नई दिल्ली, जुलाई 28। इस समय बहुत से बैंकों में हजारों करोड़ रु अनक्लेम्ड राशि को तौर पर पड़े हैं। अनक्लेम्ड राशि यानी वो जिसका कोई दावेदार नहीं है। अब रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने उन आठ राज्यों पर ध्यान केंद्रित करते हुए एक राष्ट्रीय अभियान शुरू किया है, जिनके पास ऐसी अधिकतम राशि है। इन आठ राज्यों की भाषाओं के साथ-साथ हिंदी और अंग्रेजी में इस अभियान को शुरू कर दिया गया है। आरबीआई की वार्षिक रिपोर्ट के अनुसार बैंकों में लावारिस जमा पैसा वित्त वर्ष 2020-21 में 39,264 करोड़ रुपये से बढ़ कर वित्त वर्ष 2021-22 में 48,262 करोड़ रुपये हो गया।
इन राज्यों में है सबसे अधिक पैसा
आरबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक इनमें से ज्यादातर फंड तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, बंगाल, कर्नाटक, बिहार और तेलंगाना/आंध्र प्रदेश के बैंकों में है। इसी के मद्देनदर आरबीआई ने हिंदी और अंग्रेजी सहित कई अन्य भाषाओं में अभियान की शुरुआत कर दी है।
क्या है अनक्लेम्ड राशि का नियम
आरबीआई के नियमों के अनुसार बचत या चालू खातों में वो बैलेंस जो 10 वर्षों से ऑपरेट नहीं हुआ या मैच्योरिटी की तारीख से 10 वर्षों के भीतर एफडी का क्लेम नहीं किया जाता है, उन्हें "अनक्लेम्ड डिपॉजिट" के रूप में क्लासिफाई किया जाता है। इसके बाद, बैंक इस तरह के पैसे को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा बनाए गए 'जमाकर्ता शिक्षा और जागरूकता कोष' (डिपॉजिटर एजुकेशन एंड अवेयरनेस फंड) में ट्रांसफर करते हैं।
ब्याज के साथ मिलेगा
हालांकि जमाकर्ता पैसा ट्रांसफर होने के बाद भी लागू ब्याज दर के साथ बैंक से अपने पैसे का दावा करने के हकदार हैं। पर अब बैंकों के साथ-साथ आरबीआई द्वारा समय-समय पर किए गए जन जागरूकता अभियानों के बावजूद, ऐसी जमा राशि में वृद्धि देखने को मिल रही है।
क्यों बढ़ रही ऐसी राशि
अनक्लेम्ड जमाराशियों की वॉल्यूम मुख्य रूप से बचत या चालू खातों को बंद न करने के कारण बढ़ रही है। ये ऐसे खाते होते हैं जिन्हें जमाकर्ता संचालित नहीं करना चाहते। इसी तरह लोग एफडी की मैच्योरिटी पर रिडम्पशन क्लेम नहीं करते, उससे भी इस तरह की राशि बढ़ी है। मृत जमाकर्ताओं के खातों के भी मामले हैं, जहां नामित/कानूनी उत्तराधिकारी पैसे वापस लेने के लिए आगे नहीं आते हैं।
क्या है आरबीआई के कैम्पेन का मकसद
बता दें कि केंद्रीय बैंक ने कहा कि शुरू किए अभियान का उद्देश्य ऐसे जमाकर्ताओं या मृत जमाकर्ताओं के नामितों/कानूनी वारिसों को जमा की पहचान करने और उस राशि पर क्लेम करने में मदद करना है।
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