नई दिल्ली, अगस्त 19। बैंक लॉकर को लेकर रिजर्व बैंक ने नियम में बदलाव कर दिया है। अभी तक बैंक लॉकर में अगर चोरी हो जाए या अन्य किसी तरह से नुकसान हो जाए, तो बैंक उसकी भरपाई नहीं करते थे। लेकिन रिजर्व बैंक का कहना है कि अब ऐसा नहीं चलेगा। अगर बैंक या बैंक कर्मचारी की गलती से बैंक लॉकर ग्राहक का नुकसान होता है, तो बैंक जिम्मेदार माना जाएगा और उसकी भरपाई करनी होगी। देश में ऐसा नियम पहली बार आया है। बैंक लॉकर में आमतौर पर लोग अपना सबसे जरूरी और कीमती सामान ही रखते हैं। ऐसे में बैंकों पर यह नियम लागू करने से बैंक लॉकरों की सुरक्षा के लिए और जिम्मेदार बनेंगे और ग्राहकों का ज्यादा ध्यान भी रखेंगे। बैंक लॉकर के बारे में संशोधित दिशानिर्देश 1 जनवरी 2022 से लागू किए जाएंगे।
जानिए बैंक लॉकर को लेकर नया नियम
रिजर्व बैंक (आरबीआई) के अनुसार अब हर बैंक के बोर्ड को ऐसे नियम बनाने होंगे, जिसमें लापरवाही की वजह से बैंक लॉकर में रखे सामान को लेकर उनकी जिम्मेदारी तय की जा सके। आरबीआई ने कहा है कि प्राकृतिक आपदा या भूकंप, बाढ़, आकाशीय बिजली या आंधी-तूफान की स्थिति में बैंक को नुकसान के लिए जिम्मेदार नहीं माना जाएगा। लेकिन यह छूट तभी मिलेगी जब बैंक अपनी लॉकर वाली शाखाओं में इन प्राकृतिक आपदाओं से बचाव के पूरे इंतजाम हों। आरबीआई ने अपने निर्देश में यह भी कहा गया है कि आग, चोरी, डकैती या सेंधमारी जैसी घटना होती है तो बैंक अपनी जिम्मेदारी से बच नहीं सकता है।
जानिए कितना तक मिल सकता है हर्जाना
अगर आग, चोरी, डकैती या सेंधमारी जैसी घटना से लॉकर लेने वाले ग्राहक का नुकसान होता है तो ऐसी स्थिति में बैंक को लॉकर के किराए का 100 गुना तक हर्जाना देना पड़ सकता है। वहीं आरबीआई ने कहा है कि बैंक लॉकर को लेकर अपने करार में एक और प्रावधान जोडेंगे, जिसके तहत ग्राहक को यह आश्वान देना होगा कि वह अपने लॉकर में कोई गैरकानूनी या खतरनाक सामान नहीं रखेगा।
खाली लॉकरों की देनी होगी जानकारी
आरबीआई ने कहा है कि अब बैंकों को अपनी सभी शाखाओं में खाली लॉकरों की सूची तैयार कर इसकी जानकारी ग्राहकों केा देनी होगी। इसके अलावा बैंकों यह सूची अपने कंप्यूटर सिस्टम में भी डालनी होगी। ऐसा होने से लॉकरों के आवंटन में पारदर्शिता आएगी। वहीं अगर ज्यादा लोग आवेदन करते हैं तो बैंकों को लॉकर आवंटन के लिए एक वेटिंग लिस्ट भी तैयार करनी होगी। बैंक लॉकर के बारे में संशोधित दिशानिर्देश 1 जनवरी 2022 से लागू किए जाएंगे।
जानिए बैंक लॉकर में नॉमिनी को लेकर नियम
बैंक लॉकर लेते समय नॉमिनी कराने का ऑप्शन दिया जाता है। जब लॉकर लेने वाले व्यक्ति की मृत्यु हो जाती है, तो बैंक लॉकर में रखा सामान उसके उत्तराधिकारी को लेने का मौका देते हैं। आरबीआई के नियमों के अनुसार अगर बैंक में लॉकर लेते समय नॉमिनी बनाया गया है, तो बैंक लॉकर लेने वाली की मौत के बाद उस नॉमिनी को लॉकर इस्तेमाल करने का अधिकार मिलता है। ऐसी स्थिति तें नॉमिनी चाहे तो बैंक लॉकर को जारी रख सकता है या फिर उसे खाली कर सकता है। वहीं अगर लॉकर लेते वक्त संयुक्त नाम रखा गया है, तो लॉकर पर संयुक्त नाम वाले का कह होगा। इसलिए लॉकर लेते वक्त संयुक्त नाम और नॉमिनी के विकल्पों का सही तरीके से इस्तेमाल करना चाहिए।
अगर नहीं है कोई नॉमिनी
वहीं अगर बैंक लॉकर लेने वाले ने लॉकर लेते वक्त किसी को नॉमिनी नियुक्त नहीं किया है, तो बैंक कानून की कई धाराओं के तहत फैसला लेते हैं।
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