सरकार ने भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए पुराने नियमों में संशोधन किया है।
सरकार ने भारत की सड़कों को सुरक्षित बनाने के लिए पुराने नियमों में संशोधन किया है। इसके साथ ही नियमों का उल्लंघन करने वालों पर जुर्माना लगाने का भी प्रवधान मोटर व्हीकल (मोटर यान संशोधन) बिल 2019 के तहत संशोधित किया गया है। यह बिल केंद्रीय कैबिनेट में पास हो चुका है। संशोधित मोटर व्हीकल एक्ट 2019 के तहत नया नियम इसी महीने (अगस्त) से देशभर में लागू हो जाएगा और गलत ड्राइविंग करने वालों को भारी नुकसान देने के साथ ही जेल जाने की भी परिस्थिति बन सकती है। तो आइए आपको बताते हैं इस बारे में-

ये है मोटर व्हीकल बिल का नया नियम
आपको बता दें मोटर व्हीकल एक्ट में बदलाव करके ट्रैफिक के लिए सख्त कानून बनाए गए हैं। बिना लाइसेंस के वाहन चलाने के लिए पकड़े गए तो 500 रुपये की जगह 5,000 रुपये जुर्माना देना होगा। तय सीमा से ज्यादा खर्च में गाड़ी चलाई तो 400 की बजाय एक हजार से 4 हजार रुपए तक भरना होगा। शराब पीकर गाड़ी चलाते पकड़े गए तो 2000 की जगह अब 10,000 रुपये चुकाना होगा। बिना सीट बेल्ट के गाड़ी चलाने पर 100 रुपये की बजाय अब 1000 रुपये होगी। बिना हेल्मेट के निकले तो 100 रुपये का जुर्माना भी नहीं देंगे।
नाबालिग की वजह से हादसा हुआ तो
सड़क हादसा अगर किसी नाबालिग की वजह से हुआ तो हादसे के लिए नाबालिग के माता पिता या गाड़ी के मालिक को दोषी माना जाएगा। गाड़ी का पंजीकरण तो रद्द ही होगा 25 हजार रुपये जुर्माने के साथ-साथ 3 साल के लिए जेल भी जाना पड़ सकता है। यह हिट और रन के मामलों में पीड़ित को मुआवजा राशि 25 हजार रुपये से बढ़ाकर 2 लाख रुपये कर दिया गया है। जबकि सड़क हादसे में मौत पर पीड़ित के परिवार को अब 10 लाख रुपये का मुआवजा मिलेगा।
ठेकेदारों की ज्जिमेदारी होगी तय
नए मोटर व्हीकल एक्ट में वाहन निर्माता कंपनी और सड़क बनाने वाले ठेकेदार की जिम्मेदारी तय होगी। गाड़ी निर्माण में गड़बड़ी पर वाहन निर्माता कंपनी पर 100 करोड़ रुपए जुर्माने का प्रावधान है। साथ ही खराब सड़क निर्माण पर ठेकेदार पर एक लाख रुपए जुर्माने का प्रावधान किया गया है। नए कानून में मोटर दुर्घटना कोष की स्थापना की व्यवस्था है, जो सड़क का इस्तेमाल करने वाले प्रत्येक व्यक्ति को अनिवार्य बीमा कवर देगा।
नया नियम ज्यादा कारगर
जानकारों को लगता है कि नए नियमों को लागू करना ज्यादा महत्वपूर्ण होगा। नए मोटर वेहिकल कानून में ट्रांसपोर्ट कार्यालय पर निर्भरता भी कम की गई है। ड्राईविंग लाई और मेकिंग की प्रक्रिया अब पूरी तरह से अनलाइन होगी। साथ ही गाड़ियों का पंजीकरण अब डीलर खुद करेंगे। कमर्शियल ड्राइविंग लाई और अब 3 साल की बजाय 5 साल तक वैध रहेगा। इसके अलावा आकस्मिक होने पर इंश्योरेस क्लेम करने की प्रक्रिया भी आसान की गई है।
नए बिल के तहत ओला और उबर जैसे कैब एग्रीगेटर्स के लिए दिशानिर्देशों को विनियमित करते हुए, कैब सेवाएं राज्य सरकारों से लाइसेंस प्राप्त करेंगी। एग्रीगेटर्स को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों का भी पालन करना होगा, जिसका अर्थ है कि उपयोगकर्ताओं की पहचान की सुरक्षा के लिए डेटा स्टोरेज नियमों का अनुपालन करना।
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