नयी दिल्ली। सीमा विवाद होने के कारण भारत में चीनी सामानों के बहिष्कार की मांग बढ़ती जा रही है। लोगों की इस मांग के अलावा सरकार ने भी चीन के साथ कारोबारी मामलों को सीमित करना शुरू कर दिया। केंद्र सरकार ने चीनी कंपनियों को देश में निवेश करने से दूर रखने नियमों में बदलाव भी किए और चीनी कंपनियों को दिए गए कॉन्ट्रैक्ट भी रद्द किए गए। पर क्या आप जानते हैं कि चीन से भारत का कितना कारोबार है? चीन से क्या-क्या आयात किया जाता है और वो भी कितनी मात्रा में ये हम आपको बताएंगे।
कितना है चीन से कारोबार
पीटीआई की एक रिपोर्ट के अनुसार भारत के कुल आयात में 14 हिस्सा चीन का है। भारत में चीन से सबसे ज्यादा आने वाली चीजों में मोबाइल फोन, टेलीकॉम उपकरण, पावर, प्लास्टिक खिलौने और दवा सामग्री शामिल है। 2019-20 में भारत ने चीन से कम आया किया। इससे भारत का व्यापार घाटा भी घट कर 48.66 अरब डॉलर रह गया। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार 2019-20 में चीन को भारत ने कुल 16.6 अरब डॉलर का सामाना भेजा, जबकि 65.26 अरब डॉलर की वस्तुओं का आयात किया। इससे पहले 2017-18 में भारत के चीन के साथ व्यापार घाटा 63 अरब डॉलर और 2018-19 में 53.56 अरब डॉलर का रहा।
2019-20 में क्या-क्या आया चीन से
- केमिकल उत्पाद : 1.2 अरब डॉलर
- मेडिकल, ऑप्टिकल, फोटोग्राफी उपकरण : 1.34 अरब डॉलर
- लौह और स्टील वस्तुएं : 1.58 अरब डॉलर
- उर्वरक : 1.82 अरब डॉलर
- प्लास्टिक और संबंधित सामान : 2.71 अरब डॉलर
- ऑर्गेनिक केमिकल्स : 7.97 अरब डॉलर
- न्यूक्लियर रिएक्टर, बॉयलर और मशीनरी : 13.32 अरब डॉलर
- इलेक्ट्रिकल्स और इलेक्ट्रॉनिक्स : 19.1 अरब डॉलर
चीन से टक्कर ले सकता है भारत
देश के सबसे बड़े बैंक एसबीआई की एक रिपोर्ट के मुताबिक सर्विसेज के मामले में पक्के तौर पर रूप से चीन से टक्कर ले सकता है। असल में चीन के मुकाबले भारत कहीं ज्यादा बड़े पैमाने पर टेलीकम्युनिकेशंस, कंप्यूटर और इंफॉर्मेशन सर्विसेज का एक्सपोर्ट करता है। रिपोर्ट में उल्लेख किया गया कि सुरक्षा कारणों के मद्देनजर केंद्र सराकर ने चीन से संबंध रखने वाले 59 मोबाइल पर बैन लगा दिया, जो भारतीय टेक कंपनियों के लिए अवसर है।
चीन के निवेश प्रस्ताव
भारत सरकार अपनी नई स्क्रीनिंग पॉलिसी के तहत चीनी कंपनियों से जुड़े लगभग 50 निवेश प्रस्तावों पर विचार कर रही है। सरकार की तरफ से हरी झंडी दिखाए जाने के बाद ही इस कंपनियों को आगे बढ़ने की मंजूरी मिलेगी। अप्रैल में घोषित किए गए नए नियमों के तहत पड़ोसी देशों (जिनकी सीमा भारत से लगी है) में स्थित कंपनियों को यहां निवेश के लिए सरकार की मंजूरी जरूरी है। इंडस्ट्री अधिकारियों का कहना है कि दोनों देशों के द्विपक्षीय संबंधों में गिरावट पिछले महीने सीमा पर हुए टकराव के कारण आई है। इस टकराव के बाद मौजूदा 50 निवेश प्रस्तावों में और भी लंबा समय लग सकता है।
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