दुनियाभर में मारवाडि़यों का बिजनेस पूरे देश में प्रचलित और प्रसिद्ध है। मारवाडि़यों का बिजनेस करने का तरीका, बिजनेस के प्रति उनका लगाव लोगों को प्रोत्साहित करता है। उनका बिजनेस आज से नहीं बल्कि कई पीढि़यों से चल रहा है। थॉमस ए टिमबर्ग की पुस्तक, द मारवाड़ी के अनुसार जगत सेठ से लेकर बिरला तक, मारवाड़ी बिजनेसमैन के सात रहस्य हैं जो अभी भी लागू होते हैं और शायद आगे भी रहेंगे। यहां पर आपको बताएंगे मारवाडि़यों के बिजनेस करने के तरीकों के बारे में जो की उन्हें पूरे दुनिया में प्रसिद्धि दिलाता है।
पैसे को देखना
मारवाड़ी बिजनेस फर्म्स और बिजनेस ग्रुप्स की 2 मुख्य विशेषताएँ होती हैं - पैसे का सही प्रबंधन करते हुये लंबे समय के अनुसार सही तरह से निवेश करना और जिस एंटरप्राइज में शेयर है उसकी वित्तीय स्थिति पर नजर बनाए रखना। शायद हर्ष गोनेका और कुमार मंगलम बिड़ला की बिजनेस स्टाइल में यही बदलाव है जहां ये वर्तमान समय में वित्तीय गतिविधियों पर नजर रखते हैं।
लीडरशिप के साथ मॉनिटर भी करते हैं
सफल बिजनेस के लिए यह जानना जरूरी है कि प्रतिनिधित्व कैसे करें, नहीं तो आर्थिक गतिविधियां कम हो जाएंगी। उन्हें ये भी सीखना पड़ता है कि बीच में हस्तक्षेप कब करना है? पूरी तरह ध्यान रखना होता है कि हस्तक्षेप करना भारी तो नहीं पड़ रहा है। एक असंतुष्ट इंप्लाई को इधर-उधर घुमाने से अच्छा है कि उसे हटा दिया जाए। तो वहीं निष्प्रभावी अधिकारियों और परिवार के सदस्यों को ऐसे पद सौंपे जो कि ज्यादा लाभकारी न हों।
प्लान बनाएं लेकिन स्टाइल और सिस्टमैटिक तरीके से
अगर कोई नया व्यक्ति आपकी कंपनी और व्यापार के साथ जुड़ता है। तो स्वाभाभिक है कि उसके अपने अलग विचार और आइडिया होंगे। वह व्यापार को बढ़ाने के लिए नए-नए प्लान भी बनाएगा, लेकिन उसे यह ध्यान देना होगा कि प्लान स्मार्ट और सिस्टमैटिक हो।
विस्तार करें लेकिन सिस्टम की ग्रोथ न रुके
एक सफल व्यवसायी की विशेषता है कि वह बिजनेस को बढ़ाए। लेकिन विस्तार ऐसा हो कि सिस्टम की ग्रोथ हो ना कि ग्रोथ कम हो जाए। हर किसी के बिजनेस स्टेटमेंट में यह होता है लेकिन कुछ लोग ही ऐसा कर पाते हैं।
सही कॉर्पोरेट कल्चर
फर्म या समूह का स्टाइल बाजार के अनुसार फायदेमंद होना चाहिए। बदलाव के बीच सही संतुलन बिठाये रखना एक मुश्किल काम है। एक फर्म में कॉर्पोरेट कल्चर लोगों को प्रेरित करने के लिए जरूरी है, खास तौर पर मैनेजर्स के लिए। फाइनेंशियल इन्सेंटिव कई बार फायदा पहुंचा सकता है जब कि कई बार विपरीत भी हो सकता है।
अपनी सनक में ना रहें
आधे से ज्यादा मैनेजमेंट की सनक 6 महीने से ज्यादा नहीं रहती है इसलिए अपनी सनक में न रहें दूसरों की भी सुनें। कई बिजनेस स्कूल्स के प्रोफेसर्स ऐसे कई सिद्धान्त देते हैं जो सफलता की कोई जिम्मेदारी नहीं लेते हैं। एक जिम्मेदार मैनेजर को ज्यादा अस्थाई और प्रयोगधर्मी होना चाहिए। हर कोई जानता है कि हर सवाल के 2 पहलू होते हैं, लेकिन मुख्य समस्या सही समय पर सही निर्णय लेना है।
अवसर को न गवाएं
कुछ बिजनेसमैन अपने आपको "नॉलेज बिजनेसमैन' बताते हैं। वैसे तो लगभग सभी। दुनियाभर में कई सफल पारिवारिक बिजनेस हैं लेकिन कई ऐसे भी हैं जो कि असफल हो गए हैं और इसकी वजह है उन्होंने सही अवसर को गंवा दिया है।


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