UPI Transaction In Dollar: ऑनलाइन पेमेंट करने के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) सिस्टम अब एक और जरूरी अपडेट के लिए तैयार है। इस अपडेट के लागू होने के बाद से लेनदेन डॉलर में किया जा सकेगा। गौरतलब है कि अगर ऐसा अपडेट यूपीआई में आता है, तो अब दुनिया के दूसरे देशों में ट्रांजैक्शन करना भी काफी ज्यादा आसान हो जाएगा। इससे ट्रैवल करते वक्त भी आपको ज्यादा दिक्कत का सामना नहीं करना पड़ेगा।
जल्दी लागू हो सकता हे ये नियम
आपको बताते चलें कि नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन आफ इंडिया, भारतीय रिजर्व बैंक के साथ मिलकर जल्द से जल्द इस बदलाव को लाने और लागू करने के लिए स्विफ्ट के साथ इस पर चर्चा भी कर रहे हैं।

आसान हो जाएगा सीमा पार से लेनदेन
आ रही रिपोर्ट में कहा गया है कि इस इंटीग्रेशन का लक्ष्य यूपीआई को सीमा पार डिजिटल लेनदेन को सबसे सुविधाजनक और सुरक्षित बनाने का है। ताकि आप आसानी से विदेशी करेंसी में भी अपने फोन से पैसे ट्रांसफर कर सकें।
क्या है स्विफ्ट
स्विफ्ट, जिसे सोसाइटी फॉर वर्ल्डवाइड इंटरबैंक फाइनेंशियल टेलीकम्युनिकेशन के रूप में भी जाना जाता है। एक विश्व स्तर पर मान्यता प्राप्त प्रणाली है, जो अंतर-देशीय बैंक लेनदेन के लिए माध्यम के रूप में काम करती है। अगर आपको एक से दूसरे देश में पैसे ट्रांसफर करना है, तो आपको स्विफ्ट की जरूरत पड़ती है।
इस इंटीग्रेशन से, यूपीआई के माध्यम से अंतर्राष्ट्रीय व्यापार करना सुव्यवस्थित और आसान हो जाएगा। साथ ही आप बड़ी आसानी से विदेश में ट्रांजैक्शन कर पाएंगे।
आपको बताते चलें कि डॉलर में पैसे ट्रांसफर को जोड़ते हुए, आरबीआई गवर्नर शक्तिकांत दास ने 8 दिसंबर को मौद्रिक नीति समिति (एमपीसी) की बैठक के दौरान यूपीआई के संबंध में महत्वपूर्ण निर्णयों की घोषणा की। गौरतलब है। इस दौरान यूपीआई पेमेंट के जरिए हॉस्पिटल और एजुकेशनल इंस्टीट्यूशन में 1 लाख से लेकर 5 लाख रुपए तक ट्रांजैक्शन बड़ी आसानी से और तुरंत किया जा सकता है।
भारत सरकार धीरे-धीरे ई-कॉमर्स के जरिए एक्सपोर्ट व्यापार को बढ़ावा देने की कोशिश में लगी है। ऐसे में जब ई कॉमर्स व्यापार बढ़ेगा और यूपीआई के जरिए डॉलर में ऑनलाइन ट्रांजैक्शन किया जा सकेगा, तो देश की अर्थ व्यवस्था को भी तेजी मिलेगी और काम आसान हो जाएगा।
बीते दिनों हुई आरबीआई की बैठक में सेंट्रल बैंक ने ऑटो डेबिट की लिमिट को बढ़ाकर 1 लाख रुपए पर ट्रांजैक्शन तक कर दिया है। इससे अब आप की 1 लाख रुपए की तक कोई भी किस्त हो या पेमेंट हो वह भी बड़ी आसानी से आपके अकाउंट से कट जाएगी और आपको बार-बार पेमेंट करने की झंझट का सामना भी नहीं करना पड़ेगा। इसे एसआईपी और क्रेडिट कार्ड के बिल भरने के लिए इस्तेमाल किया जा सकता है।
इतना ही नहीं विदेश से भारत आने वाले पैसे पर लगने वाली लागत को कम करने के लिए ई-आरयूपीआई जैसी डिजिटल करेंसी भी लाई जा रही है। आपको बताते चले कि इस करेंसी के आ जाने से 100 अरब डॉलर के ट्रांजैक्शन पर लगने वाला 5 अरब का खर्चा घटकर 2 से 3 अरब डॉलर के आसपास आ जाएगा। इसके साथ ही ट्रांजैक्शन की सुविधा भी बेहतर हो जाएगी। वहीं यूपीआई के जरिए डॉलर में पैसे ट्रांसफर होने लगे तो यह काम चुटकियों में हो जाएगा।
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