नोटबंदी के बाद देश में होने वाले डिजिटल लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है। ये बात भी सच हैं कि नोटबंदी के बाद देश कैशलेस सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है।
नई दिल्ली: नोटबंदी के बाद देश में होने वाले डिजिटल लेनदेन में काफी बढ़ोतरी हुई है। ये बात भी सच हैं कि नोटबंदी के बाद देश कैशलेस सिस्टम की तरफ बढ़ रहा है। जी हां देशभर में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसके लिए सरकार भी पूरी तरह से काम कर रही हैं। यहीं कारण हैं कि देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन के मामले में भारी तेजी देखने को मिली है। साल 2018-19 में भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन में पिछले साल की अपेक्षा 51 फीसदी की बढ़ोतरी हुई है। इस बढ़ोतरी के साथ इस साल भारत में डिजिटल ट्रांजेक्शन 3,133.58 करोड़ को पार कर गया है। बता दें कि संसद में गुरुवार को सरकार ने बताया कि डिजिटल पेमेंट के मामले में सरकार को किसी भी तरह की कठिनाई नहीं दिख रहा है।
लेन-देन में साल दर साल बढ़ोतरी: रविशंकर प्रसाद
जानकारी दें कि राज्यसभा में दिये गए एक लिखित जवाब में इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्री रविशंकर प्रसाद ने कहा कि चालू वित्त वर्ष के पहले महीने में (30 अप्रैल 2019) तक 313 करोड़ का डिजिटल ट्रांजेक्शन हुआ है। इस सवाल पर कि क्या सरकार डिजिटल पेमेंट में संघर्ष की समस्या से अवगत है, मंत्री रविशंकर प्रसाद का कहना हैं कि नहीं डिजिटल भुगतान में ऐसा कोई संघर्ष या कठिनाई नहीं है और लेन-देन में साल दर साल बढ़ोतरी हो रही है।
डिजिटल ट्रांजेक्शन करना काफी हद तक सहुलियत
डिजिटल लेनदेन बेहद सुविधाजनक है, इससे लेनदेन बेहद आसान हो जाता है। कैश का टेंशन दूर हो जाता है और लेनदेन का पूरा रिकार्ड सुरक्षित रहता है। इतना ही नहीं डिजिटल पेमेंट को बढ़ावा देने के लिए बहुत से बैंक और पेमेंट कंपनियां अगल अगल और आकर्षक ऑफर के साथ बाजार में मौजूद हैं। इन ऑफर में से पेमेंट करने पर पेट्रोल खरीदने पर छूट, रेल टिकट पर छूट, बीमा खरीदने जैसे कई छूट शामिल हैं। ई-वालेट कंपनियां कैशबैक औफर, रिवार्ड प्वाइंट भी देती हैं।
डिजिटल ट्रांजेक्शन सुरक्षित भी
वित्तीय लेन देन में आसानी डिजिटल पेमेंट सिस्टम के लिए सबसे अच्छी बात है। आपको कैश ढोने, प्लास्टिक कार्ड, बैंक या एटीएम की लाइन में लगने की जरूरत नहीं है। खासतौर पर जब आप सफर में हों तो खर्च करने का यह सेफ और इजी विकल्प है। क्योंकि ये बात भी सच हैं कि कैश रखना सुरक्षित नहीं माना जाता है। आए दिनों पर्स का चोरी होना, चोरी, लूट मार जैसी चीजें आम हो गई हैं। ऐसे में ई-मनी एक सुरक्षित स्थान है।
इस बात से भी अवगत कराना चाहेंगे कि देश में डिजिटल ट्रांजेक्शन को बढ़ावा मिल रहा है जिसमें यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस सबसे आगे है। इसके बाद दूसरे नंबर पर नाम आता है Aadhar-Enabled Payment Channel (एईपीएस) का, जो माइक्रो एटीएम की कैटेगरी में आते हैं। वर्ष 2016 के बाद से एईपीएस का सालाना ग्रोथ रेट 150 फीसदी रहा है। नेशनल पेमेंट कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (एनसीपीआई) के आंकड़ों के मुताबिक मई में मइक्रो एटीएम के जरिए 9,000 करोड़ रुपए के 3.35 करोड़ ट्रांजेक्शन किए गए।
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