Successful Business Woman : अचार या, जैसा कि बोलचाल की भाषा में इसे ऊरगाई, उप्पिनिकाई या कहा जाता है, भारतीयों की भावनाओं से जुड़ा है। अचार को पूरे देश में पंसद किया जाता है। कहीं मसालेदार, कहीं मीठा और कहीं खट्टा अचार पसंद किया जाता है। आम का अचार एक साधारण दाल चावल के टेस्ट को काफी बेहतर बना देता है, जबकि मिर्च का अचार पराठे के स्वाद को बढ़ाता है। हर किसी का एक पसंदीदा अचार और उसके पीछे एक वजह होती है। वहीं शीला चाको कल्लिवयालिल ने अचार और जैम की अपनी रेंज के माध्यम से इन बचपन की यादों को अपने जीवन का मिशन बना लिया है। इसी से उन्होंने बिजनेस भी शुरू किया और अब वे इससे काफी तगड़ी कमाई कर रही हैं।

फलों के साथ प्रयोग
जब शीला 2001 में केरल के कोट्टायम में मुंडकायम चली गईं, तो उन्होंने खुद के लिए ढेर सारा खाली पाया। उन्होंने केले, पपीता, अमरूद आदि जैसी बहुत सारे फलों के साथ प्रयोग करने का सोचा। द बेटर इंडिया की रिपोर्ट के अनुसार मुंडकायम जाने के बाद शीला ने देखा कि इनमें से बहुत सारे फलों और उत्पादों को बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिल रही।
ऐसे आया आइडिया
फलों और उत्पादों को बाजार में अच्छी कीमत नहीं मिल पाने के कारण उन्होंने इनसे जैम और अचार बनाने के बारे में सोचा। उन्होंने केले का जैम बनाने की कोशिश की, जो केरल में काफी लोकप्रिय है। उन्होंने इसे पारंपरिक विधि का उपयोग करके बनाया, जिसमें इसे लकड़ी की आग पर इसे पकाया जाता है, जो इसे धुएँ के रंग का स्वाद देता है।

छोटी दुकानों और बेकरियों से शुरुआत
65 वर्षीय शीला ने लगभग एक दशक पहले केले के जैम का पहला बैच लिया और इसे कोच्चि की कुछ छोटी दुकानों और बेकरियों को बेचने के लिए दिया। एक हफ्ते बाद, जब वह पूछताछ करने गईं कि क्या उनके प्रोडक्ट अच्छा कर रहे हैं, तो उन्हें ये जानकार खुशी हुई कि वे बिक गए। बल्कि वे यह सुनकर बहुत रोमांचित हुईं कि वे सभी बिक गए थे। वे कहती हैं कि उन्हें उम्मीद नहीं थी कि इतने सारे लोग इसे पसंद करेंगे।
आज कितने प्रोडक्ट्स हैं
उसके बाद शीला ने पीछे मुड़कर नहीं देखा। उसने 'शीलाज' नामक अपनी लाइन में और उत्पाद जोड़े। आज वह 14 से ज्यादा अचार और जैम बेचती हैं। इनमें सीफूड अचार भी शामिल हैं, जैसे झींगा, सीर फिश और वेलुरी फिश। इससे उन्हें प्रति माह लगभग 1.5 लाख रुपये की कमाई होती है।

पहले कभी अचार और जैम नहीं बनाया
शीला के बिजनेस की सफर की दिलचस्प बात यह है कि उन्होंने पहले कभी अचार और जैम नहीं बनाया। उनके घर में उनकी दादी से लेकर माँ और सास तक सभी बेहतरीन और कुशल कुक रहे। उनके पास भी घर के बने अचार और जैम हमेशा रहते थे। इसीलिए उन्होंने अपने जीवन में पहले कभी अचार नहीं बनाया। जब उनके पास समय था, तो उनके पति के प्रोत्साहन ने उन्हें केले के जैम का पहला बैच बनाने का मौका मिला। उनके पास अब चार महिलाओं की एक टीम है जो खाना पकाने, पैकेजिंग आदि में मदद करती हैं।
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