इस्लामाबाद/पेशावर। पाकिस्तान इस वक्त गेंहू और आटे के संकट से जूझ रहा है। इसके चलते पाकिस्तान में भुखमरी की स्थिति आ गई है। स्थिति से निपटने की वहां पाक सरकार ने तुरंत 3 लाख टन गेंहू के आयात को मंजूरी दे दी है। लेकिन पाकिस्तान सरकार के सामने पैसों का संकट भी इन दिनों बढ़ा हुआ है। पहले से लिए कर्ज की किस्त पटाने के लिए भी पैसों का संकट है। ऐसे में वहां की सरकार ने तय किया है कि 1,720 अरब रुपये के सर्कुलर ऋण के एक भाग को पटाने के लिए 200 अरब रुपये के इस्लामिक सुकूक बॉन्ड्स जारी किए जाएंगे।
पाकिस्तान के कई प्रांत में रोटी का संकट
पाकिस्तान में मंहगाई का असर अब रोटी तक पहुंच गया है। कई प्रांतों में आटे का संकट पैदा हो गया है। गेहूं की कमी के कारण कीमतों में 20 फीसदी तक की वृद्धि हो गई है। इसके चलते रोटी की कीमतों की नई लिस्ट जारी करने की मांग शुरू हो गई है, जिसको लेकर पेशावर में नान बनाने वाले हड़ताल पर चले हैं। खैबर पख्तूनख्वा इस संकट से सर्वाधिक प्रभावित है, और यहां कोई ढाई हजार तंदूर की दुकानें आटे की कमी के कारण बंद हो गई हैं। पाकिस्तानी मीडिया के अनुसार, पाकिस्तान के सीमांत प्रांत खैबर पख्तूनख्वा में नान बनाने वाली ढाई हजार से अधिक दुकानें या तो आटे की कमी के कारण या रोटी की कीमतें न बढ़ाने देने के सरकार के निर्णय के खिलाफ हड़ताल के कारण बंद हो गई हैं। पाकिस्तान में 20 किलोग्राम आटे की कीमत 1,100 रुपये के पार निकल गई है।
पाकिस्तान के प्रमुख न्यूज चैनल जियो न्यूज के अनुसार, दुकानदारों का कहना है कि आटे की कीमत बढ़ गई है, लेकिन सरकार उन्हें नान के दाम नहीं बढ़ाने दे रही है। इसके चलते उन्हें परेशानी हो रही है। जियो न्यूज ने पेशावर के नान एसोसिएशन के महासचिव अब्दुल मजीद कुरैशी के हवाले से कहा, "जब तक सरकार हमारी मांग नहीं मान लेती है, तब तक प्रदर्शन जारी रहेंगे।" कुरैशी ने कहा कि अफवाहें फैल रही हैं कि सरकार उनके खिलाफ कार्रवाई शुरू करने की योजना बना रही है। उन्होंने स्पष्ट किया, "सरकार ने हमें बेरोजगार बना दिया है और कोई भी कार्रवाई हमें हमारे कानूनी अधिकारों की मांग करने से नहीं रोक सकती है।"
एसोसिएशन के महासचिव ने दावा किया कि जिला प्रशासन ने नान बनाने वालों से अपने व्यवसाय खोलने के लिए कहा और कथित तौर पर उन्हें आश्वासन दिया कि 10 रुपये में 100 ग्राम की रोटी बेचने पर उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाएगी। कुरैशी ने आगे कहा, "आश्चर्य की बात है कि जब हमने पेशावर जिला प्रशासन से 10 रुपये में 115-ग्राम नान (रोटी) की अधिसूचना जारी करने की मांग की तो उन्होंने इस बात के लिए इनकार कर दिया।" पाकिस्तान सरकार को कुरैशी ने चेताते हुए कहा कि अगर सरकार ने उनकी मांगें नहीं मानीं तो उनकी हड़ताल पूरे प्रांत में फैल जाएगी।
पाकिस्तान तत्काल करेगा 3 लाख टन गेंहू आयात
गेंहू संकट के बीच सरकार ने आसमान छूती कीमतों पर लगाम लगाने के लिए 3 लाख टन गेंहू आयात करने को मंजूरी दे दी है। गेंहू के इस आयात पर कोई शुल्क नहीं लगाया जाएगा। डॉन न्यूज के अनुसार, यह निर्णय मंत्रिमंडल की आर्थिक समन्वय समिति (ईसीसी) की सोमवार को हुई एक बैठक में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता प्रधानमंत्री के वित्त एवं वाणिज्य मामलों के सलाहकार डॉ. अब्दुल हफीज शेख ने की। बैठक में विभाग को अब अनुमानित 1,720 अरब रुपये के सर्कुलर ऋण के एक भाग को चुकाने के लिए 200 अरब रुपये के इस्लामिक सुकूक बॉन्ड्स जारी करने का भी निर्णय लिया गया।
रपट में विश्वस्त सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा एवं अनुसंधान मंत्रालय ने ईसीसी बैठक में कहा कि सरकार के पास अभी 42 लाख टन गेंहू का भंडारण है, जिससे दो महीने तक घरेलू खपत हो सकती है। वहीं नई फसल भी मार्च के मध्य तक बाजार में आने लगती है।
इस संकट के पीछे एक कारण यह है कि पिछले साल इस समय गेंहू का भंडारण 70 लाख टन था, वहीं इस वर्ष सिर्फ 42 लाख टन बचा है। लेकिन इससे भी ज्यादा महत्वपूर्ण बात यह है कि मांग और आपूर्ति में अंतर और घरेलू तथा अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में इसकी कीमतों में भारी अंतर के कारण जमाखोरों, कालाबाजारी करने वालों और कमोडिटी तस्करों को कमाई करने का अवसर मिल गया है। इसके अलावा दो और कारण हैं, जिनके चलते पाकिस्तान गेंहू संकट का सामना कर रहा है। पहला यह कि सिंध सरकार ने अंतरप्रांतीय खाद्य समिति और ईसीसी द्वारा तय लक्ष्य से 35 प्रतिशत कम खरीदारी की थी। दूसरा कारण संचार मंत्रालय के अंतर्गत एजेंसियों द्वारा शुल्क बढ़ाए जाने के बाद हड़तालें हो गईं और गेंहू का सामान्य वितरण प्रभावित हो गया।
जरूरत 4 लाख टन गेंहू की बताई जा रही
सूत्रों के अनुसार, राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मंत्री खुसरो बख्तियार ने 4,00,000 टन गेंहू आयात करने पर जोर दिया। पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ के वरिष्ठ नेता जहांगीर तरीन ने पहले ही चार लाख टन गेंहू आयात करने की घोषणा की थी। लेकिन डॉ. हफीज ने तीन लाख टन आयात को पर्याप्त समझा। इस बीच, देश के राष्ट्रपति आरिफ अलवी ने सोमवार को देश में मौजूदा गेंहू संकट से अनभिज्ञता जाहिर कर आम आदमी के जले पर नमक छिड़क दिया। सोशल मीडिया पर उपलब्ध एक वीडियो क्लिप में गेंहू की कमी से संबंधित एक प्रश्न के जवाब में उन्होंने कहा, "यह मेरे संज्ञान में नहीं है, लेकिन मुझे इसकी जानकारी होनी चाहिए।"
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