नई दिल्ली, अगस्त 31। भारत सरकार ने 31 अगस्त 2022 से घरेलू हवाई किराए पर मूल्य सीमा (प्राइस कैप) हटा दी है। प्राइस कैप को करीब 27 महीनों की अवधि के बाद हटाने का फैसला लिया गया है। इससे होगा यह कि एयरलाइंस अब खुद किराया निर्धारित कर सकती हैं क्योंकि अब कोई प्राइस कैप सीमा नहीं है। गौरतलब है कि केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय ने इस महीने की शुरुआत में ही घरेलू हवाई किराए पर प्राइस कैप को हटाने की घोषणा कर दी थी।
क्यों लिया ये फैसला
केंद्रीय उड्डयन मंत्रालय के मुताबिक हवाई किराया सीमा को हटाने का निर्णय सावधानीपूर्वक दैनिक मांग और एयर टर्बाइन ईंधन (एटीएफ) की कीमतों के विश्लेषण के बाद लिया गया। उनके अनुसार कोविड के बाद स्थिरता आनी शुरू हो गयी है। उन्होंने कहा कि एयरलाइन सेक्टर निकट भविष्य में घरेलू यातायात में वृद्धि के लिए तैयार है। ये बात उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने ट्वीट कर कही थी।
एटीएफ की कीमतें नीचे आईं
24 फरवरी से शुरू हुए रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचने के बाद पिछले कुछ हफ्तों के दौरान एटीएफ की कीमतें नीचे आती दिखी हैं। मालूम हो कि कोविड-19 महामारी के कारण जब सबसे पहले दो महीने का लॉकडाउन लगाया था तो उसके बाद 25 मई, 2020 को सेवाओं को फिर से शुरू करने पर मंत्रालय ने उड़ान अवधि के आधार पर घरेलू हवाई किराए पर निचली (लोअर) और ऊपरी (अपर) सीमा लगा दी थी।
कितने पर थी लिमिट
जब ये सीमा लगाई गई थी, तो एयरलाइंस 40 मिनट से कम की घरेलू उड़ानों के लिए 2,900 रुपये (जीएसटी को हटा कर) से कम और 8,800 रुपये (जीएसटी को हटा कर) से अधिक शुल्क नहीं ले सकती थी। लोअर कैप का उद्देश्य उन एयरलाइनों को बचाना था जो आर्थिक रूप से कमजोर थीं, जबकि ऊपरी कैप यात्रियों को उच्च किराए से बचाने के लिए लागू की गयी थी।
समीक्षा के बाद हटाई कैप
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के एक आदेश में कहा गया है कि शेड्यूल घरेलू ऑपरेशंस की वर्तमान स्थिति की समीक्षा की गयी है, यानी हवाई यात्रा के लिए यात्री की मांग, और उसके बाद ही 31 अगस्त, 2022 से प्रभावी हवाई किराए के संबंध में किराया बैंड को हटाने का निर्णय लिया गया है।
कोविड को लेकर बड़ा निर्देश
आदेश में यह भी गया है कि एयरलाइंस और हवाईअड्डा संचालकों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के दिशा-निर्देशों का सख्ती से पालन किया जाए और यात्रा के दौरान उनके द्वारा कोविड को रोकने के लिए उपयुक्त व्यवहार को सख्ती से लागू किया जाए। विस्तारा के सीईओ विनोद कन्नन ने 19 जून को कहा था कि अगर हवाई किराए की निचली और ऊपरी सीमा बढ़ा दी जाती है तो उन्हें खुशी होगी, लेकिन सबसे अच्छा समाधान यह होगा कि एयरलाइंस को हवाई किराए पर पूर्ण स्वतंत्रता हो। कई विशेषज्ञों का मानना है कि एयरलाइंस अपनी प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ाने के लिए कुछ रूटों पर कीमतें कम करेंगी। यह उन्हें उपभोक्ताओं को छूट की पेशकश करने के लिए भी प्रेरित करेगा। विभिन्न रूटों पर प्रतिस्पर्धा भी कीमतों में वृद्धि का कारण भी बन सकती है।
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