यहां पर आपको टीडीएस डिडेक्शन के बारे में पूरी जानकारी देंगे। साथ ही आपको बताएंगे कि सैलरी से टीडीएस डिडेक्शन कैसे किया जाता है।
यदि आप एक वेतनभोगी कर्मचारी हैं तो आपको पता होगा कि आपके कंपनी से प्राप्त वास्तविक भुगतान कितना है और आपके कुल CTC से कितना TDS कटता है। साथ ही यह भी भ्रम रहता है कि जितना सीटीसी होता है वास्तविक सैलरी उतनी क्यों नहीं होती है?

यह जरुरी नहीं कि सैलरी से काटे गए टीडीएस की राशि हर बार सही ही हो। ऐसे कई उदाहरण हैं ऐसी कई परिस्थितियां होती हैं जब कई कारणों कि वजह से अतिरिक्त टीडीएस काट लिया जाता है।
यह या तो कंपनी की ओर से जरुरी दस्तावेज और निवेश समय पर न जमा कराने की वजह से हो सकती है या फिर कर्मचारी की ओर से इनकम टैक्स रिटर्न के आखिरी वक्त में क्लेम के वजह से हो सकता है।
बेशक आप अतिरिक्त TDS भुगतान वापस प्राप्त कर सकते हैं। हालांकि, इसे बेहतर ढंग से समझने के लिए हम आपको टीडीएस प्रक्रिया के बारे में संक्षेप में समझाएंगे।
टीडीएस (Tax Deduction At Source) जैसा कि नाम से पता चलता है कि इसका उद्देश्य आपकी आय से हाने वाली इनकम से टैक्स का संग्रह करना है। आपकी सैलरी से हर महीने आपकी कंपनी कुछ प्रतिशत टीडीएस काटती है।
इन करों की कटौती करने के बाद, सभी कर्मचारियों को वेतन प्राप्त होता है जिसके द्वारा नियोक्ता आरबीआई, एसबीआई या किसी अन्य अधिकृत बैंक की किसी भी शाखा में केंद्र सरकार के पक्ष में महीने के अंतिम दिन के 7 दिनों के भीतर कर्मचारियों के वेतन से जो टैक्स काटा गया है उसे क्रेडिट करेगा।
वित्तीय वर्ष के अंत में, प्रत्येक वेतनभोगी कर्मचारी (जिसके सैलरी से कटौती की गई है) कंपनी उसके लिए फॉर्म 16 जारी करती है। अब, आपका काम इस फॉर्म को भरना है जिसमें आपको अपना निवेश और खर्च दिखाना होता है और साथ ही जरुरी दस्तावेज भी दिखाना होता है।
यदि आपको लगता है कि आपका अतिरिक्त टीडीएस कट रहा है तो आपको कंपनी द्वारा जारी फॉर्म 16 भरना होगा और अपने रिटर्न दाखिल करके भुगतान किए गए अतिरिक्त टीडीएस का दावा करना होगा।
यदि आप समय पर रिटर्न फाइल कर देते हैं तो संभावना है कि आपको आपके पैसे रिफंड कर दिए जाएं। अगर कर वापसी में देरी हो जाती है, तो आप राशि पर 6% ब्याज के हकदार होंगे। ब्याज निर्धारण वर्ष के पहले महीने से अर्जित करना शुरू हो जाएगा।
हालांकि, यदि धनवापसी राशि वर्ष के दौरान देय कर के 10% से कम है तो कोई ब्याज देय नहीं होगा। यदि आप एक पैन कार्ड होल्डर हैं और आपको टीडीएस अमाउंट को लेकर कोई भ्रम है तो आप अपने टैक्स क्रेडिट स्टेटमेंट ऑनलाइन (फॉर्म 26 एएस) जांच कर सकते हैं।
टैक्स से जुड़ी परेशानियों से बचने के लिए समय पर अपना इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करें और सैलरी के हिसाब से अपना खर्च और निवेश की योजना बनाकर उसे दस्तावेज के साथ प्रूफ के तौर रिटर्न फाइल करते समय दर्शाएं।
इसके लिए आपको उन सभी कटौतीओं के बारे में अच्छी तरह से अवगत होना चाहिए जिनके लिए आप पात्र हैं, विभिन्न कर बचत मार्गों का अच्छी तरह से विश्लेषण करें और आखिरकार ऐसे निवेश करते समय एक सही निर्णय लें। आप ऐसे समय में उन लोगों की मदद ले सकते हैं जो आपको अपने निवेश की योजना बनाने में मदद करते हैं ताकि आप अधिकतम लाभ प्राप्त कर सकें और करों पर बचत कर सकें।
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