राष्ट्रीय पेंशन योजना (NPS) के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय कर्मचारियों के लिए ग्रेच्युटी से जुड़े नियमों पर केंद्र सरकार ने नया स्पष्टीकरण जारी किया है। यह जानकारी उन लोगों के लिए बेहद जरूरी है, जो सरकारी सर्विस से रिटायर होने के बाद दोबारा किसी सरकारी पद पर नियुक्त होते हैं। लंबे समय से यह सवाल बना हुआ था कि ऐसी स्थिति में ग्रेच्युटी कैसे मिलेगी। अब सरकार ने इस पर स्थिति साफ कर दी है।

सरकार को क्यों देना पड़ा जवाब
एनपीएस से जुड़े ग्रेच्युटी नियमों को लेकर कई कर्मचारियों में भ्रम की स्थिति थी। कुछ मामलों में यह भी सामने आया कि एक ही कर्मचारी अलग-अलग सेवाओं के आधार पर दो बार ग्रेच्युटी का दावा कर रहे थे। इसी को देखते हुए पेंशन और पेंशनभोगी कल्याण विभाग ने नए दिशा-निर्देश जारी किए हैं, ताकि नियमों का एक समान पालन हो और किसी तरह की गलतफहमी न रहे।
किन लोगों को दूसरी बार ग्रेच्युटी नहीं मिलेगी
सरकार के अनुसार, अगर कोई कर्मचारी उम्र पूरी होने पर रिटायर हुआ है, खुद से सर्विस छोड़ी है या सेवा से हटाए जाने के बाद ग्रेच्युटी प्राप्त कर चुका है और बाद में फिर से सरकारी नौकरी करता है, तो उसे नए सर्विस समय के लिए अलग से ग्रेच्युटी नहीं दी जाएगी। यानी एक ही व्यक्ति को एक ही तरह की ग्रेच्युटी का दोहरा फायदा नहीं मिलेगा।
पूर्व सैनिकों के लिए राहत भरा फैसला
सेना से रिटायर होकर सिविल सर्विस में आने वाले जवानों के लिए सरकार ने साफ किया है कि उनकी सैन्य सेवा के दौरान मिली ग्रेच्युटी को सिविल नौकरी की ग्रेच्युटी से नहीं जोड़ा जाएगा। इसका मतलब है कि सिविल सेवा में तय समय तक काम करने के बाद उन्हें वहां की पूरी ग्रेच्युटी मिलेगी। यह फैसला पूर्व सैनिकों के हित में माना जा रहा है।
पीएसयू और स्वायत्त संस्थानों से आने वाले कर्मचारी
अगर कोई कर्मचारी पहले किसी सार्वजनिक क्षेत्र की कंपनी या सरकारी स्वायत्त संस्था में काम कर चुका है और फिर केंद्र सरकार में नियुक्त होता है, तो वह दोनों जगह की ग्रेच्युटी का हकदार होगा। हालांकि कुल राशि एक तय सीमा से ज्यादा नहीं होगी, ताकि नियमों का संतुलन बना रहे।
राज्य से केंद्र सरकार में आने वालों के लिए नियम
राज्य सरकार से केंद्र सरकार में आने वाले कर्मचारियों की सर्विस समय को जोड़कर ग्रेच्युटी तय की जाएगी। इसकी कैलकुलेशन अंतिम वेतन के आधार पर होगी, जिससे कर्मचारी को नुकसान न हो और उसे उसकी पूरी सेवा का सही फायदा मिल सके।
कर्मचारियों को क्या फायदा
विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्पष्टीकरण से कर्मचारियों को अपने रिटायरमेंट प्लान को बेहतर ढंग से समझने में मदद मिलेगी। साथ ही ग्रेच्युटी को लेकर होने वाले विवाद और कानूनी मामलों में भी कमी आएगी। यह कदम नियमों को ज्यादा साफ आसान और पारदर्शी बनाने की दिशा में अहम माना जा रहा है।
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