भारतीय शेयर बाजार में पिछले एक हफ्ते से लगातार गिरावट जारी है। आज यानि 27 सितंबर को भी शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखी गई है। सेंसेक्स 424 अंको की गिरावट के साथ 31,175.07 अंक पर बंद हुआ। जबकि निफ्टी में 140 अंको की गिरावट के साथ 9, 731.65 अंक पर बंद हुआ। आइए देखते हैं आखिर शेयर बाजार किस कारण से लगातार गिर रहा है।
बाजार में कंसोलिडेश
लगातार तेजी के बाद अब भारतीय बाजारों में कंसोलिडेशन का दौर बनता नजर आ रहा है। निफ्टी के लिए 10000-10100 के आसपास कंसोलिडेशन बरकरार रह सकता है। जब तक कंपनियों के नतीजों को लेकर तस्वीर साफ नहीं हो जाती तब तक घरेलू बाजारों में ठहराव देखने को मिल सकता है। कम से कम 1-1.5 महीने की अवधि तक भारतीय बाजारों में कंसोलिडेशन का दौर चल सकता है।
रुपए में गिरावट
रुपए में लगातार गिरावट का असर भारतीय शेयर बाजारों पर पड़ा है। डॉलर के मुकाबले रुपए की कीमत 65 रुपए के पास पहुंच गई है। देश में डॉलर की डिमांड बढ़ने से रुपए में गिरावट देखी जा रही है।
उत्तर कोरिया और अमेरिका के बीच तनाव
हाल के कुछ महीनों में अमेरिका और उत्तर कोरिया के बीच तनाव जारी है, जिसके चलते शेयर बाजार थोड़ सहमा हुआ है। हाल ही में उत्तर कोरिया ने लगातार परमाणु परीक्षण किए और हाइड्रोजन बम का भी परीक्षण किया है, इसके अलावा जापान के उपर से दो बार मिसाइल परीक्षण किया गया है, वहीं अब अमेरिका ने उत्तर कोरिया के उपर अपने बमवर्षक विमान उड़ाए हैं जिससे दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया है। अगर युद्ध जैसी स्थिति बनती है तो भारत समेत दुनिया भर के शेयर बाजार में बड़ी गिरावट आ सकती है।
जीएसटी
जीएसटी को अर्थव्यवस्था में सुधार की दवा माना गया था लेकिन अभी तक इसके आशातीत परिणाम नहीं दिख रहे हैं। जीएसटी पोर्टल में सुधार का दबाव लगतार बना हुआ है। वहीं तमाम ट्रेडर्स अभी तक जीएसटी से नहीं जुड़ पाए हैं।
जीडीपी
जीडीपी पिछले तीन साल के सबसे निचले स्तर पर है, पिछले वित्तवर्ष में जहां जीडीपी 6.8 के करीब थी वहीं अब जीडीपी 5.8 तक पहुंच गई है। दुनिया भर की रेटिंग एजेंसियों ने नोटबंदी के बाद भारत की जीडीपी घटने का अनुमान लगाया है। HSBC ने भारत की जीडीपी 6.5 पर रखी है, जबकि इंडिया रेटिंग ने जीडीपी ग्रोथ को 6.7% पर रखा है वहीं एडीबी ने रेटिंग को 7.4 से घटा कर 7.0% कर दिया है।
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर
फॉरेन पोर्टफोलियो इन्वेस्टर भारतीय शेयरों की बिक्री कर रहे हैं । 22 सितंबर को, उन्होंने नगदी बाजारों में 1,241.73 करोड़ रुपए की बिकवाली की। 25 सितंबर को, उन्होंने 1,249.45 करोड़ रुपए के शेयरों को गिरा दिया। वास्तव में, 26 सितंबर को, उन्होंने एक बार फिर शुद्ध रूप से लगभग 2,000 करोड़ रुपए की कमाई को बहुत आक्रामक रूप से बेच दिया। इनमें से कुछ निवेशक इस बात को लेकर चिंतित हैं कि आर्थिक सुधार में बहुत समय लगेगा और कॉर्पोरेट परिणाम खराब होने की संभावना है। हिंदुस्तान यूनिलीवर ने हाल ही में चेतावनी दी थी कि जीएसटी और विमुद्रीकरण ग्रामीण बाजारों को जारी रखने के लिए जारी हैं। एलएंडटी के एएम नाइक ने चेतावनी दी कि आर्थिक सुधार में कम से कम दो साल लग सकते हैं।
अन्य देशों से तुलना
ब्राजील, रूस या फिलीपींस जैसे अन्य उभरते बाजारों की तुलना में, भारतीय बाजारों में बेहतर प्रदर्शन नहीं हुआ है। उदाहरण के लिए, ब्राज़ीलियाई बोवेस्पा 4.5 प्रतिशत ऊपर है, जबकि सेंसेक्स एक महीने के आधार पर लगभग 1 प्रतिशत नीचे है। फिलीपींस जैसे एक और उभरते हुए बाजार में पिछले एक महीने में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है। यहां तक कि विकसित बाजारों में अच्छी तरह से किया है। उदाहरण के लिए जर्मन डीएएक्स पिछले एक महीने में 4.5 प्रतिशत बढ़ा है। रूसी मयसेक्स ने भी पिछले एक महीने में अच्छा प्रदर्शन किया है और 4.5 प्रतिशत ऊपर है
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