ITR Deadline Extended: इनकम टैक्स भरने वालों के लिए बड़ी खुशखबरी आई है। जो लोग अभी तक टैक्स नहीं भर पाएं हैं, उन्हें आयकर विभाग ने फिर से रिटर्न दाखिल करने का मौका दिया है। यानी इनकम टैक्स विभाग ने ऐसे लोग जो ऑडिट केसों में फंसे हुए थे या डेडलाइन को लेकर परेशान थे उन्हें राहत देते हुए रिटर्न दाखिल करने की समयसीमा (डेडलाइन) बढ़ा दी है।

इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने बुधवार, 29 अक्टूबर 2025 को सोशल मीडिया प्लैटफॉर्म एक्स पर जानकारी देते हुए बताया कि इनकम टैक्स रिटर्न (ITR) की ऑडिट रिपोर्ट फाइल करने की आखिरी तारीख बढ़ाकर 10 दिसंबर 2025 कर दी गई है। इसका सीधा मतलब यह है कि जिन टैक्सपेयर्स का ऑडिट जरूरी है, वे अब बिना पेनल्टी के अपनी रिटर्न फाइल कर सकते हैं।
CBDT ने क्या कहा
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट ने X पर बताया कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ डायरेक्ट टैक्सेज (CBDT) ने 31 अक्टूबर की पुरानी तारीख को बढ़ाकर 10 दिसंबर करने का फैसला लिया है। विभाग ने बताया है कि असेसमेंट ईयर 2025-26 के लिए जिन टैक्सपेयर्स को सेक्शन 139(1) के तहत रिटर्न फाइल करना होता है (जिनका ड्यू डेट पहले 31 अक्टूबर 2025 थी), उनके लिए अब ऑडिट रिपोर्ट दाखिल करने की ये तारीख बढ़ाकर 10 दिसंबर 2025 कर दी गई है।
पहले भी बढ़ाई गई थी आखिरी समयसीमा
इससे पहले कई बार डेडलाइन बढ़ाई जा चुकी है। पहले टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा करने की तय तारीख 30 सितंबर 2025 थी, लेकिन लोगों द्वारा तकनीकी गड़बड़ियों की शिकायत किए जाने के बाद टैक्स प्रोफेशनल्स और सीए संस्थानों की मांग पर इसे 31 अक्टूबर तक बढ़ाया गया था। हालांकि यह समस्या ठीक नहीं होने के चलते मांग बढ़ती गई और इस समयसीमा को पहले बढ़ाकर 10 नवंबर 2025 और अब 10 दिसंबर 2025 कर दिया गया है।
तय तारीख में टैक्स ऑडिट रिपोर्ट जमा नहीं करने पर क्या होगा?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के अनुसार, यदि कोई कंपनी या टैक्सपेयर समयसीमा के भीतर टैक्स ऑडिट रिपोर्ट नहीं जमा करता है, तो उस पर इनकम टैक्स एक्ट की धारा 271B के तहत कार्रवाई हो सकती है और पेनल्टी यानी जुर्माना लग सकता है।
किसे टैक्स ऑडिट कराना जरूरी है?
इनकम टैक्स डिपार्टमेंट के मुताबिक, यदि कंपनी का बिजनेस टर्नओवर एक फाइनेंशियल ईयर में 1 करोड़ रुपये से अधिक 10 करोड़ रुपये तक है जब कैश ट्रांजैक्शन कुल ट्रांजैक्शन का 5% से कम हो, तो उसे इनकम टैक्स ऑडिट करवाना जरूरी होता है। इसके अलावा, यदि किसी इंडिविजुअल यानी प्रोफेशनल्स (इम्प्लॉय, कंपनी का मालिक, सीईओ या अन्य) की सालाना इनकम 50 लाख से ज्यादा है तो उन्हें भी टैक्स ऑडिट करवाना जरूरी है।
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