RBI Holds Repo Rate: भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) की मौद्रिक नीति समिति (MPC) की 6 फरवरी 2026 को हुई महत्वपूर्ण बैठक के बाद वित्तीय बाजार में हलचल तेज हो गई है। गवर्नर शक्तिकांत दास के नेतृत्व में लिए गए फैसले के अनुसार, इस बार रेपो रेट को 5.25 प्रतिशत पर ही स्थिर रखा गया है।

गौरतलब है कि दिसंबर 2025 में दरों में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती कर राहत दी गई थी, लेकिन इस बार केंद्रीय बैंक ने 'वेट एंड वॉच' की नीति अपनाई है। हालांकि, आरबीआई के इस फैसले के तुरंत बाद निजी क्षेत्र के दिग्गज HDFC बैंक ने अपने स्तर पर ब्याज दरों (MCLR) में कटौती कर लोन लेने वालों को बड़ी राहत दी है। बैंक का यह कदम सीधे तौर पर उन ग्राहकों की ईएमआई (EMI) को प्रभावित करेगा जिनका कर्ज लंबी अवधि से जुड़ा हुआ है।
HDFC बैंक का फैसला, 3 साल की MCLR में मिली राहत
आरबीआई द्वारा रेपो रेट में कोई बदलाव न करने के बावजूद HDFC बैंक ने अपनी 3 साल की अवधि वाली 'मार्जिनल कॉस्ट ऑफ फंड्स बेस्ड लेंडिंग रेट' (MCLR) में 5 बेसिस प्वाइंट की कमी करने का निर्णय लिया है।
पुरानी दर: 8.55%
नई दर: 8.50%
यह कटौती भले ही छोटी लग सकती है, लेकिन होम लोन या अन्य बड़े कर्जों के लिए, जो लंबी अवधि के रिसेट पीरियड से जुड़े होते हैं, यह ग्राहकों के लिए बचत का अवसर लेकर आई है।
MCLR की मौजूदा दरें, एक नजर में
बैंक ने 3 साल की अवधि को छोड़कर अन्य सभी अवधियों के लिए ब्याज दरों को यथावत रखा है। वर्तमान में लागू दरें इस प्रकार हैं:
| अवधि (Tenure) | वर्तमान ब्याज दर (MCLR) | |
|---|---|---|
1 | ओवरनाइट (Overnight) | 8.25% |
2 | 1 महीना | 8.25% |
3 | 3 महीने | 8.30% |
4 | 6 महीने | 8.40% |
5 | 1 साल | 8.40% |
6 | 2 साल | 8.50% |
7 | 3 साल | 8.50% (5bps कम) |
बेस रेट और PLR की स्थिति
एचडीएफसी बैंक ने जानकारी दी है कि उसका बेस रेट वर्तमान में 8.80 प्रतिशत पर बना हुआ है, जो 26 दिसंबर 2025 से प्रभावी है। इसके अतिरिक्त, बेंचमार्क प्राइम लेंडिंग रेट (PLR) भी 17.30 प्रतिशत प्रति वर्ष की दर पर स्थिर है। इन दरों में फिलहाल कोई नया बदलाव नहीं किया गया है।
आम आदमी पर क्या होगा असर?
MCLR (MCLR) वह न्यूनतम दर होती है जिसके आधार पर बैंक अपने कर्ज की ब्याज दर तय करते हैं। आमतौर पर होम लोन, कार लोन और पर्सनल लोन इसी दर से लिंक होते हैं। जब बैंक अपनी MCLR घटाता है, तो नया लोन लेने वाले ग्राहकों के साथ-साथ उन पुराने ग्राहकों को भी फायदा मिलता है जिनका लोन 'रिसेट पीरियड' के करीब होता है। दर में 0.05% की यह मामूली गिरावट भी लंबी अवधि के होम लोन पर हजारों रुपये की बचत करा सकती है।
दिसंबर 2025 में कितनी हुई थी कटौती
याद रहे कि दिसंबर 2025 में रिजर्व बैंक ने रेपो रेट में 25 बेसिस प्वाइंट की कटौती की थी, जिससे लोन सस्ते होने का सिलसिला शुरू हुआ था। इस बार रेपो रेट स्थिर रहने के बाद भी बैंक द्वारा अपनी ओर से ब्याज दरें घटाना प्रतिस्पर्धी बाजार में ग्राहकों को अपनी ओर खींचने की एक रणनीति के रूप में देखा जा रहा है।
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