नई दिल्ली, सितंबर 28। अगर वीआई (वोडाफोन आइडिया) के ग्राहक हैं तो आपके लिए एक बुरी खबर है। दरअसल आपकी सेवाएं रुक सकती हैं। इसमें आपकी कोई गलती नहीं, बल्कि वीआई की तरफ से अपने बकाया का न चुकाया जाना अहम कारण है। भारत की सबसे बड़ी मोबाइल टावर लगाने वाली कंपनी इंडस टावर्स ने वीआई से अपना बकाया चुकाने को कहा है। इसने कहा है कि यदि इसने अपना बकाया न चुकाया तो वीआई नवंबर से अपने टावरों पर एक्सेस खो देगी। इससे वीआई के 25.5 करोड़ से अधिक ग्राहकों की मोबाइल सेवाएं गंभीर रूप से बाधित हो सकती हैं। मुमकिन है कि तब वीआई के ग्राहक कॉल न कर पाएं और न ही इंटरनेट का इस्तेमाल कर पाएं।
कंपनी को लिखा पत्र
ईटी की रिपोर्ट के अनुसार मामले से वाकिफ दो लोगों के मुताबिक टावर कंपनी की तरफ से सोमवार को वीआई एक चेतावनी दी गयी है। ये चेतावनी कड़े शब्दों में लिखे एक पत्र में दी गयी है। सोमवार को पहले इंडस टावर्स बोर्ड की बैठक हुई। उस बैठक में कंपनी के बढ़ते ट्रेड रिसीवेबल्स पर चर्चा की गई। साथ ही कहा गया कि इसका कारण वीआई द्वारा भुगतान में देरी है।
नाराज हैं डायरेक्टर
वीआई की तरफ से लंबे समय तक बकाया भुगतान न करने से इंडस बोर्ड के स्वतंत्र निदेशक नाराज हैं। वीआई पर दो टावर फर्मों का बकाया है। ये राशि 10,000 करोड़ रु से अधिक है। इसमें इंडस टावर्स के 7,000 करोड़ रु से हैं। वहीं बाकी पैसा अमेरिकन टॉवर कंपनी (एटीसी) का माना जाता है। इस समय वीआई 20,000 करोड़ रु जुटाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए ये डेब्ट और इक्विटी दोनों से पैसा जुटाने की कोशिश में है। लेकिन अभी तक ये किसी भी डील को सील करने में सक्षम नहीं है।
इंडस है परेशान
इंडस के जून तिमाही के शुद्ध लाभ में 66.3 फीसदी की गिरावट आई और इसका लाभ 477.3 करोड़ रुपये रह गया। इसके लाभ में गिरावट मुख्य रूप से हेवी रिसीवेबल्स के कारण रही। अप्रैल-जून की अवधि में इंडस की ट्रेड रिसीवेबल्स 6,249.6 करोड़ रुपये रही। इसका मुख्य कारण वीआई द्वारा भुगतान में देरी रही। लंबे समय तक ट्रेड रिसीवेबल्स के कारण इंडस को डाउटफुल डेब्ट (वो कर्ज या बकाया जिसके मिलने की संभावना पर संदेह हो) के लिए 1,230 करोड़ रुपये का प्रोविजन करना पड़ा।
क्या है ट्रेड रिसीवेबल्स
ट्रेड रिसीवेबल्स किसी कंपनी द्वारा क्रेडिट पर वस्तुओं या सेवाओं की बिक्री के बाद अपने ग्राहकों से बकाया राशि के रूप में परिभाषित किया जाता है। यानी इंडस ने वीआई को क्रेडिट पर सर्विस दे दी। अब वीआई को जितना इंडस को सेवाओं के लिए देना है वो इंडस के लिए ट्रेड रिसीवेबल्स हैं।
वीआई पर पूरा कर्ज
वीआई पर वैसे भी बहुत कर्ज है। जून के अंत में, वीआई का शुद्ध कर्ज 1.98 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। इसके स्पेक्ट्रम भुगतान का बकाया 1.16 लाख करोड़ रुपये है। वहीं बैंकों और वित्तीय संस्थानों का 15,200 करोड़ रुपये का कर्ज है। वहीं जून तिमाही के अंत में ही वीआई पर नेटवर्क वेंडर्स और अन्य आपूर्तिकर्ताओं का 5,000 करोड़ रुपये से अधिक का बकाया है।
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