नयी दिल्ली। भारत और चीन के बीच सीमा पर हुई झड़प ने दोनों देशों के व्यापार संबंधों पर भी असर डाला है। भारत ने चीन को कारोबारी झटके देने शुरू कर दिए हैं। इनमें रेलवे और टेलीकॉम सेक्टर में चीनी कंपनियों के साथ कारोबार रोकने से शुरुआत कर दी गई है। वैसे चीन के साथ भारत किस हद कारोबार बंद कर सकता है ये अंदाजा लगाना मुश्किल है। दरअसल चीन ने भारत में कई सेक्टरों में अपने पैर फैला रखे हैं, जिनमें इन्फ्रास्ट्रक्चर, भौतिक सामान और हाई-टेक जैसे अहम सेक्टर शामिल हैं। आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार पिछले छह सालों में दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार में 20 फीसदी की वृद्धि हुई है। विशेषज्ञों की मानें तो इस वृद्धि से भारत के स्थानीय उद्योग को झटका भी लगा है।
किन कंपनियों में है चीन का निवेश
चीनी कंपनियों ने देश की कुछ सबसे प्रतिष्ठित तकनीकी ब्रांड्स में भारी निवेश किया है, जिनमें राइड सर्विस ओला, फिनटेक कंपनी पेटीएम, फूड-डिलीवरी ऐप जोमैटो और ई-कॉमर्स प्लेटफॉर्म फ्लिपकार्ट शामिल हैं। भारत में चीनी निवेश कितना बड़ा है और दोनों देश किस चीज में व्यापार करते हैं? इन दो बातों के जवाबों से पता चलता है कि दोनों देशों के बीच द्विपक्षीय व्यापार ने पिछले तीन सालों में औसतन दो अंकों में बढ़ोतरी हासिल की है। मगर इसका ज्यादातर लाभ चीन को हुआ। आइये जानते हैं दोनों के बीच हुए कारोबार के फाइनेंशियल आंकड़े क्या कहते हैं।
कितना हुआ दोनों देशों में कारोबार
वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों के अनुसार चीन के साथ भारत का द्विपक्षीय व्यापार 2019 में लगभग 80 बिलियन डॉलर था। भारत के बीजिंग दूतावास की वेबसाइट पर पोस्ट किए गए डेटा के मुताबिक 2019 में जनवरी और नवंबर के बीच 84.3 बिलियन डॉलर का कुल द्विपक्षीय व्यापार हुआ, जो उससे पिछले वर्ष के 95.7 अरब डॉलर से लगभग 3.2 फीसदी की गिरावट को दर्शाता है। चीन भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक साझेदार है। लेकिन भारत चीन के साथ बड़े व्यापार घाटे में चलता है। इसका मतलब यह है कि भारत चीन को सामान बेचने के मुकाबले उससे कहीं अधिक सामान खरीदता है। भारत के कुल आयात में औसतन 16 फीसदी चीन से होता है। दूसरी तरफ भारत के कुल निर्यात में चीन का हिस्सा सिर्फ 3.2 फीसदी है। इसलिए यह साफ है कि व्यापार असंतुलन काफी अधिक है और भारत नुकसान में है।
इन चीजों का होता है आयात-निर्यात
भारत चीन को कपास, यार्न, कार्बनिक रसायन, अयस्क, प्राकृतिक मोती, कीमती पत्थर और कपड़ों सहित प्राथमिक वस्तुएं निर्यात करता है। जबकि भारत में चीन से इलेक्ट्रिक मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक उपकरण, परमाणु रिएक्टर, बॉयलर, सौर ऊर्जा घटक और एपीआई (सक्रिय दवा सामग्री) आते हैं, जो भारत के फार्मा उद्योग की रीढ़ हैं। जानकार कहते हैं कि भारत में अब बहुत सारी चीनी चीजें स्कैनर के तहत आने की संभावना है, हालांकि सामानों के व्यापार पर रातोंरात प्रभाव पड़ने की संभावना नहीं दिखती। फार्मा सेक्टर चीनी एपीआई पर निर्भर है। जरूरी मेडिकल सामान में से लगभग 90 फीसदी आयात किया जाता है। जानकार कहते हैं कि इसका एक उपाय देश में फार्मा सेक्टर की क्षमता को बढ़ाना है।
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