यहां पर आपको बताएंगे कि आप ऑनलाइन इनकम टैक्स रिफंड कैसे चेक कर सकते हैं।
आप जिस हिसाब से इनकम टैक्स Declaration करते हैं ठीक उसी हिसाब से इनकम टैक्स सैलरी से कट जाता है। कई बार डिक्लेरेशन से ज्यादा जमा किया हुआ पैसा रिफंड के जरिए वापस मिल जाता है। इस रिफंड यानी कि वापस मिलने वाले पैसों की ऑनलाइन जांच की जा सकती है। यहां पर आपको बताएंगे कि कैसे आप ऑनलाइन रिफंड और डिक्लेरेशन को देख सकते हैं।
ऐसे करें चेक
कई लोगों को यह नहीं पता है कि रिफंड का स्टेटस ऑनलाइन भी चेक किया जा सकता है। आप https://tin.tin.nsdl.com/oltas/refundstatuslogin.html पर जाकर स्टेटस चेक कर सकते हैं। इस लिंक पर जाकर बताई गई जगह पर अपना पैन नंबर और अससेमेंट ईयर डालें और उसके बाद सबमिट पर क्लिक करें। इसके अलावा refunds@incometaxindia.gov.in पर ईमेल करके ऑनलाइन जानकारी प्राप्त की जा सकती है। रिफंड रिकॉर्ड में किसी भी तरह के फेरबदल आदि की जानकारी के लिए सीपीसी बैंगलुरू के टोल फ्री नंबरों 18004252229 और 0804356700 पर कॉल कर सकते हैं।
रिफंड की प्रकिया
RTGS/NECS के द्वारा करदाता के बैंक खाते में सीधे रिफंड पैसा जमा हो जाता है। जिसके लिए आपको अपना बैंक अकाउंट नंबर देना होता है। साथ ही MICR कोड जरुरी है। तो वहीं अगर आपने बैंक खाता अपने पैन नंबर से लिंक नहीं करवाया है तो आपके पास रिफंड चेक के जरिए आएगा। चेक आपके बताए गए पते पर भेजा जाएगा।
निवेश करें टैक्स कटौती में होगी बचत
अगर आप जॉब करते हैं तो आप के पास आपके एम्प्लॉयर की सूचना आ गई होगी कि आपको दिसंबर के आखिर में या जनवरी की शुरूआत में टैक्स बचाने के लिए किए गए निवेश के बारे में बताना है। अगर आप कंपनी को इन्वेस्टमेंट के सबूत नहीं देंगे, तो आपका TDS कटना शुरू हो जाएगा। अगर आपने अभी तक टैक्स बचाने के लिए निवेश नहीं किया है तो अब कर लीजिए।
पता कीजिए की आपको टैक्स भरना है कि नहीं
सबसे पहले आपको यह जानना चाहिए कि आपकी टैक्स देनदारी बनती भी है या नहीं। इसके लिए पता करें कि साल भर की आपकी पूरी आमदनी पर कितना टैक्स बनेगा। टैक्स कैलकुलेट करने के लिए पहले आपको अपनी टैक्सेबल इनकम निकालनी होगी। इसमें 1 अप्रैल 2016 से 31 मार्च 2017 के बीच सभी स्त्रोतों से मिली आमदनी जोड़ी जाएगी।
टैक्सेबल इनकम के बारे में जानें
टैक्सेबल इनकम से यह तय होगा कि आपको टैक्स देना है या नहीं देना है, तो आपको इन्वेस्टमेंट की झंझट में नहीं फंसना पड़ेगा। लेकिन अगर टैक्स देना है तो उसे बचाने के लिए निवेश कर सकते हैं। बच्चों की फीस और PPF में जा रही रकम ऐसे आइटम हैं जिनका फायदा टैक्स बचाने में जाने-अनजाने होता ही है। सबसे पहले इन दोनों को मिलाकर जो रकम बन रही है उसके हिसाब से टैक्स निकाल कर देखें। अब भी टैक्स देनदारी बनती है तो आपको इन्वेस्ट करना होगा। अपनी जरुरत के हिसाब से आप बाकी रकम को इन्वेस्ट कर टैक्स बचा सकते हैं।
ये हैं उपाय
80C, 80CC और 80CCD के तहत दिए गए आइटम्स में किए गए निवेश पर डिडक्शन मिलता है। इसकी सीमा 1 लाख रुपये है। 1 लाख रुपए से ज्यादा का निवेश हुआ है तो भी डिडक्शन एक लाख तक ही मिलेगा। इसके लिए आप यहां कर सकते हैं निवेश:
- ट्यूशन फीस
- EPF OR GPF
- PPF
- जीवन बीमा पॉलिसी
- हाउसिंग लोन रीपेमेंट
- फिक्सड डिपॉजिट
- इंश्यारेंस कंपनियों के पेंशन प्लान
- पोस्ट ऑफिस टाइम डिपॉजिट
- सीनियर सिटिजंस सेविंग प्लान
- म्यूचुअल फंड
- यूनिट लिंक्ड इंश्यारेंस प्लान
- ELSS
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