Govt Scheme: लड़कियों और महिलाओं के लिए केंद्र सरकार हो या राज्य सरकारें कई तरह की स्कीम्स चला रही है। देश की बेटियों को आर्थिक और समाजिक रूप से सशक्त बनाने के लिए सरकारें कई योजनाएं चला रही हैं। इनमें केंद्र की सुकन्या समृद्धि योजना काफी लोकप्रिय है, तो राज्यों की भी अपनी पहल हैं। इस दिशा में बेटियों के लिए उत्तराखंड सरकार भी एक ऐसी योजना चला रही है जिसके तहत उन्हें 62000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जा रही है।

बेटियों के लिए चलाई जा रही उत्तराखंड सरकार की इस महत्वपूर्ण योजना का नाम 'नंदा गौरा योजना' (Nanda Gaura Scheme) है। इस योजना का मुख्य उद्देश्य केंद्र सरकार के 'बेटी पढ़ाओ, बेटी बचाओ' के नारे को साकार करना है।
यह योजना गरीब परिवारों की बेटियों को आर्थिक सहायता प्रदान करती है, जिससे मां और बेटी दोनों को लाभ मिलता है। इसके तहत बेटी के जन्म से लेकर 12वीं कक्षा पास करने तक, उत्तराखंड सरकार विभिन्न चरणों में वित्तीय मदद मुहैया कराती है।
जन्म से लेकर 12वीं कक्षा तक मिलती है आर्थिक सहायता
नंदा गौरा योजना के अंतर्गत कुल 62,000 रुपये की आर्थिक सहायता दी जाती है। बेटी के जन्म पर 11,000 रुपये की पहली किश्त मां-बेटी के संयुक्त खाते में जमा की जाती है। यह राशि बच्ची के जन्म के बाद योजना में पंजीकरण के बाद मिलती है।
इसके बाद, जब बेटी 12वीं कक्षा उत्तीर्ण करती है, तब उसके खाते में 51,000 रुपये की दूसरी किश्त ट्रांसफर की जाती है। इस प्रकार, यह योजना दो चरणों में वित्तीय सहायता प्रदान करती है, जिससे बेटियों की शिक्षा और भविष्य सुरक्षित होता है।
नंदा गौरा योजना के कई महत्वपूर्ण उद्देश्य हैं, जिनमें बेटियों की भ्रूण हत्या को रोकना और बाल विवाह पर अंकुश लगाना शामिल है। इसका लक्ष्य लड़कियों को शिक्षित और सशक्त बनाना भी है, ताकि समाज में लैंगिक असमानता को कम किया जा सके।
यह योजना लड़कियों को आर्थिक सुरक्षा भी प्रदान करती है, जिससे वे उच्च शिक्षा प्राप्त कर सकें और आत्मनिर्भर बन सकें। यह समाज में बेटियों के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने का एक प्रभावी माध्यम है।
किन्हें मिलता है योजना का लाभ?
नंदा गौरा योजना का लाभ केवल उत्तराखंड की स्थायी निवासी बालिकाओं को ही मिल सकता है। एक परिवार में अधिकतम दो बेटियों को इस योजना का फायदा मिलता है। पहली किश्त के लिए, बेटी के जन्म के 6 महीने के भीतर पंजीकरण कराना अनिवार्य है।
बेटी का जन्म सरकारी, निजी अस्पताल या एएनएम सेंटर में होना चाहिए। यदि जन्म राज्य के बाहर हुआ है, तो जन्म प्रमाण पत्र संलग्न करना आवश्यक है। घर पर दाई द्वारा कराए गए जन्म को मान्य नहीं माना जाएगा।
दूसरे चरण के आवेदन के लिए हर वित्तीय वर्ष में 30 नवंबर अंतिम तिथि निर्धारित की गई है। योजना का लाभ उन्हीं परिवारों को मिलता है जिनकी वार्षिक आय 72,000 रुपये (6,000 रुपये प्रति माह) से अधिक नहीं है। तहसीलदार द्वारा जारी आय प्रमाण पत्र ही मान्य होता है।
लाभ लेने के लिए कैसे और कहां करें अप्लाई
इस योजना के लिए आवेदन केवल आधिकारिक वेबसाइट https://www.nandagaurauk.in/ के माध्यम से ही किया जा सकता है। आवेदन के लिए बच्ची का नाम, आधार कार्ड, अभिभावकों का नाम और आधार कार्ड जैसे दस्तावेज आवश्यक होते हैं। ऑफलाइन आवेदन स्वीकार नहीं किए जाते हैं।
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