में कारोबार करना चाहती थी। यह एक परेशानी थी कि बायोटेक्नोलॉजी उस वक्त बिल्कुल नया सब्जेक्ट था। दूसरा किसी महिला के कारोबार संभाल पाने पर भी लोगों को संचय था। उन्हें इस कारण कारोबार शुरू करने के लिए लोन नहीं मिला।
उन्होंने वर्ष 1978 में आयरलैंड की बायोकॉन बायोकेमिकल्स लिमिटेड के साथ मिलकर अपनी कंपनी की स्थापना की। उन्होंने केवल 10,000 रु से एक गैराज में अपनी कंपनी शुरू की थी।
किरण की कंपनी ने सबसे पहले पपीते के रस से एंजाइम बनाने का काम शुरू किया। उनका कारोबार शुरू साल में ही गति पकड़ गया। उन्होंने कई देशों में अपना प्रोडक्ट निर्यात करना शुरू कर दिया। बायोकॉन ने इसके बाद इसिंग्लास का एक्सट्रेक्शन शुरू किया। इसका इस्तेमाल बीयर को साफ करने में किया जाता है।
किरण ने इसके बाद कभी पीछे मुड़कर नहीं देखा। आज बॉयोकोन देश की सबसे बड़ी लिस्टेड बायोफार्मास्युटिकल कंपनी है। मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार इस कंपनी का वैल्यूएशन लगभग 30 हजार करोड़ रुपये है।
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