Trade Setup Today: आज भारतीय मार्केट का प्रदर्शन थोड़ा मिला-जुला देखने को मिल सकता है। इसके अलावा निफ्टी में 21000 प्वाइंट्स के स्तर तक का सपोर्ट देखने को मिल सकता है। आपको बताते चले कि इस समय तीसरे क्वार्टर के रिजल्ट आ रहे हैंऔर इस बीच बाजार में कुछ खास स्टॉक में हरकत देखने को मिल सकती है। वहीं निवेदक आने वाले अंतरिम बजट के हिसाब से अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर सकते हैं या उसकी पोजीशन सेट कर सकते हैं। अगर बात की जाए कल की तो बाजार बंद होने तक सेंसेक्स और निफ्टी में 1.5 प्रतिशत की गिरावट देखने को मिली थी।
अगर बात की जाए बुधवार यानी आज के शुरूआती कारोबार की तो गिफ्ट निफ्टी के ट्रेड में थोड़ी तेजी देखने को मिली है। वॉल स्ट्रीट की बात की जाए तो एशियाई शेयरनिचले स्तर पर काम कर रहे थे लेकिन वॉल स्ट्रीट को रिकॉर्ड हाई गेन मिला है।

आपको बताते चलें कि निवेशक का कॉर्पोरेट अर्निंग पर नजर बनाए हुए हैं। उनका ध्यान कॉर्पोरेट आए और दर में कटौती की संभावनाओं पर भी है।
आपकी जानकारी के लिए बताते चलें कि 23 जनवरी को, भारतीय शेयर बाजार में जबरदस्त बिकवाली हुई और सेंसेक्स और निफ्टी ने 71,000 और 21,500 के अपने महत्वपूर्ण निशान मिटा दिए। 30-शेयर बेंचमार्क 1053.10 अंक या 1.47 प्रतिशत तक गिरकर 70,370.55 पर बंद हुआ। वहीं अगर बात की जाए 50-शेयर बेंचमार्क कि तो यह 333 अंक या 1.54 प्रतिशत गिरकर 21,238.80 पर बंद हुआ।
बिकवाली के बारे में बात करते हुए जियोजित फाइनेंशियल सर्विसेज के शोध प्रमुख विनोद नायर ने कहा कि बाजार में आज लगातार गिरावट देखी गई, सकारात्मक शुरुआत के बावजूद अचानक नेगेटिव इंपैक्ट देखने को मिला, ऐसा हैवीवेट सेक्टर जैसे कि फाइनेंस में सेलिंग के कारण देखने को मिला। आपको बताते चलें कि कल मुख्य सूचकांकों की तुलना में मिड और स्मॉल-कैप में अधिक गिरावट देखी गई।
अगर आज की डेट ट्रेडिंग गाइड की बात की जाए तो आयत ने कहा है कि आज की अर्निंग सेशन के दौरान कुछ खास स्टॉक में एक्शन देखने को मिल सकता है।
इसके अलावा, मेहता इक्विटीज के सीनियर वीपी (रिसर्च) प्रशांत तापसे ने कहा कि वैश्विक बाजार में सकारात्मक गति के बावजूद, घरेलू बाजारों में आज बिकवाली का दबाव जारी रहा। ऐसा मुख्य रूप से एफआईआई को चिंतित करने वाली खबरों के कारण हुआ। क्योंकि बाजार नियामक सेबी के द्वारा एक पेपर ड्राफ्ट किया गया है सी इन्वेस्टर्स का असर पड़ेगा और इसे 1 फरवरी से लागू किया जाना है। चलेगी बाजार नियामक से भी ने बेनिफिशियल ओनरशिप नॉर्म्स को पहले से ज्यादा टाइट किया है। उन्होंने आगे कहा कि यह समय सीमा से पहले नियमों को आसान बनाने के लिए विदेशी बैंकों और कुछ ऑफशोर फंड मैनेजरों के दबाव के बावजूद था।
यदि यह सच है तो घरेलू बाजारों में मानदंडों का पालन करने में असमर्थ फंडों द्वारा अगले छह महीनों में 1.5 लाख करोड़ रुपये से 2 लाख करोड़ रुपये तक की अधिक बिक्री देखी जा सकती है। भारतीय बाजारों में हालिया बिकवाली पिछले कुछ सत्रों में एफआईआई द्वारा भारी बिकवाली के कारण हुई है। वहीं आज की मंदी अब तक मिश्रित आय परिणामों और उच्च मूल्यांकन चिंताओं के कारण हो सकती है।
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