मार्च खत्म होने की कगार पर है, वित्त वर्ष (financial year) 3 दिनों में खत्म हो जाएगा। इसी के साथ वित्त वर्ष 2018-19 भी खत्म हो जाएगा।
नई दिल्ली: मार्च खत्म होने की कगार पर है, वित्त वर्ष (financial year) 3 दिनों में खत्म हो जाएगा। इसी के साथ वित्त वर्ष 2018-19 भी खत्म हो जाएगा। ऐसे में वित्तीय मोर्चे से जुड़े कुछ काम ऐसे हैं, जिन्हें मार्च महीना खत्म होने से पहले निपटा लेना जरूरी है। इसके पहले निवेशकों को कुछ दस्तावेज जुटा लेने चाहिए। इनमें कैपिटल गेंस, डिविडेंड या ब्याज के तौर पर की गई कमाई के दस्तावेज शामिल हैं। इस बात की जानकारी दें कि ये निवेशकों के लिए काफी अहम है वो अपनी विभिन्न स्रोतों से हुई आय की जानकारी जुटा लें। इससे रिटर्न फाइल करने के दौरान टैक्स देनदारी सुनिश्चित करने में मदद मिलती है। तो आज हम आपको इन महत्वपूर्ण दस्तावेजों (important documents) के बारे में बतायेंगे।

सिक्योरिटी स्टेटमेंट (security statement): निवेशकों को शेयरों और अन्य डीमैट प्रतिभूतियों का सालाना होल्डिंग स्टेटमेंट मिलता है। जी हां म्यूचुअल फंड निवेशक अपने निवेश के लिए एक कंसॉलिडेटेड होल्डिंग स्टेटमेंट प्राप्त करते हैं। शेयर्स की सिक्योरिटी और अन्य डिमेट सिक्योरिटीज के लिए भी निवेशक एनुअल होल्डिंग स्टेटमेंट प्राप्त करते हैं।
बैंक स्टेटमेंट्स (bank statement): निवेशक वर्ष के अंत में अपना बैंक स्टेटमेंट जुटा लें जिसमें प्राप्त हुई आय और निवेश की जानकारी शामिल रहती है। आपको जानकारी दें कि आप इसे ऑनलाइन भी प्राप्त कर सकते हैं या फिर बैंक जाकर इसकी फिजिकल कॉपी प्राप्त कर सकते हैं।
इंटरेस्ट सर्टिफिकेट (intrest cetificate): निवेशक की सभी जमाओं पर एक वित्त वर्ष के दौरान ब्याज भुगतान के संबंध में बैंक एक सर्टिफिकेट ऑफ इंटरेस्ट भी उपलब्ध करवाता है। जिसमें सेविंग अकाउंट के लिए बैंक इंटरेस्ट सर्टिफिकेट देता है। अगर ऐसा नहीं हुआ तो आप इसे बैंक स्टेटमेंट से प्राप्त किया जा सकता है।
कैपिटल स्टेटमेंट (capital statement): म्युचुअल फंड और ब्रोकर यूजर्स के आग्रह पर कैपिटल गेन स्टेटमेंट उपलब्ध करवाते हैं, जो कि एक वित्त वर्ष के दौरान हुए टोटल कैपिटल गेन और घाटे का निर्धारण करता है।
होम लोन इंटरेस्ट (home loan intrest) : होम लोन मामले में, बैंक एक सर्टिफिकेट उपलब्ध करवाता है, जिसमें एक वित्त वर्ष के दौरान हुए कुल रीपेमेंट का ब्यौरा होता है, जिसमें प्रिंसिपल और मिले ब्याज का ब्रेकअप होता है। इसका इस्तेमाल इनकम टैक्स डिडक्शन क्लेम करने के दौरान किया जाता है।
टीडीएस सर्टिफिकेट (TDS certificate) : ब्याज के 10,000 रुपये से ज्यादा होने पर बैंक इस पर TDS काटते हैं। वहीं काटे गए टैक्स के लिए बैंक से टीडीएस सर्टिफिकेट लिया जा सकता है। इससे वित्त वर्ष के अंत में टैक्स देनदारी का पता लगाने में मदद मिलती है।
ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट (transaction statement) : आपको इस बात से अवगत करा दें कि किसी तरह निवेशक सिक्योरिटी की बिक्री करता है या उसकी ट्रेडिंग करता है तो ट्रांजेक्शन स्टेटमेंट और अकाउंट स्टेटमेंट को जरूर प्राप्त किया जाना चाहिए जो कि एक वित्त वर्ष के लिए होता है।
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