नयी दिल्ली। आज बीएसई में वोडाफोन आइडिया के शेयर में एक ही दिन में 48 फीसदी तक की उछाल देखी गयी। वोडाफोन का शेयर 3.03 रुपये के पिछले बंद स्तर के मुकाबले सुबह बढ़ोतरी के साथ 3.20 रुपये पर खुला और कारोबार के दौरान 4.49 रुपये तक ऊपर गया, जो करीब 48 फीसदी की बढ़ोतरी थी। आखिर में वोडाफोन आइडिया का शेयर 1.16 रुपये या 38.28 फीसदी की बढ़ोतरी के साथ 4.19 रुपये के भाव पर बंद हुआ। इस भाव पर वोडाफोन की मार्केट कैपिटल 12,040.13 करोड़ रुपये है। बता दें कि एजीआर के मामले के चलते वोडाफोन के शेयर में पिछले कुछ महीनों में काफी गिरावट आयी है। इसके पिछले 52 हफ्तों का सबसे ऊँचा स्तर 21.32 रुपये रहा है। वहीं इस दौरान इसका सबसे कम भाव महज 2.61 रुपये रहा है। वहीं पिछले एक महीने में भी यह सिर्फ 6.05 रुपये तक ऊपर जा सका है।
क्या है उछाल की वजह
सुप्रीम कोर्ट की तरफ से एजीआर के लिए मिली नयी डेडलाइन के बीच बीते मंगलवार को कंपनी के अध्यक्ष कुमार मंगलम बिड़ला ने दूरसंचार सचिव अंशु प्रकाश से मुलाकात की। वे कंपनी को बचाए रखने के लिए विकल्पों की तलाश के लिए दूरसंचार सचिव से मिले। हालांकि उन्होंने मुलाकात के बाद कहा कि वे अभी कुछ नहीं कह सकते। मगर इकोनॉमिक टाइम्स में छपी एक रिपोर्ट के अनुसार फिलहाल सरकार द्वारा वोडाफोन आइडिया की बैंक गारंटी को भुनाये जाने की संभावना नहीं है। ये वोडाफोन के लिए राहत की खबर है।
सुप्रीम कोर्ट से राहत नहीं
हालांकि बैंक गारंटी भुनाये जाने के मामले में सुप्रीम कोर्ट वोडाफोन को पहले ही झटका दे चुका है। वोडाफोन ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दाखिल करके मांग की थी कि अदालत दूरसंचार विभाग को एजीआर वसूलने के लिए इसकी बैंक गारंटी न भुनाने का निर्देश दे। मगर सुप्रीम कोर्ट ने वोडाफोन की अपील ठुकरा दी। वोडाफोन के वकील मुकुल रोहतगी ने चेतावनी दी थी कि अगर बैंक की गारंटी खत्म हो जाती है, तो कंपनी को बंद करना होगा। इस बीच सरकार ने फिर से कैबिनेट सेक्रेटरी को कहा है कि कोई टेलीकॉम कंपनी बंद न ऐसे प्रयास किये जायें। क्योंकि इससे पूरे सेक्टर, नौकरियों, व्यापक अर्थव्यवस्था और भारत की वैश्विक धारणा पर प्रभाव पड़ेगा।
एयरटेल पर बढ़ सकता है बोझ
बता दें कि एयरटेल को वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस के बकाया एजीआर में से भी बड़ा हिस्सा चुकाना पड़ सकता है। मार्च 2016 में एयरटेल ने वीडियोकॉन टेलीकम्युनिकेशंस से 1800 मेगाहर्ट्ज बैंड में 25 मेगाहर्ट्ज स्पेक्ट्रम खरीदे थे, जिसके लिए कंपनी को यूसेज चार्जेस बतौर एजीआर चुकाना पड़ सकता है। इकोनॉमिक टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार के मुताबिक 2015 में निर्धारित ट्रेडिंग नियमों के अनुसार एयरवेव बेचने वाली कंपनी को स्पेक्ट्रम सौदे से पहले किसी भी देनदारियों का भुगतान करना जरूरी है। लेकिन सौदे के बाद में किसी देनदारी का पता चले तो दूरसंचार नियामक विक्रेता या खरीदार दोनों में से किसी से भी भुगतान करने के लिए कह सकता है।
यह भी पढ़ें - मुकाबले के बीच Airtel की तरफ से बयान, जरूरी है Vodafone का बचे रहना
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