नयी दिल्ली। पिछले कुछ महीनों से संकट से गुजर रहे प्राइवेट सेक्टर के यस बैंक ने जनवरी-मार्च तिमाही के लिए चौंकाने वाले वित्तीय नतीजे पेश किये हैं। बैंक ने इस तिमाही में हैरान करते हुए 2629 करोड़ रुपये का मुनाफा कमाया है, जबकि पिछले साल की इसी तिमाही यस बैंक 1507 करोड़ रुपये के घाटे में रहा था। यस बैंक को ये मुनाफा अतिरिक्त टियर-1 बॉन्ड के राइट-ऑफ से हुई विशेष इनकम से हुआ है। यानी बैंक का यह मुनाफा बेहतर प्रर्दशन से नहीं राहत योजना के तहत मिलने वाली सहायता के कारण हुआ है। राहत योजना के तहत बैंक को अपने 6,296.94 करोड़ रुपये के एडिशनल टियर-1 बॉन्ड निवेश को राइट-ऑफ करने की छूट मिली। बैंक ने 8,415 करोड़ रुपये के बॉन्ड को राइट-डाउन करके ये इनकम हासिल की। अगर इस विशेष इनकम को हटा दें तो यस बैंक 3668 करोड़ रुपये के घाटे में रहा, जो पिछले साल इसी तिमाही में हुए 1507 करोड़ रुपये के घाटे के मुकाबले दोगुने से अधिक है।
एनपीए में आई कमी
हालांकि यस बैंक के एनपीए रेशियो में सुधार हुआ है। दिसंबर तिमाही में यस बैंक का ग्रॉस (सकल) एनपीए रेशियो 18.87 फीसदी था, जो मार्च तिमाही में 16.80 फीसदी रह गया। मगर पिछले साल की मार्च तिमाही में रहे 3.22 फीसदी के मुकाबले इसमें कई गुना बढ़ोतरी हुई है। वहीं यस बैंक शुद्ध एनपीए रेशियो दिसंबर तिमाही में 5.97 फीसदी रहा था, जो मार्च तिमाही में 5.03 फीसदी रह गया। मगर पिछले साल की मार्च तिमाही में 1.86 फीसदी के मुकाबले यह भी काफी बढ़ गया। इसके साथ ही बैंक के प्रोविजन (अचानक वाले खर्च) पिछले साल की तुलना में 3,662 करोड़ रुपये से बढ़ कर 4872 करोड़ रुपये के रहे।
डिपॉजिट और ब्याज आमदनी घटी
यस बैंक का पूंजी पर्याप्तता अनुपात (यह किसी बैंक की पूंजी के अनुपात का जोखिम है) एक साल पहले के 16.5 प्रतिशत की तुलना में गिर कर 8.5 प्रतिशत पर आ गया। वहीं बैंक के डिपॉजिट 53.7 फीसदी लुढ़क कर 1,05,364 करोड़ रुपये और एडवांस 29 फीसदी घट कर 171443 करोड़ रुपये के रह गए। यस बैंक की शुद्ध ब्याज आमदनी (एनआईआई) में भी अच्छी खासी कमी दर्ज की गई। बैंक की एनआईआई 49.16 फीसदी की गिरावट के साथ 1,274 करोड़ रुपये की रह गई। बैंक का शुद्ध ब्याज मार्जिन 3.1 फीसदी से घट कर 1.9 फीसदी रह गया। शुद्ध ब्याज मार्जिन बैंक की ब्याज इनकम और दिए गए ब्याज की राशि के बीच का अंतर होता है।
खस्ता है यस बैंक की हालत
यस बैंक की खस्ता हालत और इसमें आई फाइनेंशियल गड़बड़ियों के मद्देनजर 5 मार्च को आरबीआई ने यस बैंक के बोर्ड को हटा कर कई तरह की पाबंदिया लगा दी थीं। हालांकि पाबंदियां 18 मार्च को हटा ली गई और आरबीआई ने बोर्ड के सदस्यों के एक नए समूह को बैंक की जिम्मेदारी सौंपी। प्रशांत कुमार, एसबीआई के पूर्व चीफ फाइनेंशियल ऑफिसर और डिप्टी एमडी, को बैंक का नया एमडी और सीईओ नियुक्त किया गया। इतना ही नहीं यस बैंक को संकट से निकालने के लिए एसबीआई, एचडीएफसी, एक्सिस बैंक, आईसीआईसीआई बैंक, कोटक महिंद्रा बैंक, बंधन बैंक, फेडरल बैंक और आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने सामूहिक रूप से 10,000 करोड़ रुपये का निवेश किया।
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