ITR Reassessment: इनकम टैक्स ने टैक्सपेयर्स के लिए अघोषित आय बताने की डेडलाइन 31 अगस्त 2024 रखी है. अगर आपकी सालाना आय 50 लाख रुपये से ज्यादा है और इसके बारे इनकम टैक्स विभाग (Income Tax Department) को कोई जानकारी नहीं है, तो सेक्शन 148 के तहत आपको नोटिस मिल सकता है. चलिए जानते है कि अगर आपके पास यह नोटिस आता है, तो क्या करना चाहिए.

टैक्सपेयर्स को सेक्शन 148 के तहत तब नोटिस भेजा जाता है, जब टैक्सपेयर्स अपनी इनकम के बारे में पूरी जानकारी नहीं देते. यहां ध्यान देने वाली बात ये है कि टैक्सपेयर द्वारा छिपाई 50 लाख रुपये से ज्यादा है.
इनकम टैक्स रिटर्न फाइल करने की आखिरी तारीख 31 जुलाई थी. अगर कोई टैक्सपेयर आईटीआर फाइल करते वक्त गलती कर देता है, तो आयकर विभाग को यह अधिकार है कि वह उस टैक्सपेयर को नोटिस भेजें और उसके पुराने का आईटीआर का पुनर्मूल्यांकन करें.
इस बारे में मिली जानकारी के मुताबिक टैक्स विभाग ने असेसमेंट ईयर 2018-2019 और इसके बाद टैक्स भरने वालों को 31 अगस्त 2024 तक का समय दिया है. मतलब अगर किसी टैक्सपेयर ने अपनी पूरी इनकम के बारे टैक्स विभाग को नहीं बताया है, तो उसके पास 31 अगस्त 2024 तक का समय है.
नोटिस मिलने पर क्या करें?
अगर आपको सेक्शन 148ए के तहत नोटिस मिलता है, तो सबसे पहले यह चेक करें कि क्या ये दिए गए टाइम लिमिट के अंदर जारी किया गया है या नहीं. यह भी चेक करें कि यह नोटिस कहां से भेजा गया है. मतलब क्या ये नोटिस आपको लोकल असेसिंग ऑफिसर या NFAC से भेजा गया है या नहीं.
इसके अलावा इनकम टैक्स विभाग से अगर आपको कोई भी नोटिस आता है, तो उसका जल्द से जल्द जवाब देने की कोशिश करनी चाहिए. आप यह कोशिश करें की नोटिस का जवाब 7 से 30 दिनों के बीच दें पाएं.
अगर आपको ऐसा लगता है कि नोटिस गलत तरीके से भेजा गया है या ये नोटिस आपको नहीं आना चाहिए था, तो आप इनकम टैक्स को इस नोटिस का जवाब देते वक्त यह बात जरूर रखे. इसके साथ ही अपने सभी जरूरी दस्तावेज के साथ अपना जवाब अटैच करके सबमिट कर दें.
अगर नोटिस गलत है, तो आप जवाब में टैक्स विभाग से मामले को फिर से खोलने को कह सकते हैं.
बजट 2024 में बदला था नियम
बजट 2024 से पहले सेक्शन 148 में समय सीमा 10 साल की थी. मतलब असेसमेंट ईयर से लेकर 10 साल तक यानी 2029 तक आयकर विभाग के पास ऐसे टैक्सपेयर्स के खिलाफ कार्यवाही करने का समय था, जो अपनी आय के बारे में पूरी जानकारी नहीं देते.
या फिर यह भी कह सकते है कि असेसमेंट ईयर 2018-19 या उसके बाद के सालों में अगर किसी टैक्सपेयर की आघोषित आय 50 लाख से ज्यादा है तो टैक्सपेयर्स को धारा 148ए और 148 के तहत नोटिस भेजा जा सकता है.
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