US India Trade Deal: भारत और अमेरिका के बीच एक ऐतिहासिक ट्रेड डील हुआ है, जिसे एक्सपर्ट्स एक 'ब्रेकथ्रू' मान रहे हैं। यह केवल कागजी करार नहीं, बल्कि भारतीय अर्थव्यवस्था को नई ऊंचाइयों पर ले जाने वाला एक महत्वपूर्ण कदम है। भारत-अमेरिका में हुए ट्रेड डील को लेकर दिग्गज ब्रोकरेज ने अपनी राय दी है और बताया है कि इससे किन सेक्टर्स को फायदा मिलने की प्रबल संभावना है।

दिग्गज ब्रोकरेज फर्म सिटी (CITI) और बैंक ऑफ अमेरिका (BofA) ने इस डील का गहन विश्लेषण किया है। ब्रोकरेज ने अपनी रिपोर्ट्स में बताया है कि यह समझौता निवेशकों की उन तमाम चिंताओं को खत्म कर देगा, जो पिछले कई महीनों से बाजारों पर हावी थीं और भारत की आर्थिक संभावनाओं पर संदेह पैदा कर रही थीं।
भारत-यूएस ट्रेड डील पर CITI की क्या है राय?
सिटी का मानना है कि इस समझौते ने भारत के 'भू-राजनीतिक अलगाव' (Geopolitical Isolation) के 'टेल रिस्क' को पूरी तरह खत्म किया है। यूरोपीय संघ और अब अमेरिका के साथ लगातार हुए समझौतों ने इस महत्वपूर्ण चिंता को प्रभावी ढंग से संबोधित कर दिया है, जिससे भारत की वैश्विक स्थिति मजबूत हुई है।
सिटी के विश्लेषण अनुसार, भारत में 'चीन+1' मैन्युफैक्चरिंग की जो थीम थोड़ी ठंडी पड़ गई थी, वह अब फिर से सबसे बड़ा निवेश मंत्र बनेगी। यह बदलाव वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने की प्रवृत्ति को मजबूत करेगा, जिससे भारत एक प्रमुख विनिर्माण केंद्र के रूप में उभरेगा।
किन सेक्टर्स को मिलेगा फायदा?
इस डील के बाद डेटा सेंटर, परमाणु ऊर्जा, मोबाइल फोन, विमानन और सेमीकंडक्टर जैसे रणनीतिक सेक्टर्स में सरकारी नीतियां अब जमीन पर कहीं ज्यादा प्रभावी ढंग से काम कर पाएंगी। इससे इन प्रमुख उद्योगों को विकास और नवाचार के लिए आवश्यक प्रोत्साहन मिलेगा।
सकारात्मक बाजार धारणा के चलते, विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) तुरंत भारत की ओर मुड़ेगा, जिससे हमारा बैलेंस ऑफ पेमेंट (BoP) पॉजिटिव हो जाएगा। इससे रुपए और ब्याज दरों पर बन रहे अल्पकालिक दबाव में कमी आएगी, जिससे अर्थव्यवस्था को स्थिरता प्रदान होगी।
शेयर बाजार में आने वाली इस तेजी का असर शहरी खपत (Urban Consumption) पर दिखेगा। जब निवेशकों की संपत्ति बढ़ेगी, तो वे बाजार में ज्यादा खर्च करेंगे, जिससे कुल मांग में वृद्धि होगी और अर्थव्यवस्था को एक महत्वपूर्ण बढ़ावा मिलेगा। इसे 'वेल्थ इफेक्ट' के रूप में देखा जा रहा है।
भारत का सेवा क्षेत्र, जो अमेरिका को बड़े पैमाने पर सॉफ्टवेयर और प्रोफेशनल सेवाएं प्रदान करता है, अब इस समझौते के बाद और अधिक सुरक्षित महसूस करेगा। सिटी का कहना है कि इस डील से भारतीय सेवा निर्यात और लोगों की आवाजाही पर सुरक्षात्मक प्रतिबंधों (Protectionist Measures) का खतरा पूरी तरह समाप्त हो गया है।
BofA ने भारत-यूएस ट्रेड डील पर क्या कहा?
बैंक ऑफ अमेरिका (बोफा) ने इस समझौते को भारत के लिए एक बड़ी कामयाबी करार दिया है। बोफा की रिपोर्ट उन प्रमुख आंकड़ों पर ध्यान केंद्रित करती है, जो सीधे तौर पर भारत की सकल घरेलू उत्पाद (GDP) वृद्धि और समग्र व्यापार को प्रभावित करेंगे, जिससे दीर्घकालिक आर्थिक लाभ संभावित हैं।
बोफा के विश्लेषण अनुसार, भारत की प्रभावी टैरिफ दरें जो फिलहाल करीब 35 परसेंट हैं, वो गिरकर 12 से 13 परसेंट के बीच आ सकती हैं। यह भारी कमी भारत को पूरे क्षेत्र में सबसे अधिक प्रतिस्पर्धी विनिर्माण और व्यापार गंतव्य बना देगी, जिससे निर्यात को अभूतपूर्व बढ़ावा मिलेगा।
भारत अब रूस से कच्चा तेल खरीदना बंद करने पर सहमत हो गया है, जिसके स्थान पर अमेरिका और वेनेजुएला से तेल का आयात बढ़ाया जाएगा। बदले में, अमेरिका ने भारत पर लगे रूसी तेल संबंधी सभी जुर्माने और पेनल्टी वापस लेने का एलान किया है, जिसे बोफा ने एक बड़ा फैसला बताया है।
इस डील के तहत, भारत अमेरिका से अपना कुल आयात 500 बिलियन डॉलर तक बढ़ाएगा, जिससे दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार में भारी वृद्धि होगी। यह आर्थिक सहयोग के नए द्वार खोलेगा।
बैंक ऑफ अमेरिका को उम्मीद है कि इस समझौते के परिणामस्वरूप, भारत की वित्त वर्ष 2027 की जीडीपी ग्रोथ 6.8 परसेंट के मौजूदा अनुमान से भी ऊपर जा सकती है। यह डील भारत की आर्थिक स्थिति को और सुदृढ़ करेगी तथा विकास की गति को तेज करेगी।
टैक्सटाइल, रत्न-आभूषण, कृषि सेक्टर्स को मिलेगा फायदा: बोफा
यह टैरिफ कटौती टैक्सटाइल, रत्न एवं आभूषण, कृषि और इंजीनियरिंग गुड्स जैसे श्रम-प्रधान क्षेत्रों के लिए भी जबरदस्त राहत लेकर आएगी। ये ऐसे सेक्टर हैं, जो देश में अधिकतम रोजगार सृजित करते हैं, और उन्हें मिलने वाले इस लाभ से ग्रामीण व शहरी दोनों अर्थव्यवस्थाओं को महत्वपूर्ण सहारा मिलेगा।
डील का सबसे चौंकाने वाला और रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण हिस्सा कच्चे तेल से जुड़ा है। भारत ने अपनी ऊर्जा रणनीति में बड़ा बदलाव किया है; रूस से व्यापारिक रिश्ते अब अमेरिका और वेनेजुएला की तरफ मोड़ दिए गए हैं। यह फैसला न केवल आर्थिक बल्कि रणनीतिक भी है, जिससे अमेरिका से रिश्ते मजबूत होंगे और चीन की तरफ भारत के कथित झुकाव पर बाजार की बातें रुकेंगी।
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